
संवाददाता
गाजियाबाद। चुनाव का जब मौसम आता है तो संभावित प्रत्याशियों के नाम सामने आने शुरू हो जाते हैं। जो बड़े नेता होते हैं उनकी सरगर्मियां बढऩे से फिर लोग कयास लगाने लगते हैं कि चुनाव लडऩे की तैयारी में है। राजनीति में एक बड़ा नाम कांगे्रस की एक बड़ी नेता डौली शर्मा का है। गांधी परिवार से विशेषकर प्रिंयका गांधी से डौली शर्मा की निकटता ज्यादा है इसीलिए डौली शर्मा देश में कांगे्रस के लिए प्रचार-प्रसार भी करती हैं। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के निकट भी डौली शर्मा बताई जाती हैं। गाजियाबाद से वो चुनाव लड़ चुकी हैं। एक लंबा अनुभव उन्हें चुनाव का है। पांच लाख से अधिक वोट लाकर उन्होंने अपनी एक अलग छवि बनाई जो अधिकतर नेताओं के पास नहीं है। इतने अधिक वोट लाने वाली डौली शर्मा जब किसी कार्यक्रम में या कहीं ज्यादा सक्रिय होती हैं तो चर्चाएं शुरू हो जाती है। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी डौली शर्मा का नाम चर्चाओं में है।
चर्चा है कि सपा और कांगे्रस का गठबंधन होगा तो डौली शर्मा धौलाना से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि उनके पिता नरेंद्र भारद्वाज के भी चुनाव लडऩे की चर्चाएं हैं। बागपत की भी एक सीट से डौली शर्मा के चुनाव लडऩे की चर्चा सामने आयी थी लेकिन इन तमाम चर्चाओं पर डौली शर्मा ने विराम लगा दिया। एक शादी समारोह में अनौपचारिक बातचीत में डौली शर्मा ने स्पष्टï कहा कि जो चर्चाएं चल रही है उनमें कोई दम नहीं है। उनका कहना है कि वो जहां जाती है वहां से चुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में बड़ौत में ब्राह्मïण समाज के एक कार्यक्रम में गई तो वहां भी चर्चाएं शुरू हो गई। पुंडूचेरी में चुनाव प्रचार में गई तो वहां भी चर्चाएं शुरू हो गई। डौली शर्मा ने बताया कि उनका फिलहाल विधानसभा चुनाव लडऩे का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें अगर मौका दिया तो वो लोकसभा चुनाव में जरूर किस्मत आजमाएंगी।
डौली शर्मा ने कहा कि वो हमेशा पार्टी के लिए काम करती हैं, जनता के बीच रहती हैं और प्रयास रहता है कि जनता के बीच रहकर उनकी जितनी भी समस्याएं है उनका समाधान कराया जाए। आपको बता दें कि डौली शर्मा एक ऐसी उम्मीदवार है जो चुनाव हारने के बाद भी हमेशा जनता के बीच में रहती हैं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयासरत रहती है। अभी हाल ही में हाउस टैक्स को लेकर भी डौली शर्मा ने बहुत ही मजबूती के साथ आवाज बुलंद की थी। अमूमन देखा गया है कि चुनाव के दौरान सभी बड़े-बड़े वायदे उम्मीदवार करते हैं लेकिन चुनाव हारने के बाद फिर वो कहीं दिखाई नहीं देते। जाहिर है चुनाव में चाहे किसी भी उम्मीदवार को चाहे दस हजार वोट ही क्यों ना आये हों कम से कम वो उन वोटों के लिए तो उनके साथ रह सकता है लेकिन ऐसा होता नहीं है। मगर डौली शर्मा ठीक उसी तरह जनता के साथ रहती है जैसे वो चुनाव में जनता के बीच रहती हैं। यही कारण है कि वो कोई भी चुनाव हो उसमें बहुत मजबूती के साथ चुनाव लड़ती हैं।



