
संवाददाता
अयाेध्या l राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ के नाम की घोषणा हो गई है. भारतीय वायुसेना के जांबाज पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है. ट्रस्ट के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पूर्व सैन्य शीर्ष अधिकारी को मंदिर प्रबंधन की इतनी बड़ी कमान सौंपी गई है. मंदिर के बढ़ते विस्तार और हाई-टेक सुरक्षा तंत्र को देखते हुए एक सख्त और कुशल प्रशासक की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद हुआ अंतिम फैसला
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति के लिए एक उच्च स्तरीय चयन समिति बनाई गई थी. इसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और विशेषज्ञ सदस्य सुरेश हावरे शामिल थे. चयन प्रक्रिया के दौरान शुरुआत में 16 योग्य आवेदकों को शॉर्टलिस्ट कर उनके इंटरव्यू लिए गए. इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र और योगेश्वर मिश्रा समेत 6 प्रमुख नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को भेजा गया था. अंततः ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास पर हुई अहम बैठक में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई.
कारगिल के महानायक: जब मिराज से तबाह किए थे दुश्मन के बंकर

जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के बेहद सम्मानित और साहसी फाइटर पायलट रहे हैं. 1999 के कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी. वह उस विशेष तकनीकी टीम के प्रमुख सदस्य थे, जिसने मिराज 2000 लड़ाकू विमानों में लेजर-गाइडेड बमों को फिट (इंटीग्रेट) करने का असंभव सा दिखने वाला काम कर दिखाया था. इन्हीं सटीक बमों के जरिए टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर छिपे दुश्मनों के ठिकानों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद किया गया था. इस अचूक मिशन ने कारगिल युद्ध का रुख भारत के पक्ष में मोड़ने में बेहद निर्णायक भूमिका अदा की थी.
38 साल का शानदार सैन्य करियर और 3000 घंटे की उड़ान
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे. अपने 38 वर्षों से अधिक के लंबे सेवाकाल में उनके नाम 3000 से अधिक घंटों का सुरक्षित उड़ान अनुभव दर्ज है. उन्होंने सेवा के दौरान 18 से अधिक किस्म के फाइटर जेट, मालवाहक विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए. इसके अलावा वे वायुसेना के कुशल फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे हैं. उनकी इसी असाधारण और अनुकरणीय सेवा के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों-सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक (SYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से नवाजा जा चुका है.
उच्च प्रशासनिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई
जितेंद्र मिश्रा न केवल एक बेहतरीन पायलट रहे हैं, बल्कि उनका प्रशासनिक रिकॉर्ड भी बेहद मजबूत रहा है. वे देश की सबसे महत्वपूर्ण ‘पश्चिमी वायु कमान’ के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में ऑपरेशंस और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट और बरेली (15 विंग) व पठानकोट (18 विंग) जैसे संवेदनशील एयरबेस की कमान बतौर एयर ऑफिसर कमांडिंग संभाली है. शिक्षा की बात करें तो वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़कवासला और वायुसेना अकादमी डुंडीगल के छात्र रहे हैं. उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के मशहूर ‘रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज’ से आधुनिक रणनीति और सुरक्षा का उच्च प्रशिक्षण हासिल किया है.
अयोध्या के राम मंदिर में बनाए गए 3 नए ट्रस्टी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी शामिल किए गए हैं. यह अयोध्या के मदन मोहन पांडेय , दिल्ली के महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की निर्मला यादव हैं. अयोध्या में मणिराम दास जी छावनी में बुधवार को हुई राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में इन तीन नए ट्रस्टियों को शामिल करने का फैसला लिया गया.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ट्रस्टियों के तीन पद खाली थे. तीन ट्रस्टियों की नियुक्तियां चंपत राय, राजेश मिश्रा और स्वर्गीय विमलेन्द्र मोहन मिश्रा के स्थान पर की गई है. विमलेंद्र मोहन मिश्र के निधन के कारण एक पद पहल से रिक्त था. बाद में राम मंदिर में कथित दान चोरी का मामला सामने आने के के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और राजेश मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था. इस तरह ट्रस्टियों के तीन पद खाली हो गए थे.



