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आईडीबीआई बैंक बेचने पर राहुल गांधी बोले- जिस बैंक को घाटे से निकालकर मुनाफे तक पहुंचाया, उसी को सरकार बेच रही

राहुल गांधी ने बैंक के कर्मचारियों के प्रति अपना समर्थन जताया है. विस्तार से पढ़ें उन्होंने क्या-क्या कहा.

संवाददाता

नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक (IDBI BANK) के निजीकरण को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान देश के सभी उद्योगों को मजबूती प्रदान करने के लिए बैंक बनाए गए थे, लेकिन मोदी सरकार उन्हें बेचने पर उतारु है.

राहुल गांधी ने IDBI BANK के कर्मचारियों के प्रति अपना समर्थन जताया है और मुनाफे में चल रहे इस सरकारी बैंक को एक कनाडाई कंपनी को बेचने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जिस बैंक को कर्मियों ने घाटे से निकालकर मुनाफे तक पहुंचाया, उसी बैंक को सरकार बेच रही है. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक बैंक ऐसी संपत्ति नहीं हैं जिन्हें बेच दिया जाए, बल्कि ये राष्ट्र निर्माण के साधन हैं.

आईडीबीआई बैंक (IDBI BANK) बैंक परिवार के सदस्यों को लिखे एक पत्र में, गांधी ने बताया कि पिछले साल मार्च में, IDBI बैंक के कर्मचारियों का एक समूह संसद भवन में उनसे मिलने आया था. उन्होंने उनसे एक सीधा सा सवाल पूछा कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है, जिसे उन्होंने मुनाफे में ला खड़ा किया था. राहुल ने कहा कि मैंने यह सवाल लोकसभा में उठाया. मैंने पूछा कि मुनाफे में चल रहे एक सरकारी बैंक को क्यों बेचा जा रहा है और इसके कर्मचारियों और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी. सरकार ने कोई कारण नहीं बताया. अब उसने IDBI बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है.

यह देखते हुए कि IDBI की शुरुआत एक अग्रणी विकास बैंक के रूप में हुई थी, उन्होंने कहा कि एक कमर्शियल बैंक बनने का सफर मुश्किल रहा है, लेकिन कर्मचारियों ने इन चुनौतियों का सामना किया है. उन्होंने बैंक कर्मचारियों को लिखे अपने खुले पत्र में कहा कि सात साल पहले, IDBI को नुकसान हो रहा था. पिछले साल, इसने नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाया. यह बदलाव आपकी मेहनत का नतीजा है. गांधी ने जोर देकर कहा कि जनता के पैसे से बनी संस्था जनता की ही होती है.

उन्होंने 29 अक्टूबर के पत्र में बताया कि आज इस बैंक में सरकार और LIC की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है. बिक्री के बाद, उनकी हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रह जाएगी. उन्होंने कहा कि 2003 में सरकार ने संसद से वादा किया था कि वह IDBI में हमेशा कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी. गांधी ने जोर देकर कहा कि हो सकता है कि वह वादा कानून में न लिखा गया हो, लेकिन संसद से किया गया वादा भारत की जनता से किया गया वादा है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि आपने मुझसे आपके साथ खड़े होने के लिए कहा था. आज मैं आपकी लड़ाई में आपके साथ खड़ा हूं, और आपकी सभी जायज मांगों का पूरा समर्थन करता हूं. एकजुट रहें. दृढ़ रहें. सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर अपना पत्र साझा करते हुए, गांधी ने कहा कि कांग्रेस के समय में, देश के उद्योगों को खड़ा करने के लिए IDBI की स्थापना की गई थी. मोदी के समय में, पहले बोली लगाई गई, फिर कीमत तय की गई.

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