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वीडी सतीशन होंगे केरलम के अगले CM, केसी वेणुगोपाल का कटा पत्ता

केरलम में कांग्रेस की जीत के हीरो वीडी सतीशन लगातार 6 बार विधायक चुने गए है

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। वीडी सतीशन केरलम के नए मुख्यमंत्री होंगे. कांग्रेस पार्टी की तरफ से गुरुवार को उनके नाम का फाइनल ऐलान किया गया. गुरुवार को केरल की एआईसीसी प्रभारी दीपा दासमुंशी ने उनके नाम की घोषणा की. सतीशन के चुने जाने का मतलब साफ है कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का पत्ता कट गया है.

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे बाकी चार राज्यों के साथ 4 मई को घोषित हुए थे. बाकी राज्यों में मुख्यमंत्रियों के नामों का ऐलान के साथ-साथ शपथ भी हो चुकी है, लेकिन केरलम में 10 दिन बाद भी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं किया था.

इस देरी की वजह आपसी खींचतान थी. दरअसल, कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद की रेस में तीन दावेदार थे. इसमें वीडी सतीशन के अलावा केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला का नाम चल रहा था. तीनों के समर्थक अपनी तरफ से जोर लगा रहे थे.

दूसरी तरफ वेणुगोपाल को नव निर्वाचित विधायकों के बहुमत का समर्थन प्राप्त था, जिनमें से कई उनके प्रति वफादार माने जाते हैं, साथ ही गांधी परिवार के साथ उनकी करीबी भी एक फैक्टर थी.

छठी बार के विधायक हैं वीडी सतीशन

वीडी सतीशन परावुर विधानसभा सीट से जीते हैं. वो छठी बार विधायक बने हैं. 2026 चुनाव में उन्होंने 20,600 वोटों से जीत हासिल की थी. पार्टी के नेतृत्व वाले मोर्चे की 102 सीटों की शानदार जीत का श्रेय सतीशन को ही दिया जा रहा है. उन्होंने काफी आक्रामक चुनाव प्रचार किया और एक व्यापक गठबंधन बनाया.

भ्रष्टाचार के आरोपों, शासन संबंधी मुद्दों और आर्थिक चिंताओं को लेकर पिनारयी विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार पर हमले की रणनीति भी उन्होंने ही तैयार की थी.

राहुल ने सुबह केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की

इस रस्साकशी को खत्म करने के लिए अलग-अलग मंथन चल रहा था. गुरुवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा से पहले पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ फाइनल राय-मशवरा किया था.

खड़गे के साथ हुई चर्चा में एआईसीसी की महासचिव प्रभारी दीपा दासमुंशी और दो वरिष्ठ पर्यवेक्षक- अजय माकन और मुकुल वासनिक शामिल थे. इन तीनों ने हाल ही में सभी नवनिर्वाचित विधायकों से बातचीत की थी और उनके मन की बात जानी थी.

राहुल गांधी ने बुधवार शाम को खड़गे के साथ 30 मिनट की बैठक की, जिसमें पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर चर्चा हुई. इसके बाद राहुल ने गुरुवार सुबह एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की थी. माना जा रहा है कि राहुल की तरफ से वेणुगोपाल को मनाया गया कि वो पीछे हट जाएं. केरल कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी आज बाद में होने वाली है.

केरल में कांग्रेस गठबंधन के पास 102 सीट

बता दें कि केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने 140 में से 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया है. केरल विधानसभा में कांग्रेस के पास 140 सदस्यों में से 63 विधायक हैं. इसके सहयोगी दलों इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के पास 22, केरल कांग्रेस (केईसी) के पास आठ और क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (आरएसपी) के पास तीन विधायक हैं.

केरलम में कांग्रेस की जीत के हीरो हैं वीडी सतीशन

केरल के नए सीएम होंगे वीडी सतीशन (Photo-PTI)

वीडी सतीशन ने कांग्रेस के एनएसयूआई से अपनी राजनीतिक सफर का आगाज किया है और अब सीएम बनने जा रहे हैं. केरलम विधानसभा चुनाव के बीच सतीशन ने कहा था कि अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन निर्णायक जीत नहीं दर्ज करता है तो वह राजनीतिक से सन्यास ले लेंगे. यह एक ऐसा साहसिक बयान था, जिसने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश और भरोसा जगा दिया था. इस तरह जीत के हीरो रहे वीडी सतीशन को तमाम मंथन के बाद कांग्रेस ने सत्ता की कमान सौंपने का फैसला किया है.

