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डीके शिवकुमार ने ली CM पद की शपथ, बने कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री

जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री और 12 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली

संवाददाता

बेंगलुरु। कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने पार्टी के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 64 वर्षीय शिवकुमार को लोक भवन के ग्लास हाउस में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण के दौरान शिवकुमार हाथ में संविधान की प्रति लिए हुए थे. शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर और 12 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली. उन्होंने संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नाम पर शपथ ली. परमेश्वर इस सरकार में उप मुख्यमंत्री होंगे.

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर के अलावा जिन 12 नेताओं ने मंत्रीपद की शपथ ली उनमें केएच मुनियप्पा, के जे जॉर्ज, एमबी पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरेगौड़ा, प्रियंक खरगे, यू टी खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्धरमैया, बिरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल शामिल हैं. खादर और यतींद्र को छोड़कर अन्य सभी नेता पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में मंत्री रह चुके हैं. खादर अब तक कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष थे, जबकि यतींद्र, सिद्धरमैया के पुत्र हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कई अन्य नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए.

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही आठ बार के विधायक डी.के. शिवकुमार का वह वह सपना साकार हो गया, जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक राजनीतिक संघर्ष किया. शिवकुमार और सिद्धरमैया के बीच काफी समय तक चली खींचतान का अंत पिछले सप्ताह सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के साथ हुआ.

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सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद बीते 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उनके इस कदम से दक्षिण भारत में पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार के लिए यह पद ग्रहण करने का रास्ता साफ हुआ.

बता दें कि डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह में विभिन्न क्षोत्रों के गणमान्य लोगों को भी निमंत्रण भेजा था. अलग-अलग धर्मों के धार्मिक नेताओं के साथ-साथ कनकपुरा के डोड्डालाहल्ली के सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स को भी बुलाया गया था. दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, किसान नेता, दलित ऑर्गनाइजेशन के प्रतिनिधि, बैकवर्ड क्लास के लीडर, महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप, महिला लीडर और यूथ लीडर को भी बुलाया गया.

सके अलावा फिल्म इंडस्ट्री, ज्यूडिशियरी, खेल जगत, थिएटर से जुड़े लोग, लेखक, कलाकार, इंडस्ट्रियलिस्ट, बिजनेस लीडर और होटल इंडस्ट्री के रिप्रेजेंटेटिव भी शामिल हैं. इस बड़ी लिस्ट को नई सरकार के समावेशी शासन और समाज के अलग-अलग हिस्सों के साथ जुड़ाव के कमिटमेंट को दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले मंगलवार को, शिवकुमार ने कहा था कि उनके नेतृत्व में राज्य में ‘युवाओं के लिए एक नया युग’ शुरू होगा, साथ ही उन्होंने यह भी माना कि आगे की जिम्मेदारियां आसान नहीं होंगी.

उन्होंने अपनी तरक्की को कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जीत बताया और कर्नाटक के लोगों के लिए समर्पण से काम करने का वादा किया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने एक कार्यकर्ता को मौका दिया है, लीडर को नहीं. मुझ पर दिखाए गए भरोसे और विश्वास के लिए मैं बहुत एहसानमंद हूं. मुझे पता है कि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा, और मुश्किल समय भी आएगा, लेकिन मुझे उन्हें मैनेज करना है और कड़ी मेहनत करते रहना है.

शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक के लोगों ने उन पर भरोसा किया है और वह अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी और कमिटमेंट के साथ निभाने की कोशिश करेंगे. दुनिया ने बेंगलुरु के जरिए भारत को देखा है. कर्नाटक एक बहुत जरूरी राज्य है, और मैं जहां भी जाता हूं, लोग मुझे बताते हैं कि यह कितना जरूरी है. उन्होंने आगे कहा कि इसलिए, मुझे समाज के हर वर्ग को अपने साथ लेकर चलना होगा. सबको साथ लेकर चलने वाले शासन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और समाज के सभी वर्गों के लिए काम करेगी.

उन्होंने कहा कि मैं किसानों से लेकर महिलाओं और युवाओं तक, समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलूंगा. कर्नाटक में युवाओं के लिए एक नया दौर शुरू होगा. अपने राजनीतिक सफर के बारे में बताते हुए, शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद तक अपनी पहुंच को लगन और कड़ी मेहनत का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि यह एक मुश्किल सफर रहा है. हालांकि इसमें देर हुई, लेकिन इसे नकारा नहीं गया. यह सिर्फ शिवकुमार के बारे में नहीं है; यह हर उस कांग्रेस कार्यकर्ता के बारे में है जो पार्टी के साथ खड़ा रहा और इसकी लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास किया.

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