
संवाददाता
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद से यहां की राजनीति बदल सी गई है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की परेशानियां पीछा ही नहीं छोड़ रही हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी का तृणमूल कांग्रेस पार्टी में दो फाड़ होने की नौबत आ गई है. पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने खुलकर ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 60 विधायकों के समर्थन की बात कही है. तृणमूल कांग्रेस पार्टी टूटने की कगार पर पहुंच गई है. वहीं, आज ऋतब्रत बनर्जी थोड़ी देर पहले विधानसभा पहुंचे हैं. इन अफवाहों से पश्चिम बंगाल विधानसभा में अटकलों का दौर चल रहा है. वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी खेमे में यह ‘बगावत’ राज्य में नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर सकती है.
इससे पहले 1 जून को, उलुबेरिया ईस्ट के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तृणमूल कांग्रेस से निकाल दिया गया था. पार्टी ने बताया कि यह अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत फैसला लिया गया क्योंकि दोनों नेता बार-बार पार्टी लीडरशिप के निर्देशों को नहीं मान रहे थे और पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल थे. रातों-रात उनसे पार्टी के सभी पद और जिम्मेदारियां छीन ली गईं. राजनीतिक गलियारों में इस स्थिति की तुलना महाराष्ट्र के ‘शिंदे मॉडल’ से की जा रही है.
सूत्रों से यह भी पता चला है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट की तरफ से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप मे पेश किया जा रहा है. इसके साथ-साथ टीएमसी के करीब 20 विधायक विधानसभा पहुंच चुके हैं. यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ऋतब्रत का दावा है कि अभी लगभग 59 विधायक उनके साथ हैं. हालांकि, इन बागी विधायकों के नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
ऋतब्रत बनर्जी के साथ-साथ, एंटाली के विधायक संदीपन साहा की भूमिका भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है. तृणमूल कांग्रेस के टॉप लीडरशिप ने ‘नकली सिग्नेचर’ से जुड़े एक खास विवाद में नाम आने के तुरंत बाद दोनों नेताओं के खिलाफ सख्त एक्शन लिया. हालांकि, संदीपन और ऋतब्रत में से किसी ने भी निकाले जाने के बाद मीडिया से खुलकर बात नहीं की है, लेकिन आज विधानसभा में ऋतब्रत की नाटकीय मौजूदगी ने साफ दिखा दिया कि वे बिना लड़े हार मानने के मूड में नहीं हैं.



