
संवाददाता
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के समकालीन इतिहास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर इस बात का सबसे अचूक और जीवंत प्रमाण है कि उनके खिलाफ रची गई हर राजनीतिक साजिश, प्रायोजित आंदोलन और व्यक्तिगत हमला उनके कद को घटाने के बजाय उन्हें और अधिक विशालकाय बनाने का जरिया बन गया। बीते दो दशकों से अधिक समय में जब-जब मीडिया के एक खास वर्ग या विपक्षी खेमे के सुनियोजित अभियानों के माध्यम से पीएम मोदी की छवि पर चोट करने का कुत्सित प्रयास हुआ, तब-तब उन्होंने स्थापित पारंपरिक राजनीतिक पैंतरों को दरकिनार कर सीधे ‘जन-अदालत’ का रुख किया। विरोधियों द्वारा फेंके गए हर पत्थर को उन्होंने अपनी सफलता की नींव और रक्षा कवच बना लिया।
चाहे कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा पेपर लीक को लेकर प्रायोजित प्रदर्शन हों या फिर विदेशी ताकतों द्वारा गढ़ी गई अंतर्राष्ट्रीय साजिशें, पीएम मोदी के खिलाफ रचे गए ऐसे तमाम नैरेटिव हमेशा की तरह धराशायी ही साबित होंगे। भारत विरोधी एजेंडों और विदेशी प्रायोजित घेराबंदी का यह नया दौर भी अंततः पूरी तरह विफल होगा और पीएम मोदी जन-समर्थन के बल पर पहले से भी अधिक मजबूत होकर उभरेंगे।
‘मन की बात’ के 100 से अधिक ऐतिहासिक संस्करणों, तकनीक के अभूतपूर्व उपयोग और देश के करोड़ों ‘लाभार्थियों’ से सीधे आत्मीय संवाद ने एक ऐसा अभेद्य किला तैयार किया, जिसे विपक्ष का कोई भी दुष्प्रचार या नकारात्मक नैरेटिव भेद नहीं सका। राजनीतिक घेराबंदी और चौतरफा षड्यंत्रों के बीच पीएम मोदी का एक ही मंत्र रहा—’140 करोड़ देशवासियों का भरोसा’। नतीजा यह रहा कि विरोधियों के हर वार के बाद जनता के साथ उनका भावनात्मक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्ता पहले से कहीं अधिक प्रगाढ़, अटूट और विजयी बनकर उभरा।
2014 में ‘मौत का सौदागर’ जैसे निजी हमलों का करारा जवाब
विरोधी साजिश:
2014 के चुनाव में जब विपक्ष के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं बचा, तो उन्होंने नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए ‘मौत का सौदागर’ और ‘विभाजनकारी’ जैसे निचले स्तर के व्यक्तिगत हमले किए।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने इन हमलों को अपनी ताकत बनाते हुए इसे गुजरात और देश की जनता के स्वाभिमान से जोड़ दिया। उन्होंने नकारात्मकता के जवाब में ‘सुशासन और विकास’ का एजेंडा पेश किया, जिसके सामने विपक्ष का अहंकार बह गया और जनता ने उन्हें ऐतिहासिक प्रचंड बहुमत देकर देश का नेतृत्व सौंपा।
‘सूट-बूट की सरकार’ का ताना और जन-कल्याण का मास्टरस्ट्रोक
विरोधी साजिश:
2015-16 में राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस ने सरकार पर ‘सूट-बूट की सरकार’ का ठप्पा लगाकर उन्हें उद्योगपति-समर्थक और गरीब-विरोधी साबित करने का भ्रामक अभियान चलाया।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने इसका जवाब ‘जन-धन’, ‘उज्जवला’, और ‘पीएम आवास’ जैसी क्रांतिकारी जन-कल्याणकारी योजनाओं से दिया। सीधे डीबीटी (DBT) के जरिए करोड़ों गरीबों तक हक पहुंचाकर उन्होंने साबित किया कि उनकी सरकार गरीबों और वंचितों की सच्ची हमदर्द है।
नोटबंदी पर महाघेराबंदी और UP चुनाव 2017 में ऐतिहासिक जीत
विरोधी साजिश:
2016 में जब देश हित में नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया, तो पूरे विपक्ष ने संसद से लेकर सड़क तक देश को भ्रमित करने और अराजकता फैलाने की हरसंभव कोशिश की।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने इसे काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक धर्मयुद्ध के रूप में पेश किया। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता ने विपक्ष के हर भ्रम को खारिज करते हुए भाजपा को प्रचंड और ऐतिहासिक जीत दिलाई।
