
संवाददाता
गाजियाबाद। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास प्रस्तावित एयरोसिटी टाउनशिप की जमीन को लेकर जीडीए ने अब एक बार फिर सर्वे कराने का फैसला किया है। योजना के पहले चरण में जमीन को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद प्राधिकरण पुराने सर्वे की दोबारा जांच कराएगा। इसके लिए राजस्व विभाग और जीडीए की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचेगी।
100 से अधिक लोगों ने दर्ज कराई थी आपत्ति
एयरोसिटी टाउनशिप के पहले चरण के लिए 200 हेक्टेयर से अधिक जमीन प्रस्तावित है। इसके लिए पहले हुए सर्वे के रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। उस समय राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित जमीन खाली दर्ज थी। नोटिस जारी होने के बाद मोरटी, अटौर और नंगला गांव के 100 से अधिक लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई।
जीडीए दोबारा कराएगा सर्वे
ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियों में बताया कि रिकॉर्ड में जिस जमीन को खाली दिखाया गया है, वहां अब आबादी बस चुकी है। किसानों की ओर से यह जानकारी सामने आने के बाद पहले सर्वे की स्थिति पर दोबारा जांच की जरूरत महसूस हुई। जीडीए ने अब मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखने का फैसला किया है, ताकि रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति को लेकर सामने आए बिंदुओं की जांच हो सके।
मोरटी, अटौर और नंगला जाएगी टीम
अब राजस्व विभाग और जीडीए की टीम मोरटी, अटौर और नंगला में जाकर जमीन का दोबारा सर्वे करेगी। सर्वे के दौरान पहले सामने आई तकनीकी कमियों और किसानों की आपत्तियों को भी देखा जाएगा। प्राधिकरण का मानना है कि इस प्रक्रिया से विवादित बिंदुओं की स्थिति स्पष्ट होगी और एयरोसिटी के लिए जरूरी जमीन का अंतिम खाका तैयार करने में मदद मिलेगी।
जीडीए दोबारा कराएगा सर्वे
ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियों में बताया कि रिकॉर्ड में जिस जमीन को खाली दिखाया गया है, वहां अब आबादी बस चुकी है। किसानों की ओर से यह जानकारी सामने आने के बाद पहले सर्वे की स्थिति पर दोबारा जांच की जरूरत महसूस हुई। जीडीए ने अब मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखने का फैसला किया है, ताकि रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति को लेकर सामने आए बिंदुओं की जांच हो सके।
मोरटी, अटौर और नंगला जाएगी टीम
अब राजस्व विभाग और जीडीए की टीम मोरटी, अटौर और नंगला में जाकर जमीन का दोबारा सर्वे करेगी। सर्वे के दौरान पहले सामने आई तकनीकी कमियों और किसानों की आपत्तियों को भी देखा जाएगा। प्राधिकरण का मानना है कि इस प्रक्रिया से विवादित बिंदुओं की स्थिति स्पष्ट होगी और एयरोसिटी के लिए जरूरी जमीन का अंतिम खाका तैयार करने में मदद मिलेगी।



