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क्या है PM मोदी की अपील के मायने? बता रहे हैं फाइनेंशियल कंसलटेंट रविंद्र तिवारी

संवाददाता

नई दिल्ली। देश में बदलती आर्थिक परिस्थितियों और तेजी से बढ़ती निवेश जागरूकता के बीच प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर “उत्पादक निवेश” को बढ़ावा देने की बात ने आम लोगों के बीच एक नई चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल सोना खरीदने से आगे बढ़कर देश की विकास यात्रा में भागीदारी करने की सोच को मजबूत करता है।

फाइनेंशियल कंसलटेंट रविंद्र तिवारी का कहना है कि सोना भारतीय परिवारों की परंपरागत बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और आज भी सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन केवल सोने पर निर्भर रहना भविष्य की बड़ी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

उनके अनुसार आज का समय “वेल्थ प्रोटेक्शन” से ज्यादा “वेल्थ क्रिएशन” का है। यानी केवल पैसा सुरक्षित रखना ही नहीं, बल्कि उसे सही जगह निवेश कर बढ़ाना भी आवश्यक हो गया है।

आखिर क्यों बदल रही है निवेश की सोच?

प्रधानमंत्री लगातार आत्मनिर्भर भारत, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आम नागरिक देश की ग्रोथ में निवेश के माध्यम से भागीदार बनते हैं तो आने वाले समय में उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकता है।

रविंद्र तिवारी बताते हैं कि सोना सुरक्षा देता है, लेकिन उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं देता। वहीं इक्विटी, म्यूचुअल फंड और विकास आधारित सेक्टर में निवेश लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना बना सकते हैं।

अगर सोना कम खरीदें तो कहां करें निवेश?

इक्विटी और शेयर बाजार

  • भारत तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था बन रहा है। बैंकिंग, रेलवे, डिफेंस, ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़े अवसर दे सकते हैं।
  • धैर्य और सही रणनीति के साथ किया गया इक्विटी निवेश लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न दे सकता है।
    SIP और म्यूचुअल फंड
  • हर व्यक्ति बड़ी रकम से शुरुआत नहीं कर सकता। ऐसे में SIP के माध्यम से छोटी-छोटी बचत को लंबे समय तक निवेश कर भविष्य में अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है।
    हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस
  • रविंद्र तिवारी का कहना है कि आज के समय में हेल्थ पॉलिसी और टर्म इंश्योरेंस किसी भी परिवार की आर्थिक सुरक्षा की पहली जरूरत बन चुके हैं। क्योंकि एक गंभीर बीमारी वर्षों की बचत को खत्म कर सकती है।

इमरजेंसी फंड और सुरक्षित निवेश

हर व्यक्ति को कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना चाहिए। इसके अलावा कुछ हिस्सा FD, सरकारी बॉन्ड या सुरक्षित योजनाओं में रखना भी संतुलित निवेश रणनीति मानी जाती है।

निवेश में सबसे जरूरी क्या?

  • फाइनेंशियल कंसलटेंट रविंद्र तिवारी के अनुसार निवेश में सबसे बड़ा मंत्र है — धैर्य, अनुशासन और सही जानकारी
    उन्होंने कहा कि मार्केट में उतार-चढ़ाव हमेशा रहेगा, लेकिन यदि निवेशक भारत की विकास यात्रा पर विश्वास रखते हुए लंबे समय तक सही जगह निवेशित रहते हैं, तो भविष्य में बेहतर संपत्ति निर्माण की संभावना काफी मजबूत हो सकती है।

निष्कर्ष

  • प्रधानमंत्री की सोच भी यही संकेत देती है कि देश अब केवल पारंपरिक बचत से आगे बढ़कर “ग्रोथ आधारित निवेश” की ओर बढ़ रहा है।
  • ऐसे में समझदारी इसी में है कि निवेशक केवल सोना जमा करने तक सीमित न रहें, बल्कि देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ खुद को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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