
संवाददाता
मुंबई । एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत से एक बात के संकेत जरूर मिलते हैं कि कोई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश हुई है. अब यह संदेश किसके लिए था और इसके पीछे क्या रणनीति है, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकता है.
दिवाली के बाद होगी बात
मुलाकात के दौरान शरद पवार ने कहा कि उन्हें अगले दिन सुबह 10 बजे अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी और दिवाली के बाद दोनों बैठकर बातचीत करेंगे. जवाब में प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि वह 10 नवंबर से मुंबई में रहेंगे और शरद पवार जब भी कहेंगे, दोनों साथ बैठकर चर्चा करेंगे.
दोनों एनसीपी के विलय का मुद्दा अहम
अब सवाल उठता है कि आखिर दिवाली के बाद होने वाली इस बैठक का एजेंडा क्या होगा? दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है?. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा दोनों एनसीपी के विलय का है. अजित पवार के निधन से पहले अजित पवार गुट और एनसीपी-शरदचंद्र पवार के नेताओं के बीच विलय को लेकर करीब चार बैठकें हुई थीं. लेकिन अजित पवार के निधन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में पीछे चला गया. अब एक बार फिर दोनों एनसीपी को एक साथ लाने की कोशिशों की चर्चा हो रही है. बताया जा रहा है कि प्रफुल्ल पटेल भी चाहते हैं कि महाराष्ट्र में दोनों गुट एक साथ आएं.
अमित शाह के साथ मीटिंग में उठा मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में भी दोनों एनसीपी के विलय का मुद्दा प्रमुखता से उठा था. इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे, लेकिन सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार मौजूद नहीं थे. इसी बैठक को लेकर शरद पवार ने प्रफुल्ल पटेल से जानकारी ली. हालांकि, दोनों के बीच हुई पूरी बातचीत सार्वजनिक नहीं हुई है.
पार्थ पवार की कार्यशैली को लेकर नाराजगी
दूसरी तरफ अजित पवार गुट के भीतर भी नेतृत्व और फैसलों को लेकर असंतोष की खबरें हैं. पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी पार्थ पवार की कार्यशैली और नियुक्तियों को लेकर बताई जा रही है. आरोप है कि कई फैसलों में वरिष्ठ नेताओं से सलाह नहीं ली जा रही है.
प्रफुल्ल पटेल की स्थिति को समझना भी इस घटनाक्रम में अहम है. जब एनसीपी एकजुट थी, तब शरद पवार के बाद प्रफुल्ल पटेल को पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिना जाता था. उनका राजनीतिक प्रभाव काफी बड़ा था. लेकिन अजित पवार के निधन के बाद बदले नेतृत्व समीकरणों में उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
शरद पवार पर निर्भर है फैसला
वहीं, सुनेत्रा पवार की ओर से पार्टी को अलग पहचान के साथ आगे बढ़ाने की इच्छा और वरिष्ठ नेताओं के बीच दोनों गुटों के विलय की मांग को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं.इस पूरे घटनाक्रम में अंतिम फैसला शरद पवार की भूमिका पर निर्भर करेगा. वह विलय को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और भविष्य की राजनीति के लिए कौन सा रास्ता चुनते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी.
पीएम मोदी ने की शरद पवार से बात
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शरद पवार को किया गया फोन भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है. शरद पवार की तबीयत खराब होने के दौरान प्रधानमंत्री ने फोन कर उनका हालचाल जाना था. बातचीत में उन्होंने शरद पवार से अपनी सेहत का ध्यान रखने को कहा था. साथ ही सुप्रिया सुले का जिक्र करते हुए कहा था कि देश की राजनीति वह और सुप्रिया सुले संभाल लेंगे.प्रधानमंत्री के इस बयान को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। चर्चा है कि क्या एनसीपी-शरदचंद्र पवार पार्टी भविष्य में एनडीए के करीब आ सकती है?.
बताया जाता है कि बीजेपी की ओर से दोनों एनसीपी के एक साथ आने की स्थिति में एनडीए के साथ जुड़ने की शर्त रखी गई है. ऐसे में दोनों गुटों का विलय और उसके बाद उनकी राजनीतिक दिशा, दोनों बड़े सवाल बने हुए हैं. एक तरफ प्रधानमंत्री का शरद पवार से संपर्क, दूसरी तरफ प्रफुल्ल पटेल की उनसे मुलाकात और तीसरी तरफ एनसीपी के भीतर चल रही नेतृत्व की खींचतान. इन सभी घटनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी नजर दिवाली के बाद होने वाली शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की बैठक पर है. इस बैठक में क्या चर्चा होगी और क्या दोनों एनसीपी के भविष्य को लेकर कोई नई पहल होगी, इसका इंतजार रहेगा.



