latest-newsदेश

जिस सरकार को पूरा विपक्ष नहीं डिगा पाया, उसे Gen-Z ने कैसे झुकाया?

संवाददाता

नई दिल्ली। 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा कार्यकाल है. उनके कार्यकाल के दौरान किसान आंदोलन से लेकर एंटी सीएए-एनआरसी और SIR जैसे कई आंदोलन हुए हैं. विपक्ष का भी विभिन्न मुद्दों पर लगातार आंदोलन होता रहा है. विपक्ष संसद की कार्यवाही बाधित करने से लेकर सड़क पर आंदोलन करता रहा है, लेकिन नीट पेपर लीक मामले में Gen-Z के आंदोलन ने ऐसा रंग दिखाया कि सरकार को झुकना पड़ा.

शुक्रवार को सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए थे, जिनमें एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करना, एनटीए में सुधार करना, शिक्षा सचिव का तबादला, पेपर लीक पर 10 साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना आदि शामिल हैं, लेकिन शनिवार को आंदोलनकारियों की मांग सरकार ने मांग ली और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा.

प्रधान दूसरे मंत्री जिन्हें देना पड़ा इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए भी अहम है, क्योंकि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से वे पद से इस्तीफा देने वाले दूसरे मौजूदा केंद्रीय मंत्री हैं. ओडिशा में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार 2021 में शिक्षा मंत्री का पद संभाला था और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के जीतने के बाद उन्हें फिर से इस पद पर नियुक्त किया गया था.

प्रधान से पहले, 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से जनता के दबाव में सिर्फ एक और मौजूदा केंद्रीय मंत्री ने इस्तीफा दिया था, वह थे पत्रकार से नेता बने एमजे अकबर. उस समय विदेश राज्य मंत्री रहे अकबर ने अक्टूबर 2018 में अपना इस्तीफा दे दिया था. यह सीनियर पत्रकार प्रिया रमानी के उन पर खुलेआम यौन उत्पीड़न और गलत व्यवहार का आरोप लगाने के 10 दिन बाद हुआ था, हालांकि उन्होंने आरोपों को खारिज कर दिया था.

NEET-UG 2026 पेपर लीक और आंदोलन की शुरुआत

आइए जानें ऐसा क्या हुआ, जिसकी वजह से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. विरोध की शुरुआती वजह 3 मई को हुए NEET-UG 2026 मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम के कथित पेपर लीक और उसके बाद एग्जाम कैंसिल होने की वजह से 21 जून को दोबारा टेस्ट कराना पड़ा. एग्जाम और दोबारा टेस्ट के ऑर्डर के बीच, स्ट्रेस और ट्रॉमा की वजह से 12 छात्रों ने सुसाइड कर लिया. इस बात को लेकर जहां बहुत गुस्सा था, वहीं 15 मई, 2026 को एक सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम के राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत हुई.

CJP के बैनर तले 6 जून को देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही और इस्तीफे की मांग पर आंदोलन शुरू हो गये. NEET पेपर लीक के साथ-साथ, दूसरे बोर्ड एग्जाम में एडमिनिस्ट्रेटिव मुद्दों को लेकर लोगों का गुस्सा और बेचैनी ने देश भर में विरोध प्रदर्शनों को हवा दी.

जंतर-मंतर पर धरने से बना दवाब

देश भर में शुरुआती अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों के बाद, CJP फिर से इकट्ठा हुआ और 20 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स और युवाओं के एक ग्रुप के साथ अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. इस विरोध प्रदर्शन ने बहुत सारे युवाओं को अपील किया और इसने और भी बड़ी भीड़ को आकर्षित किया जो जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए.

सोनम वांगचुक, जिन्होंने मई के बीच में CJP के बनने पर खुद को ऑनरेरी कॉकरोच घोषित किया था, 28 जून को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया. 18 जुलाई को, पुलिस ने सोनम वांगचुक को विरोध स्थल से हटा दिया और उन्हें सफदरजंग हॉस्पिटल ले जाया गया क्योंकि उनके वाइटल साइन्स कम हो रहे थे और उनका वजन भी काफी कम हो गया था. बाद में उनकी पत्नी की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट के ऑर्डर के बाद 21 जुलाई को उन्हें मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन बाद में मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत के बाद 23 जुलाई को रात को उन्होंने अपना अनशन तोड़ दिया.

पुलिस एक्शन से आंदोलन को मिली हवा

इससे पहले 20 जुलाई को, प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स ने पार्लियामेंट तक एक मार्च निकालने का प्लान बनाया था. कहा जाता है कि संसद तक मार्च के दौरान पुलिस और सिक्योरिटी फोर्स ने स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज किया. पुलिस ने दावा किया है कि प्रोटेस्ट करने वालों की पत्थरबाजी में करीब 100 लोग घायल हुए हैं. पुलिस की लाठीचार्ज की पूरे देश में निंदा की गयी. विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया.

CJP की मुख्य मांग राष्ट्रीय परीक्षाओं की ईमानदारी में कथित तौर पर बार-बार नाकामी और कई पेपर लीक के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा रहा. वे प्रभावित छात्रों और आत्महत्या करने वालों के परिवारों के लिए मुआवजा की मांग की. साथ ही परीक्षा सिस्टम को और ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए बड़े सुधार की मांग की और यह आंदोलन तेज हो गया.

Gen Z आंदोलन के समर्थन में उतरे विशिष्ट लोग

इस आंदोलन में खास तौर पर, कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं (NEET और इसी तरह के दूसरे एंट्रेंस टेस्ट) के उम्मीदवार और Gen-Z थे. इसके अलावा, जिन लोगों ने अभिजीत दीपके के रुख के बाद विरोध के तौर पर ‘कॉकरोच’ का टैग लिया है, वे भी विरोध का हिस्सा बने. छात्र समूह, उम्मीदवारों के माता-पिता और कुछ सिविल-सोसाइटी के लोग या तो इसमें शामिल हुए हैं या एकजुटता दिखाई है. विपक्षी नेताओं ने भी अपना समर्थन दिया.

सरकार का जवाब शुरू में सख्त था. पुलिस ने संसद तक मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और 70 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए. हालांकि, पुलिस ने पेलेट गन के किसी भी इस्तेमाल से इनकार किया है और दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों के कथित पत्थरबाजी में 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

प्रधान के इस्तीफे से Gen-Z में खुशी की लहर

इस मुद्दे पर हफ्तो की चुप्पी के बाद पीएम मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और लीक में शामिल अपराधियों को कड़ी सजा दी जाएगी और भारत के युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए, लेकिन Gen-Z अपनी मांग पर अड़े रहे और अंततः सरकार को उनकी मांगों के सामने झुकना पड़ा और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे सीजेपी समर्थकों में इस्तीफे की खबर फैलते ही खुशी की लहर दौड़ गई. समर्थक झूमते और नाचते हुए जश्न मनाते नजर आए और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया.

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com