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ममता को फिर झटका: राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा, पार्टी में उबाल

ऐसी अटकलें हैं कि सुष्मिता देव बाद में बीजेपी में भी शामिल हो सकती हैं. उनके पिता यूपीए-1 सरकार में केंद्रीय मंत्री थे.

संवाददाता

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और झटका देते हुए राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को पार्टी और राज्यसभा के सदस्य के तौर पर इस्तीफा दे दिया. यह पार्टी के अंदर चल रही अनबन और विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस्तीफों के सिलसिले के बीच हुआ.

सुष्मिता देव ने बुधवार सुबह नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की. ऐसी अटकलें हैं कि वह बाद में बीजेपी में भी शामिल हो सकती हैं. टीएमसी में शामिल होने से पहले देव कांग्रेस में थीं. उनके पिता स्वर्गीय संतोष मोहन देव यूपीए-1 सरकार में केंद्रीय मंत्री थे.

उन्होंने एक पत्र में लिखा, ‘मैं राज्यसभा की मेंबरशिप से इस्तीफा दे रही हूं, जिसे तुरंत स्वीकार किया जाए. मैं माननीय डिप्टी चेयरमैन और राज्यसभा सेक्रेटेरिएट के सभी अधिकारियों का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं, जिन्होंने राज्यसभा मेंबर के तौर पर मेरे कार्यकाल के दौरान हर तरह की मदद और सहयोग दिया.’

इससे पहले 8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने संसद के ऊपरी सदन के सदस्य और टीएमसी की प्राइमरी मेंबरशिप से इस्तीफ़ा दे दिया था. अपने इस्तीफे में रे ने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल असेंबली चुनावों में टीएमसी की भारी हार पर उसकी आलोचना की. उन्होंने इस फ़ैसले को ममता बनर्जी की पार्टी के ’15 साल के अराजक शासन’ का नतीजा बताया.

इस्तीफ़ों का यह सिलसिला टीएमसी में फूट की चल रही अटकलों के बीच आया है, जिसमें लगभग 20 लोकसभा सांसद बागी हो गए हैं. बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने एएनआई को कन्फ़र्म किया था कि 20 सांसद के एक ग्रुप ने लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था के लिए औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट की है. उन्होंने कहा, ‘हम 20 सांसद हैं जिन्होंने स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था के लिए रिक्वेस्ट की है, और हम पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे.’

बागी सांसदों की केंद्रीय मंत्री और बीजेपी पश्चिम बंगाल चुनाव इंचार्ज भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि यह गुट एनडीए में मिल सकता है. संविधान के दसवें शेड्यूल, जिसे एंटी-डिफेक्शन लॉ भी कहा जाता है, के अनुसार बागी सांसदों को डिसक्वालिफिकेशन से बचने के लिए 2/3 बहुमत से मर्जर करना होगा.

इस बीच टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली के 10 जनपथ पर लोकसभा में विपक्ष के राहुल गांधी से मुलाकात की. कल टीएमसी चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने पार्टी में अंदरूनी अनबन के बीच कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मुलाकात की.

पश्चिम बंगाल असेंबली में पार्टी से निकाले गए विधायक रीताब्रत बनर्जी ने भी बगावत की अगुवाई की. बनर्जी जिन्हें टीएमसी से पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निकाल दिया गया था, ने 58 विधायकों के सपोर्ट से पश्चिम बंगाल असेंबली में एक अलग गुट बनाया, और बाद में सोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह विपक्ष के नेता चुने गए.

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