GST पर आलोचना और ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का ऐतिहासिक सुधार
विरोधी साजिश:
जीएसटी लागू होने के शुरुआती दौर में विपक्ष और व्यापारिक संघों के एक वर्ग ने इसे अर्थव्यवस्था का विनाश बताकर व्यापारियों में असंतोष भड़काने की साजिश रची।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए नियमों को सरल बनाया और इसे ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बताने वाले विपक्ष को जवाब दिया। आज जीएसटी कलेक्शन के नए रिकॉर्ड और ‘वन नेशन, वन टैक्स’ के आर्थिक एकीकरण ने भारत को एक मजबूत आर्थिक महाशक्ति बना दिया है।
राफेल सौदा, ‘चौकीदार चोर है’ का तंज और ‘मैं भी चौकीदार’ की आंधी
विरोधी साजिश:
2019 के आम चुनाव से ठीक पहले राहुल गांधी ने ‘राफेल सौदे’ में झूठे आरोपों की बुनियाद पर ‘चौकीदार चोर है’ का आक्रामक और अमर्यादित नारा गढ़ा।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने इस हमले को राष्ट्र रक्षा और सेना के स्वाभिमान से जोड़ दिया। उनके आह्वान पर पूरा देश ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान से जुड़ गया। सुप्रीम कोर्ट से राफेल को हरी झंडी मिली और जनता ने 303 सीटें देकर विपक्ष के इस सबसे बड़े दांव को पूरी तरह नाकाम कर दिया।
पुलवामा पर राजनीति और बालाकोट एयरस्ट्राइक पर सबूत मांगने का दांव
विरोधी साजिश:
पुलवामा आतंकी हमले के बाद जहां पूरा देश गमगीन था, वहीं विपक्ष ने सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठाए। बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद सेना के शौर्य और पराक्रम के सबूत मांगकर राष्ट्रहित से समझौता करने का प्रयास किया।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘घर में घुसकर मारने’ का दृढ़ संकल्प दिखाया। देश की जनता ने सेना पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को सिरे से नकार दिया और मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा के विज़न पर मुहर लगाई।
शाहीन बाग आंदोलन और सीएए (CAA) पर फैलाया गया भ्रम
विरोधी साजिश:
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का सच छुपाकर विपक्ष ने अल्पसंख्यकों में डर का माहौल बनाया और दिल्ली के शाहीन बाग को देशव्यापी प्रदर्शनों का केंद्र बनाकर माहौल बिगाड़ने की साजिश रची।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी बिना किसी तुष्टिकरण के अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने साबित किया कि CAA किसी की नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि प्रताड़ित शरणार्थियों को हक देने का कानून है। देश के बहुसंख्यक वर्ग ने मोदी के इस राष्ट्रहित के कदम का पुरजोर समर्थन किया।
अनुच्छेद 370 का खात्मा और विपक्ष के गृहयुद्ध की भविष्यवाणियों का अंत
विरोधी साजिश:
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले पर विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय ताकतों ने देश में खून-खराबा और भारी अशांति फैलने की खौफनाक आशंकाएं जताई थीं।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी के अदम्य इच्छाशक्ति और कुशल राजनीतिक प्रबंधन के बल पर बिना एक भी गोली चले धारा 370 इतिहास बन गई। आज कश्मीर विकास और पर्यटन के नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिसने विपक्षी दुष्प्रचार के मुंह पर करारा थप्पड़ जड़ा है।
किसान आंदोलन और नीतिगत परिपक्वता का परिचय
विरोधी साजिश:
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चले 13 महीने के आंदोलन का इस्तेमाल विपक्षी दलों ने सरकार को उखाड़ फेंकने और किसान-विरोधी नैरेटिव बनाने के लिए किया।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने एक उच्च कोटि के संवेदनशील और लोकतांत्रिक राजनेता का परिचय देते हुए खुद देश के सामने आकर कानून वापसी का ऐलान किया। उनके इस कदम ने ‘अहंकारी नेता’ के विपक्षी नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में किसानों ने फिर से मोदी पर ही विश्वास जताया।
कोरोना काल का संकट और दुनिया का सबसे बड़ा स्वदेशी टीकाकरण
विरोधी साजिश:
कोविड की दूसरी लहर में जब पूरी दुनिया परेशान थी, तब विपक्ष और विदेशी मीडिया ने भारत की छवि को धूमिल करने और महामारी पर गंदी राजनीति करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने दुनिया का सबसे बड़ा ‘मेड इन इंडिया’ स्वदेशी टीकाकरण अभियान और 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त राशन योजना चलाकर स्थिति को ऐतिहासिक रूप से संभाला। ‘वैक्सीन मैत्री’ के जरिए वे वैश्विक पटल पर एक महान मानवतावादी नेता बनकर उभरे।
पेगासस, अडानी विवाद और संसद ठप करने की साजिश
विरोधी साजिश:
विदेशी रिपोर्ट्स (हिंडनबर्ग, पेगासस) के नाम पर विपक्ष ने संसद को महीनों ठप रखा और पीएम मोदी पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का झूठा आरोप लगाया।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने संसद के पटल से दहाड़ते हुए कहा कि “140 करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद ही उनका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।” सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्ष जांचों में कोई सबूत न मिलने से विपक्ष का यह आंतरराष्ट्रीय स्तर का गुब्बारा भी फुस हो गया।
अग्निपथ योजना पर भ्रम और सेना के आधुनिकीकरण का संकल्प
विरोधी साजिश:
सैन्य सुधार के तहत लाई गई ‘अग्निपथ योजना’ को लेकर विपक्ष ने युवाओं को भड़काकर देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन कराने की कोशिश की।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी अपनी नीति पर कायम रहे और अग्निवीरों की पहली खेप का सफल समावेश करके यह दिखाया कि यह कदम भारतीय सेना को युवा, हाई-टेक और चुस्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक मास्टरस्ट्रोक है।
मणिपुर हिंसा पर अविश्वास प्रस्ताव और विपक्ष का फ्लॉप दांव
विरोधी साजिश:
मणिपुर के दुखद जातीय संघर्ष का राजनीतिक लाभ लेने के लिए विपक्ष ने संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया और पीएम मोदी की नीयत पर सवाल उठाए।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने संसद में विपक्ष के हर तथ्यहीन आरोप की धज्जियां उड़ाईं। अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह गिर गया और जनता ने देखा कि विपक्ष को मणिपुर के समाधान में नहीं, सिर्फ राजनीति में दिलचस्पी थी।
‘भारत जोड़ो यात्रा’ की लामबंदी और मोदी का ग्लोबल विज़न
विरोधी साजिश:
कांग्रेस द्वारा निकाली गई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘न्याय यात्रा’ का मुख्य लक्ष्य पीएम मोदी की व्यक्तिगत छवि को जन-विरोधी और नफरत फैलाने वाली दर्शाना था।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी राजनीतिक जुबानी जंग में उलझने के बजाय G20 की ऐतिहासिक सफलता, रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प में जुटे रहे। नतीजतन, यात्रा के तुरंत बाद हुए हिंदी भाषी राज्यों के चुनावों में जनता ने बीजेपी की झोली जीत से भर दी।
केंद्रीय एजेंसियों (ED-CBI) पर आरोप और भ्रष्टाचार-विरोधी सख्त रुख
विरोधी साजिश:
भ्रष्टाचार के मामलों में फंसने पर विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्रीय एजेंसियों (ED, CBI) के ‘दुरुपयोग’ का रोना रोया और खुद को पीड़ित की तरह पेश किया।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने साफ कह दिया कि “भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई रुकने वाली नहीं है।” जनता ने मोदी के इस भ्रष्टाचार-विरोधी सख्त रुख का जमकर समर्थन किया, जिससे विपक्षी विक्टिम कार्ड पूरी तरह फेल हो गया।
दिल्ली शराब नीति घोटाला और ‘कट्टर ईमानदार’ के चेहरे का बेनकाब होना
विरोधी साजिश:
दिल्ली में शराब नीति घोटाले के माध्यम से विपक्ष के कुछ नए दलों ने खुद को ‘कट्टर ईमानदार’ बताकर पीएम मोदी की निष्पक्ष छवि को चुनौती देने की कोशिश की।
मजबूती से उभार:
अदालतों द्वारा नेताओं की गिरफ्तारियों और सबूतों के सामने आने से विपक्ष का तथाकथित ईमानदारी का मुखौटा उतर गया। पीएम मोदी की ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ की नीति जनता की नजरों में और अधिक पारदर्शी और प्रासंगिक साबित हुई।
समान नागरिक संहिता (UCC) और वक्फ संशोधन पर तुष्टिकरण के खिलाफ मोर्चा
विरोधी साजिश:
उत्तराखंड में UCC और केंद्र के वक्फ संशोधन कानून पर विपक्ष ने सांप्रदायिक कार्ड खेलकर देश के माहौल को गरमाने की साजिश रची।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने इसे ‘समान अधिकार’ और सामाजिक न्याय का विषय बताया। उन्होंने वोट बैंक की तुष्टिकरण वाली राजनीति को खारिज करते हुए सबका साथ, सबका विकास और समान कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर स्वतंत्र विदेश नीति
विरोधी साजिश:
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट के बीच पश्चिमी ताकतों और घरेलू विपक्ष ने भारत पर दबाव बनाने और मोदी की विदेश नीति को विफल साबित करने के प्रयास किए।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने बिना किसी दबाव के भारत के राष्ट्रीय हितों (सस्ता तेल, रणनीतिक स्वायत्तता) को सर्वोपरि रखा। आज विश्व पटल पर भारत ‘ग्लोबल साउथ’ का सबसे बड़ा नेता और एक निडर वैश्विक महाशक्ति के रूप में देखा जाता है।
जाति जनगणना के दांव का ‘गरीब-विकास कल्याण’ से मुकाबला
विरोधी साजिश:
2024 के चुनावों में विपक्ष ने देश को जातियों में बांटने के लिए ‘जाति जनगणना’ का पासा फेंका, ताकि मोदी के विकासवादी और हिंदू-एकजुटता के वोट बैंक को तोड़ा जा सके।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए कहा कि “मेरे लिए देश में सिर्फ 4 सबसे बड़ी जातियां हैं—गरीब, युवा, महिला और किसान।” उन्होंने विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं को ढाल बनाकर विपक्ष के जातिवादी कार्ड को बेअसर कर दिया।
‘संविधान खतरे में है’ का भ्रामक नैरेटिव और उसका करारा जवाब
विरोधी साजिश:
2024 के चुनाव में विपक्ष ने निचले स्तर का भ्रम फैलाया कि यदि भाजपा आई तो संविधान और आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा।
मजबूती से उभार:
पीएम मोदी ने संविधान को अपने शीश से लगाकर नमन किया और बाबा साहब अंबेडकर के सम्मान में ‘पंचतीर्थ’ का जिक्र किया। उन्होंने उल्टा 1975 के आपातकाल का काला इतिहास जनता के सामने रखकर कांग्रेस की संविधान-विरोधी सोच को उजागर कर दिया।



