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 बीजेपी विधायकों में विकास करवाने की लगी रेस…. बाजी मारने में जुटा है हरि नगर क्षेत्र

नरेन्द्र भल्ला

नयी दिल्ली । 27 साल के वनवास के बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी बीजेपी के विधायकों के बीच इन दिनों अपने इलाके में विकास-कार्य कराने की एक तरह से होड़-सी मची हुई है। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में जहां बीजेपी ने 15 साल या फिर 10 साल बाद अपना परचम लहराया है। जो काम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के विधायक अपने पांच साल के कार्यकाल में पूरे नहीं करवा सके थे,उन कार्यों को बीजेपी के विधायक ढाई साल में ही पूरा करने का लक्ष्य हासिल करने के लिये जी-जान से जुटे हुए हैं। हर विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की “आंख का तारा” बनना चाहता है,लिहाज़ा कोई भी इस रेस में पीछे नहीं छूटना चाहता।

पिछले साल हुए चुनाव में दिल्ली में बीजेपी के 48 विधायक निर्वाचित हुए थे। बाद में,आम आदमी पार्टी के 8 विधायक इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गये थे। इस तरह से 56 विधानसभा क्षेत्रों में विकास-कार्यों की जो रफ्तार है,उसे देखकर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी विधायकों के बीच आपस में ही प्रतियोगिता चल रही है। गौरतलब है कि विधायक को अपने क्षेत्र में विकास-कार्यों के लिये हर साल 5 करोड़ रुपये का फंड मिलता है।

इस रेस में पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर विधानसभा क्षेत्र को एक “आदर्श क्षेत्र” के रुप में उभरता हुआ देखा जा रहा है। यहां नगर निगम के दो वार्ड हैं-हरि नगर और सुभाष नगर। चूंकि पिछले 10 साल से यह सीट “आप” के कब्जे में थी,इसलिये बीजेपी विधायक श्याम शर्मा ने समूचे इलाके का कायाकल्प करने के लिए जो तरीके अपनाये हैं,उसके जमीनी नतीजे महज एक साल में ही लोगों को दिखने लगे हैं और शायद इसी कारण वे “जननेता” के रुप में लोकप्रिय हो रहे हैं।

चूंकि वे पहले भी लंबे वक्त तक पार्षद रहने के अलावा दिल्ली के मेयर भी रहे हैं,इसलिये नौकरशाही से काम कैसे लिया जाता है और उसे तय वक़्त पर कैसे पूरा करवाना है,इस कला को वे बखूबी जानते हैं। हर विकास-कार्य की रफ्तार को मौके पर जाकर देखना और लोगों की शिकायतों का तत्काल निपटान करने की खूबी भी उन्हें अन्य विधायकों की तुलना में थोड़ा अलग बनाती है।

हरि नगर सीट पर 10 साल तक “आप” का कब्जा रहा और मजे की बात है कि इसी सीट के सुभाष नगर निगम वार्ड पर भी पिछले एक दशक से “आप” के ही पति-पत्नी का कब्जा रहा है। पहले सुरेन्द्र सेतिया पार्षद थे और 2022 में हुए निगम चुनावों के बाद से अब तक उनकी पत्नी मंजू सेतिया यहां की पार्षद हैं। पंजाबी बहुल आबादी वाले सुभाष नगर के अधिकांश लोगों की यह शिकायत रही है कि पिछले 10 साल से विधायक और पार्षद एक ही पार्टी का होने के बावजूद क्षेत्र का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया। इलाके के ब्लाक नंबर 4 की मिसाल देते हुए लोग बताते हैं कि जो काम निगम पार्षद को करवाने चाहिये थे,वही सारे काम अब बीजेपी विधायक श्याम शर्मा के प्रयासों से पूरे हो रहे हैं।

“विशेष खबर” से बातचीत में श्याम शर्मा पिछले एक साल में कराए गये विकास-कार्यों की फेहरिस्त गिनाते हुए कहते हैं-” जनता का काम एक दिन वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुनना होता है। उसके बाद पांच साल तक लोगों की हर तकलीफ़/ शिकायतों का समाधान करना और उन्हें बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना,यही मेरा काम है जो मैं निरंतर कर रहा हूं। ऐसा करके मैं क्षेत्र की जनता पर कोई अहसान नहीं कर रहा हूँ बल्कि यही मेरी पहली व एकमात्र जिम्मेदारी है जिसे पूरी ईमानदारी व शिद्दत से निभा रहा हूं। विकास-कार्यों में कोई भेदभाव नहीं बरत रहा। जिन इलाकों से मुझे वोट नहीं मिले या कम मिले,वहां भी मेरा काम करने का वही तरीका है।”

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