केरलम में कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए इस जीत की जड़ें 2021 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से जुड़ी, जब राहुल गांधी ने सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया था. उस समय जो फैसला जोखिम भरा और अनिश्चित लग रहा था, वो कैसे जीत की संजीवनी बन गया. वीडी सतीशन ने सिर्फ माहौल ही नहीं बनाने का काम किया बल्कि लेफ्ट को सत्ता से बेदखल करके दिखाया. ऐसे में हम बताते हैं कि वीडी सतीशन कौन है और कैसे उन्होंने सियासी पारी का आगाज किया.

वीडी सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में हुआ. उनके पिता का नाम के दामोदरन मेनन तो माता का नाम वीपी सरस्वती अम्मा है. वीडी सतीशन का सफर छात्र राजनीति की गलियों से शुरू होकर सत्ता के सिंहासन तक पहुंचा है. उनकी पहचान एक प्रखर वक्ता, तर्कशील नेता और नीतिगत मुद्दों पर गहरी पकड़ रखने वाले राजनेता के रूप में होती है.

एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर रहने वाले वीडी सतीशन ने अपनी राजनीतिक सफर का आगाज छात्र जीवन से किया. सतीशन की राजनीतिक पारी की शुरुआत उनके कॉलेज के दिनों में हुई. वे कांग्रेस की छात्र शाखा केरल छात्र संघ से जुड़े. वे एर्नाकुलम के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज और बाद में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में बेहद सक्रिय रहे. उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें KSU का राज्य अध्यक्ष और बाद में भारतीय युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव भी नियुक्त किया गया.

हाई कोर्ट में वकालत करने वाले वीडी सतीशन ने पहली बार 1990 के दशक के मध्य में परवूर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन जीत से महरूम रह गए थे. इस असफलता को जल्द ही एक नये अवसर में बदल दिया. अपने अगले प्रयास में उन्होंने 2001 में शानदार जीत हासिल की और इसके बाद लगातार इस सीट को बरकरार रखते हुए दो दशकों से अधिक समय में मजबूत जमीनी पकड़ बनाई.

केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण के करीबी सतीशन माने जाते हैं. परवूर से 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की। इस प्रकार विधानसभा की राजनीति में उनका 25 वर्षों से अधिक का सियासी सफर है.

केरल में संगठन से सत्ता तक पकड़

वीडी सतीशन को कांग्रेस संगठन से लेकर सत्ता तक का अनुभव है. पार्टी के भीतर उन्होंने संगठनात्मक भूमिकाएं भी निभाई हैं, जिनमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं. वो अपने व्यवस्थित कार्यशैली के लिये चर्चित सतीशन ने किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने से पहले उसे गहराई से समझने की आदत के कारण अपनी अलग पहचान बनाई.

डी सतीशन की सबसे बड़ी खूबी उनका संसदीय ज्ञान और डेटा के साथ अपनी बात रखना है. विधानसभा में उन्होंने सौर घोटाला और बार रिश्वत मामला जैसे बड़े मुद्दों पर तत्कालीन सरकारों को घेरा.

साल 2021 के केरलम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDFकी हार के बाद, पार्टी में बदलाव की मांग उठी. हाईकमान ने युवा और अनुभवी चेहरों को आगे लाने के लिए रमेश चेन्निथला की जगह वीडी सतीशन को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया.

सतीशन ने यह जिम्मेदारी केरल में कांग्रेस को फिर से जीवित करने और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार को मजबूती से चुनौती देने के लिए दी गई है. सतीशन का यह तरीका और विधानसभा में उनके त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप उन्हें कांग्रेस के भीतर मजबूत स्थिति बनाने में मददगार साबित हुए, भले ही लंबे समय तक उन्हें कार्यकारी पद नहीं मिल पाया. सामुदायिक और धार्मिक संगठनों के साथ कार्य संबंध बनाए रखते हुए उन्होंने तुष्टीकरण के खुले प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी है.

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