
संवाददाता
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें ये दावा किया गया कि चीन ने असाफिला, लोंगजू और ताकसिंग सर्किल जैसे इलाकों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है और भारतीय सेना को जरूरी आपूर्ति तक नहीं मिल रही है. वीडियो में ये बातें भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया के हवाले से कही गईं. अब इस वीडियो पर खुद इंडियन आर्मी सामने आई है और बकायदा फैक्ट चेक जारी कर इस वीडियो को डीपफेक और डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया गया बताया है. सेना ने साफ किया है कि वीडियो में जो बयान सुनाई दे रहे हैं, वे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं. दूसरी तरफ इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है.
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा है कि वीडियो भले ही डॉक्टर्ड हो, लेकिन उसमें उठाए गए मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इससे अब विवाद फेक वीडियो से आगे बढ़कर राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस तक पहुंच गया है. बता दें कि इस वीडियो को बिहार कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी ने साझा किया था. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा है कि ये फर्जी वीडियो था और इसके जरिए भारतीय सेना तथा देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई. हिमंत ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही है.
वायरल वीडियो में क्या कहा गया था?
🚨 Detect the Deepfake
❌ A digitally altered video is being circulated with fabricated remarks attributed to Lt Gen Girish Kalia, claiming that China has taken control of Asaphila, Longjou and Taksing Circle in Arunachal Pradesh and that the Indian Army has been denied… pic.twitter.com/4e2y3MbZDg
— INDIAN ARMY FACT CHECK (@MythbusterXX) October 25, 2026
वायरल वीडियो में दावा किया गया कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ संवेदनशील इलाकों पर कब्जा कर लिया है. वीडियो में यह भी कहा गया कि भारतीय सेना को आवश्यक संसाधन और आपूर्ति नहीं मिल रही है. चूंकि वीडियो में ये बातें सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के नाम से जोड़ी गई थीं, इसलिए यह कंटेंट तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने इसे एक बड़े खुलासे की तरह शेयर करना शुरू कर दिया.
सेना ने कैसे खोली फर्जीवाड़े की पोल?
अब भारतीय सेना ने वीडियो की जांच के बाद साफ किया कि यह क्लिप छेड़छाड़ करके बनाई गई है. सेना के मुताबिक वीडियो में इस्तेमाल की गई तस्वीरें और फुटेज वास्तविक हैं, लेकिन उन पर बाद में AI और सिंथेटिक तकनीक के जरिए नकली आवाज और फर्जी बयान जोड़े गए. सेना ने बताया कि यह “Synthetic Generated Information” का मामला है, जिसमें पुराने वीडियो का इस्तेमाल कर नया और भ्रामक नैरेटिव तैयार किया गया. सेना ने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल वीडियो को साझा करने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच जरूर करें.
असली वीडियो था 2023 की प्रेस ब्रीफिंग का
फैक्ट चेक में सामने आया कि वायरल वीडियो की मूल फुटेज 27 अक्टूबर 2023 की है. उस समय मेजर जनरल गिरिश कालिया ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में एक प्रेस ब्रीफिंग की थी. उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिशों, आतंकवाद विरोधी अभियानों और सुरक्षा स्थिति पर जानकारी दी थी. भारतीय सेना के अनुसार उस ब्रीफिंग में न तो अरुणाचल प्रदेश का जिक्र हुआ था और न ही चीन द्वारा किसी इलाके पर कब्जा करने या सेना को आपूर्ति न मिलने जैसी कोई बात कही गई थी.
फिर राजनीतिक बहस कैसे शुरू हुई?
मामले में नया मोड़ तब आया जब NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यदि वीडियो डॉक्टर्ड भी है, तब भी उसमें कही गई बातें गलत नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दिल्ली में युवाओं के आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए अपनी ताकत लगा रही है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ जैसे मुद्दों पर उतनी सक्रियता दिखाई नहीं देती. उनके इस बयान के बाद बहस का केंद्र वीडियो की सत्यता से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर आ गया.
अब दो हिस्सों में बंट गया है विवाद
एक तरफ भारतीय सेना और फैक्ट चेक संस्थाएं स्पष्ट रूप से कह रही हैं कि वायरल वीडियो फर्जी है और उसमें लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया के नाम से झूठे बयान जोड़े गए हैं वहीं दूसरी ओर विपक्ष से जुड़े कुछ नेता और छात्र संगठन वीडियो को नहीं, बल्कि उसमें उठाए गए मुद्दों को बहस का विषय बना रहे हैं. यही वजह है कि यह मामला अब केवल डीपफेक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन, अरुणाचल प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों पर राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गया है.



