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संसद के बाहर भी गतिरोध- लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी से विपक्ष ने बनाई दूरी, डीएमके ने कनिमोझी को क्यों भेजा

संवाददाता

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज यानी गुरुवार को खत्म हो गया. दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. इसके बाद स्पीकर की चाय पार्टी का आयोजन हुआ. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी सांसदों ने इसका बहिष्कार किया. पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई नेता इस पार्टी में मौजूद थे. मगर कांग्रेस और विपक्ष से कोई भी फ्लोर लीडर्स इसमें नहीं पहुंचे लेकिन डीएमके से एकमात्र कनिमोझी स्पीकर की चाय पार्टी में पहुंचीं.

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि स्पीकर ने कस्टमरी स्पीच नहीं दिया और न ही ये बताया कि संसद का कामकाज कैसा रहा इसलिए विपक्ष उनकी पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार किया. इससे पहले इसमें प्रियंका गांधी को भेजने का कार्यक्रम था. दूसरी तरफ सोनिया और खरगे भी जाने वाले थे. संसद सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा स्पीकर द्वारा यह बैठक रखी जाती है. इसका मकसद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आपसी कड़वाहट को कम करना और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाना होता है.

संसद में स्पीकर की चाय का राहुल और खरगे समेत विपक्ष ने किया बहिष्कार, कनिमोझी क्यों आई?

विपक्ष का बहिष्कार पर कनिमोझी क्यों पहुंची?

मगर यहां सवाल ये है कि जब विपक्ष ने इसका बहिष्कार किया तो डीएमके से कनिमोझी स्पीकर की चाय पार्टी में क्यों पहुंचीं? दरअसल, कनिमोझी का इसमें शामिल होना एक बड़ा सियासी कदम है. इसके पीछे की वजह कांग्रेस से गठबंधन टूटना, दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व की लड़ाई और परिसीमन को लेकर दो-तिहाई बहुमत है. डीएमके ने हाल ही में कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ लिया है. कनिमोझी का इसमें शामिल होना इस बात की ओर भी इशारा है कि DMK भले ही NDA के साथ न हो लेकिन वो परिसीमन के पूरी तरह खिलाफ भी नहीं है.

दरअसल, डीएमके चाहती है कि परिसीमन न्यायसंगत हो, जिससे तमिलनाडु की आवाज संसद में कमजोर न हो. डीएमके को पता है कि केवल संसद के भीतर हंगामा करने या कांग्रेस के साथ बहिष्कार करने से तमिलनाडु के हितों की रक्षा नहीं होगी. इसके लिए सत्तापक्ष और लोकसभा स्पीकर के साथ संवाद का रास्ता खुला रखना बेहद जरूरी है, ताकि जब परिसीमन विधेयक आए तो राज्य के पक्ष को मजबूती से टेबल किया जा सके.

सरकार ने शुरू से जरूरी कदम नहीं उठाए, विपक्ष को भरोसे में भी नहीं लिया: कांग्रेस सांसद तारिक अनवर

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही जरूरी कदम नहीं उठाए। उसने विपक्ष को भी भरोसे में नहीं लिया। उन्होंने कहा कि सदन तभी चल सकता है, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष आपस में बातचीत करें। दोनों मिलकर आगे का रास्ता निकालें।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस सत्र के दौरान सरकार ने जिद वाला रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे सत्र के दौरान सदन में आए ही नहीं। वे कहीं नजर नहीं आए। तारिक अनवर ने सवाल उठाया कि इससे क्या संकेत मिलता है? उन्होंने कहा कि इससे लगता है कि सरकार के लिए सदन की कोई अहमियत नहीं है। इसी वजह से उसने लगातार सदन की अनदेखी की।

विपक्ष का असली चेहरा सामने आ गया: भाजपा सांसद विवेक ठाकुर

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और मानसून सत्र के हंगामे के कारण कामकाज प्रभावित होने पर भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा, अब इस पर आगे चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है। कल विपक्ष का असली चेहरा पूरी तरह सामने आ गया। वे इस मुद्दे पर या किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए कभी तैयार नहीं थे। वे अराजकता में विश्वास करते हैं।

उन्होंने कहा कि समस्या की पहचान करना, उसका समाधान निकालना और रचनात्मक बातचीत करना जैसे विचार विपक्ष की सोच में हैं ही नहीं। विवेक ठाकुर ने कहा, कल संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ तौर पर तीन बार कहा था कि चर्चा उसी समय शुरू की जा सकती है। लेकिन विपक्ष की मंशा साफ थी।

उन्होंने झारखंड की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को युवाओं के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। वह देश में अराजकता की राजनीति को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि ऐसा कभी नहीं होने दिया जाएगा।

विपक्ष ने संसद का समय और जनता का पैसा बर्बाद किया: भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल

भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, तब विपक्ष न तो सदन में मुद्दे उठाता है और न ही लोकसभा अध्यक्ष को लिखित अनुरोध देता है। इसके बावजूद विपक्ष सड़कों पर खड़े होकर अपनी मांगें उठाता है।

उन्होंने कहा, यह न तो लोकतंत्र की परंपरा है और न ही संसदीय व्यवस्था। कानून, प्रक्रिया और नियमों की परवाह किए बिना लोकसभा इस तरह नहीं चल सकती। अग्रवाल ने कहा कि विपक्ष के नेता और उनकी पार्टी ने जो अराजकता पैदा की, उसके लिए वे जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वजह से देश की जनता का समय और पैसा बर्बाद हुआ।

उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के पहले हफ्ते में भी भाजपा के तीन सांसदों ने नियम 193 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को लिखित अनुरोध दिया था। इसमें नीट पर चर्चा कराने की मांग की गई थी। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित की। विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी की।

राहुल गांधी मानसून सत्र बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार: भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा

भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही बाधित होने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, इसके लिए अकेले राहुल गांधी जिम्मेदार हैं। उन्होंने लोकतंत्र और संसद का मजाक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि अमेठी की जनता को यह सोचकर पछतावा हो रहा होगा कि उन्होंने ऐसे सनकी व्यक्ति को क्यों चुना। उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने पूरा मानसून सत्र बर्बाद कर दिया। मनन कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी किसी भी चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहते। इसके बजाय वह सदन से दूर रहकर संसद के बाहर हंगामा और भ्रम पैदा करना पसंद करते हैं।

उन्होंने कहा कि जनता लोकतंत्र के इस मजाक को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि मानसून सत्र के पिछले एक महीने में कांग्रेस के कामों की उसे आने वाले चुनावों में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मानसून सत्र में भाजपा सरकार का अहंकार सामने आया: डिंपल यादव

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर ‘बहुत अहंकारी’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने लोगों की आस्था से जुड़े मुद्दों और देश के युवाओं की चिंताओं को नहीं माना।

सत्र की समीक्षा करते हुए डिंपल यादव ने कहा कि देश में यह संदेश गया है कि सरकार ने युवाओं से जुड़े मुद्दों और आस्था से जुड़े मामलों को नजरअंदाज किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि अगर इतनी बड़ी घटना दो साल तक चलती रही और उसे न तो माना गया और न ही सामने लाया गया, तो आज भाजपा और उसके सहयोगी ‘जरूर कटघरे में हैं’। डिंपल यादव ने भाजपा पर भगवान राम के नाम पर वोट मांगने और ‘लोगों को बांटकर’ सत्ता में बने रहने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्दों का समाधान करने के बजाय उन्हें दबाना ज्यादा पसंद किया।

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