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शहजाद भट्टी का नया गेम, 700 गुर्गों की गिरफ्तारी के बाद अब अपना रहा नया तरीका, भारतीय एजेंसियां अलर्ट

संवाददाता

नई दिल्‍ली। भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने प्रतिबंधित आतंकी शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई से देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कई बड़ी साजिशों को नाकाम किया गया है. इनमें भीड़भाड़ और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी करना, टार्गेटेड किलिंग्‍स करना, सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी और नकली नोटों का कारोबार शामिल था. हालांकि, एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क का बड़ा हिस्सा ध्वस्त किए जाने के बावजूद भट्टी के बचे हुए गुर्गे फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं. इस बार उनकी रणनीति में धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल प्रमुख हथियार बन गया है.

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, भट्टी नेटवर्क को तोड़ना हाल के वर्षों में भारतीय जांच एजेंसियों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक रहा है. मुख्य नेटवर्क को काफी हद तक ध्वस्त कर दिया गया है, लेकिन उसके बचे हुए सदस्यों के साथ एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है. इस नेटवर्क से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट भी लगातार सामने आ रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि अब तक मेटा को ऐसे 100 से अधिक इंस्टाग्राम प्रोफाइल हटाने के अनुरोध भेजे जा चुके हैं. हालांकि, एक अकाउंट बंद होने के बाद 50 से अधिक नए अकाउंट सामने आ जाते हैं. एजेंसियों के लिए यह बड़ी चुनौती बनी हुई है.

भर्ती रणनीति में बदलाव

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी के अनुसार, भट्टी नेटवर्क ने अपनी भर्ती रणनीति में बदलाव किया है. जब इस नेटवर्क की शुरुआत हुई थी, तब युवाओं को जोड़ने के लिए धर्म को आधार नहीं बनाया गया था. अलग-अलग धर्मों के युवाओं को पैसों का लालच देकर भर्ती किया जाता था. कई युवाओं को महज पांच हजार रुपये तक देकर छोटे-मोटे काम सौंपे जाते थे. उन्हें भट्टी और उसके सहयोगियों की महंगी गाड़ियों तथा आलीशान घरों के सामने खिंचवाई गई तस्वीरें भी दिखाई जाती थीं. इसके जरिए युवाओं को अपराध की दुनिया में शामिल होकर ऐशोआराम की जिंदगी मिलने का सपना दिखाया जाता था.

यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित

अधिकारी के मुताबिक, यह पूरा प्रचार महज एक जाल था. नेटवर्क के संचालकों की युवाओं से किए गए शानदार जीवनशैली के वादों को पूरा करने की कोई मंशा नहीं थी. पहली बड़ी कार्रवाई में सैकड़ों गिरफ्तारियों के बाद भट्टी को पाकिस्तान भेज दिया गया था. भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत उसे आतंकवादी घोषित किया था. हालांकि, खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, हाल के महीनों में वह दुबई और पुर्तगाल भी गया है. वह विदेश में रहते हुए भी भारत में अपने नेटवर्क की गतिविधियों और नई साजिशों की निगरानी कर रहा है.

धर्म, पैसा और विदेश में बेहतर जिंदगी का लालच

अधिकारियों का कहना है कि भट्टी अब अपनी नई भर्ती मुहिम में धर्म, पैसा और बेहतर जीवनशैली के लालच को एक साथ इस्तेमाल करना चाहता है. इस बार धार्मिक पहचान और सम्मान की रक्षा के नाम पर युवाओं को उकसाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करके युवाओं को कम पैसे में भर्ती करने की योजना है. उन्हें महज तीन से पांच हजार रुपये देकर नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. इसके बदले दुबई, पाकिस्तान या नेपाल में बेहतर जिंदगी देने का वादा किया जा रहा है. जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क ने कई युवाओं के फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाए हैं, ताकि किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद वे आसानी से भारत से बाहर निकल सकें. अधिकारियों के अनुसार, भट्टी का मकसद केवल भारत में एक आतंकी नेटवर्क तैयार करना नहीं, बल्कि धार्मिक उद्देश्य के नाम पर युवाओं की ऐसी बड़ी जमात खड़ी करना है, जिसका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा सके.

पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश

जांच एजेंसियों के मुताबिक, भट्टी नेटवर्क की गतिविधियां अब सीसीटीवी कैमरे लगाने, मादक पदार्थों की तस्करी और नकली नोटों के प्रसार तक सीमित नहीं हैं. पुलिस ने इस नेटवर्क का संबंध पंजाब में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर किए गए हमलों, जालंधर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मुख्यालय के बाहर हुए विस्फोट और झारखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय पर पेट्रोल बम हमले से भी जोड़ा है. अधिकारियों को आशंका है कि नेटवर्क आने वाले समय में इसी तरह की गतिविधियों को कहीं बड़े स्तर पर अंजाम देने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं का कट्टरपंथीकरण करने और भारत के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाने की रणनीति जारी रहेगी, जबकि हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा.

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