
संवाददाता
नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने प्रतिबंधित आतंकी शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई से देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कई बड़ी साजिशों को नाकाम किया गया है. इनमें भीड़भाड़ और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी करना, टार्गेटेड किलिंग्स करना, सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी और नकली नोटों का कारोबार शामिल था. हालांकि, एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क का बड़ा हिस्सा ध्वस्त किए जाने के बावजूद भट्टी के बचे हुए गुर्गे फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं. इस बार उनकी रणनीति में धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल प्रमुख हथियार बन गया है.
भर्ती रणनीति में बदलाव
यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित
अधिकारी के मुताबिक, यह पूरा प्रचार महज एक जाल था. नेटवर्क के संचालकों की युवाओं से किए गए शानदार जीवनशैली के वादों को पूरा करने की कोई मंशा नहीं थी. पहली बड़ी कार्रवाई में सैकड़ों गिरफ्तारियों के बाद भट्टी को पाकिस्तान भेज दिया गया था. भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत उसे आतंकवादी घोषित किया था. हालांकि, खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, हाल के महीनों में वह दुबई और पुर्तगाल भी गया है. वह विदेश में रहते हुए भी भारत में अपने नेटवर्क की गतिविधियों और नई साजिशों की निगरानी कर रहा है.
धर्म, पैसा और विदेश में बेहतर जिंदगी का लालच
अधिकारियों का कहना है कि भट्टी अब अपनी नई भर्ती मुहिम में धर्म, पैसा और बेहतर जीवनशैली के लालच को एक साथ इस्तेमाल करना चाहता है. इस बार धार्मिक पहचान और सम्मान की रक्षा के नाम पर युवाओं को उकसाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करके युवाओं को कम पैसे में भर्ती करने की योजना है. उन्हें महज तीन से पांच हजार रुपये देकर नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. इसके बदले दुबई, पाकिस्तान या नेपाल में बेहतर जिंदगी देने का वादा किया जा रहा है. जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क ने कई युवाओं के फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाए हैं, ताकि किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद वे आसानी से भारत से बाहर निकल सकें. अधिकारियों के अनुसार, भट्टी का मकसद केवल भारत में एक आतंकी नेटवर्क तैयार करना नहीं, बल्कि धार्मिक उद्देश्य के नाम पर युवाओं की ऐसी बड़ी जमात खड़ी करना है, जिसका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा सके.
पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश



