
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने आज 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई कथित पुलिस ज्यादती के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की, इस दौरान कोर्ट ने 20 जुलाई को दिल्ली में युवाओं पर हुई लाठीचार्ज की घटना पर केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. अदालत ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया.
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया. इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है.
बता दें कि काकरोच जनता पार्टी की ओर से पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 20 जून से प्रदर्शन चल रहा है. इस प्रदर्शन में सोनम वांगचुक ने 28 जून से आमरण अनशन शुरु किया था. करीब 20 दिनों के अनशन के बाद उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था.
प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद मार्च किया था जिस दौरान राजधानी दिल्ली के कई स्थानों प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई. याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकरियों के साथ कई स्थानों पर ज्यादती की. दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर छात्रों पर लाठीचार्ज किया और आंसूगैस छोड़े. इस मामले में कनाट प्लेस थाना, संसद मार्ग थाना और दूसरे थानों में करीब 10 एफआईआर दर्ज की है.
दूसरी ओर सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने बुधवार को एक वकील ने बताया कि एग्जाम पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने स्टूडेट्स को पीटा था.
एक वकील ने इस मामले का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कुछ टिप्पणियों की मांग की. वकील ने पीठ के सामने दलील दी, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, कि पुलिस ने स्टूडेंट्स को पीटा था.
वकील ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया गया और पीठ के सामने कुछ मुद्दे उठाने की कोशिश की. सीजेआई ने वकील से कहा, “हमारा समय बर्बाद मत करो और अपना समय बर्बाद मत करो. आपका समय हमारे समय से ज़्यादा कीमती है…”
वकील ने कहा कि स्टूडेंट्स बहुत जरूरी प्रार्थनाएं कर रहे थे: एक, कि नीट परीक्षा फ्री और फेयर होनी चाहिए; और दो, कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को खत्म कर देना चाहिए. इस मौके पर, सीजेआई ने साफ कर दिया कि पीठ उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहती.
सीजेआई ने वकील से कहा, “आपका बहुत-बहुत धन्यवाद”.
हालांकि, वकील ने जोर देकर कहा कि मामला जरूरी है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की ओर कोर्ट का ध्यान खींचने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह पीटा गया और उनके खिलाफ गलत कार्रवाई की गई.
वकील ने कहा, “मेरे पास (विरोध प्रदर्शन से जुड़े) वीडियो का कलेक्शन है…”, और उन्हें दिखाने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी.” सीजेआई ने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है और हमारे पास देखने का समय नहीं है…”. छोटी-मोटी बातें सुनने के बाद, पीठ अगले मामले पर चली गई.



