
संवाददाता
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पीएम जन औषधि केंद्रों पर दूसरी कंपनियों की दवाइयां बेची जा रही है. जबकि पीएम जनऔषधि केंद्र के नाम से चलाए जा रहे मेडिकल स्टोर पर दूसरी कंपनी की दवाइयां बेचने की अनुमति नहीं है. लेकिन, जन औषधि केंद्र की आड़ में दूसरी कंपनी की दवाइयां बेचने का धंधा तेजी से फल फूल रहा है. इस मामले को लेकर शाहदरा के रहने वाले सामाजसेवी हरीश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय में लिखित शिकायत दी है.
हरीश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय को दी शिकायत में लिखा है कि पीएम जनऔषधि केंद्र के नाम पर दिल्ली में धड़ल्ले से खुलेआम दूसरी कंपनी की दवाइयां ज्यादा बेची जा रही हैं, जबकि जनऔषधि की दवाइयां दो-चार ही बेची जा रही हैं. कोई भी जन औषधि केंद्र संचालक जन औषधि के प्रोडक्ट का पूरा स्टॉक नहीं रख रहा है. जबकि, जन औषधि के दो हजार प्रोडक्ट हैं, जिनमें कि अधिकतर सभी दवाइयां और कुछ सर्जिकल आइटम भी आते हैं.
हरीश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने कई जनऔषधि मेडिकल स्टोर पर जाकर खुद दवाइयां खरीदी तो उन्हें जनऔषधि की जगह दूसरी कंपनी की दवाइयां दी गई और बिल जन औषधि केंद्र का दिया गया. जब इस मामले की शिकायत उन्होंने पीएम जनऔषधि योजना के अधिकारियों से जानना चाहा कि जनऔषधि केंद्र संचालक दूसरी कंपनी की दवाइयां बेच सकते हैं या नहीं ? तो उन्हें लिखित में यह जानकारी अधिकारियों द्वारा दी गई कि किसी भी जनऔषधि केंद्र संचालक को दूसरी कंपनी की दवाई बेचने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है. ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है.
पीएमओं से सख्त कार्रवाई की मांग
जन औषधि योजना गरीबों के लिए उपयोगी
हरीश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पीएम जन औषधि योजना गरीब लोगों को सस्ती दवाई उपलब्ध कराने की बहुत ही उपयोगी और लाभकारी योजना है. लेकिन कुछ लोग इसका लाभ गरीब लोगों तक नहीं पहुंचने देना चाहते हैं. वह इसकी आड़ में अपना गोरख धंधा चला कर मोटा धन कमाने के काम में लगे हुए हैं. साथ ही इस योजना के सफल होने में रोड़ा बन रहे हैं. उन्होंने पीएम को की गई शिकायत में ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.
जन औषधि केंद्र के नियमों से जुड़ी जानकारी
हरीश अग्रवाल का ये भी कहना है कि यह धंधा सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे दिल्ली एनसीआर में फैलता जा रहा है. उन्होंने बताया कि पीएम जन औषधि केंद्र खोलने का यह नियम है कि एक जन औषधि केंद्र से दूसरे की दूरी कम से कम एक किलोमीटर होनी चाहिए. लेकिन, नोएडा और दिल्ली में भी कई जगह पर इस नियम का भी पालन नहीं हो रहा है. 500 मीटर, 800 मीटर और 700 मीटर की दूरी पर भी जन औषधि केंद्र खोलने के लाइसेंस दिए जा रहे हैं. इसमें जन औषधि योजना के अधिकारियों की भी मिली भगत है.



