
संवाददाता
नई दिल्ली। मानसून सत्र के अब केवल चार कार्य दिवस बचे हैं, लेकिन संसद में जारी गतिरोध के बीच महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर अब भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. लंबे समय बाद संसदीय कार्यमंत्री ने साफ किया कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के मुद्दे पर अपना बयान देंगे, लेकिन इस दौरान विपक्ष बाधा उत्पन्न न करे. इसके बावजूद विपक्ष का हंगामा जारी रहा. लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई.
सपा और कांग्रेस को अब लेना है निर्णय- रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी ने मांग की थी कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बारे में संसद में बयान दें. हमने साफ कर दिया है कि गृह मंत्री अमित शाह न सिर्फ बयान देंगे, बल्कि पूरी बहस और चर्चा का जवाब भी देंगे. हमने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में पहले ही कह दिया है कि सरकार छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और हर एक मुद्दे पर बात करने को तैयार है. विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए और कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए. हमने अपना प्रस्ताव रख दिया है. अब, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच कुछ मतभेद दिख रहे हैं—जिन्हें उन्हें सुलझाना होगा. जहां तक छात्रों के मुद्दे की बात है, हम चर्चा के लिए तैयार हैं. हमने अपना पक्ष रख दिया है. अब, यह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निर्भर है कि वे अपने बीच के मतभेदों को सुलझाएं.”
गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब
संसद में गतिरोध पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “सरकार का प्रस्ताव बिल्कुल साफ है कि वह छात्रों के आंदोलन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर पूरी और विस्तार से चर्चा करने के लिए तैयार है. विपक्ष से मेरी बस यही बात है कि जब चर्चा और जवाब हो रहा हो, तो विपक्ष को गृह मंत्री का बयान रोकने के लिए हंगामा नहीं करना चाहिए. उन्हें गृह मंत्री और सरकार का जवाब सुनना चाहिए. एक बार चर्चा शुरू हो जाए, तो हमें हर पहलू पर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए.”
सहकारी विकास निगम का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने वाला विधेयक लोकसभा में पेश
सरकार ने सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करना है.
विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह विधेयक पेश किया, हालांकि विधेयक सहकारिता मंत्री अमित शाह के नाम से सूचीबद्ध था.
विपक्ष के सांसद अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे.
विधेयक के तहत एनसीडीसी को सहकारी समितियों या इस क्षेत्र के विकास में लगी किसी भी इकाई को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिल सकेगा.
सहकारिता मंत्रालय के तहत आने वाला एनसीडीसी एक वैधानिक निकाय है. इसकी स्थापना 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत की गई थी.
एनसीडीसी के प्रमुख कार्यों में कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों और अन्य अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और आयात-निर्यात से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाना, उन्हें बढ़ावा देना और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना शामिल है.
लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक के अनुसार, इसके जरिये मूल अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव है.
इस नये विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, जून 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और केंद्र सरकार द्वारा सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद सहकारी क्षेत्र के विकास में एनसीडीसी की भूमिका काफी बढ़ गई है.
इसके अनुसार इसलिए, विधेयक में एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र (अधिकार क्षेत्र) को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत एनसीडीसी का दायरा केवल सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक सीमित न रहकर, सहकारी विकास से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक किया जाएगा.
इसके अलावा विधेयक में एनसीडीसी को सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़े किसी भी संस्थान को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है, बशर्ते इन धनराशियों का इस्तेमाल सहकारी उद्देश्यों के लिए किया जाए.



