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संकटमोचक बने पीएम मोदी: आपदा के वक्त फिर निभाया ‘पड़ोसी धर्म’

नेपाल के वित्त मंत्री ने की तारीफ, कहा-“असाधारण रूप से उदार”

संवाददाता

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘पड़ोस पहले’ (Neighbourhood First) नीति भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसका उद्देश्य अपने निकटतम पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और संकट के समय ‘पड़ोसी धर्म’ निभाना है। जब-जब पड़ोसी देशों में बाढ़, भूकंप या आर्थिक संकट आया, भारत ने बिना किसी स्वार्थ के ‘पड़ोसी धर्म’ निभाते हुए सबसे पहले चिकित्सा, राहत सामग्री और वित्तीय मदद पहुंचाई। हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा से भारी जान और माल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर संकटमोचक बनकर आपदा प्रभावित पड़ोसी देश नेपाल की सहायता की है। भयंकर बाढ़ आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से टेलीफोन पर बात की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में, भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं।

हिमस्खलन और बाढ़ से 919 लोगों की मौत, 4,200 से ज्यादा लापता

दरअसल, 26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमखंड के ढहने से हिमस्खलन हुआ, जिससे पानी, कीचड़ और मलबा तेजी से बह निकला। इससे तिब्बत (चीन) की भोटेकोशी नदी और नेपाल की त्रिशूली नदी में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। बुधवार को इसने कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और मध्य नेपाल में पनबिजली संयंत्रों को बहा ले गया। इस बाढ़ में अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले नेपाल में 903 मौतें हुई हैं, जबिक तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि 275 भारतीय नागरिक लापता हैं और अन्य देशों की नागरिकता वाले लगभग 128 भारतीय मूल के लोग भी लापता हैं।

संकट में नेपाल की मदद, भेजी गई राहत सामग्री

भारत ने वायुसेना के विमानों के जरिए नेपाल को करीब 68.5 टन राहत सामग्री (दवाइयाँ, खाने के पैकेट, कंबल, टेंट, तिरपाल, प्लास्टिक शीट, स्वच्छता किट (हाइजीन किट), सोलर लैंप, पोर्टेबल जनरेटर, और जल शोधन उपकरण) काठमांडू पहुंचाई है। भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर 30 अगस्त 2026 को काठमांडू पहुंचा। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को कहा कि भारत से राहत सामग्री लेकर चार विमान नेपाल पहुंच चुके हैं।

नेपाल पहुंचीं भारतीय विशेषज्ञ टीमें

विशेषज्ञ टीमें: सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने और बचाव कार्यों के लिए भारत ने टनल रेस्क्यू के तकनीकी विशेषज्ञ, रिकवरी/खोज दल, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों की विशेष टीमें नेपाल भेजी हैं।

फोरेंसिक सहायता: डीएनए जांच और पहचान के लिए 19 सदस्यीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम और उपकरण भेजे गए हैं। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू में इस भारतीय फोरेंसिक टीम से मुलाकात की और आपदा की इस घड़ी में नेपाल को हरसंभव सहायता जारी रखने का भरोसा दिया। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि बाढ़ में बरामद 600 से अधिक शवों की पहचान के लिए नेपाल भारत से फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और तेजी से डीएनए जांच में अतिरिक्त मदद की मांग की है।

बेली ब्रिज व मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण में तकनीकी मदद

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बाढ़ में टूटे रास्तों और पुलों को ठीक करने के लिए बेली ब्रिज व मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण में भी भारत तकनीकी मदद दे रहा है। 230 फुट लंबे एक लेन वाले मॉड्यूलर स्टील पुल के लिए उपकरण ले जा रहे 16 ट्रक वहां पहुंच चुके हैं। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए 42 बेली पुलों के निर्माण के लिए सहायता मांगी है। गौरतलब है कि बाढ़ और तेज बहाव के कारण बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। कंक्रीट के पुल, बेली ब्रिज और पैदल चलने वाले झूला पुल बह गए हैं। धादिंग और अन्य इलाकों में पुल टूटने और भूस्खलन होने से काठमांडू का सड़क संपर्क कई जगहों पर बाधित हो गया है। स्थानीय प्रशासन, सेना और तकनीकी टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान के कारण मुश्किलें बढ़ गई हैं।

नेपाली सेना के साथ मिलकर भारत चला रहा बचाव अभियान

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आपदा में त्रिशुली जिल में 11 बिजली पनबिजली परियोजनाओं के प्रभावित होने की सूचना मिली है। इन सभी परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सुरंग में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।भारत की एक विशेष सुरंग खोज और बचाव दल ने रविवार 30 अगस्त को नेपाली सेना के साथ मिलकर नेपाल के चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में आपदा प्रभावित जलविद्युत सुरंग स्थलों पर गहन बचाव अभियान चलाया। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विशेष टीम को स्थानीय अभियानों में एकीकृत कर दिया गया है और वह जमीनी स्तर पर सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर काम कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर लिखा, “भारत की सुरंग बचाव टीम आज चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में जलविद्युत सुरंग स्थलों पर खोज और बचाव अभियान में नेपाली सेना के साथ शामिल हो गई।”

बाढ़ प्रभावित नेपाल से 149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया

विदेश मंत्रालय ने रविवार (30 अगस्त) को बताया कि बाढ़ प्रभावित नेपाल से 149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नवीनतम जानकारी साझा करते हुए बताया कि 30 अगस्त, 2026 को शाम 5:30 बजे तक 149 भारतीयों को बचा लिया गया था। भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और बाढ़ में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए समन्वय प्रयास कर रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल-तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाली सेना द्वारा बचाए गए भारतीय तीर्थयात्रियों के एक समूह से मुलाकात की। जयशंकर ने नेपाल के लिए भारत की व्यापक राहत और बचाव सहायता की समीक्षा भी की, जिसमें मानवीय सामग्री, बेली ब्रिज, संभावित चिकित्सा सहायता और विशेष बचाव दल शामिल हैं। नेपाल में आई आपदा और बाढ़ के मद्देनजर भारत सरकार (विदेश मंत्रालय) और भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

भारत कर रहा नेपाल को राहत पैकेज देने पर विचार

भारत नेपाल को राहत पैकेज देने पर विचार कर रहा है। हालांकि अलग वित्तीय पैकेज की घोषणा अभी नहीं की गई है। नुकसान का पैमाना, पुनर्निर्माण की जरूरत और काठमांडू की मांग साफ होने के बाद ही अगला कदम तय होगा। कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं, जिनके बचाव और पहचान का काम जारी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जरूरत पड़ी तो भारत पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए बड़ा पैकेज भी दे सकता है।

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