
संवाददाता
इलाहाबाद । सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला की 10 साल की सजा को हाईकोर्ट ने सस्पेंड कर दिया। दोनों को जमानत भी दे दी। गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डबल पैन कार्ड मामले में यह फैसला सुनाया है। हालांकि, कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब्दुल्ला के जेल से बाहर निकलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, आजम अभी जेल से बाहर आएंगे या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। वजह आजम के खिलाफ अभी दो पेंडिंग केस हैं।
आजम के खिलाफ एक मामला ईडी ने हाल ही में दर्ज किया है। जबकि एक मामला 10 सितंबर का है, जिसमें यूपी विजिलेंस ने आजम के खिलाफ केस दर्ज किया था। अगर इन मामलों में पुलिस वारंट-बी नहीं लेती है तो आजम जेल से बाहर आ सकते हैं।
आजम ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती को दी थी
आजम को बेटे अब्दुल्ला के डबल पैन कार्ड मामले में रामपुर की एमपीएमएलए कोर्ट ने दोषी ठहराया था। 17 नवंबर 2025 को कोर्ट ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।
इस मामले में सरकार के वकील ने 5 मई 2026 को सजा बढ़ाने के लिए रामपुर की अपर कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इसमें सुनवाई के बाद कोर्ट ने 23 मई 2026 को आजम की सजा को 3 साल बढ़ाकर 10 साल कर दिया था। अब्दुल्ला की सजा को कोर्ट ने नहीं बढ़ाया था।
आजम ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। 15 अक्टूबर को बहस के बाद हाईकोर्ट जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या है दो पैन कार्ड का मामला? 2019 में दर्ज हुआ था मुकदमा
इस मामले की शुरुआत साल 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर BNS की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। साल 2017 में बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने भी इस संबंध में शिकायत की थी।
आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो पैन कार्ड थे। एक पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993, जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनाव और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया गया।



