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अब 20 किमी के दायरे में रहने वालों को बार-बार नहीं देना होगा टोल

लाखों लोगों को मिलेगी बड़ी राहत !

संवाददाता

नई दिल्ली। देशभर में टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और बार-बार टोल चुकाने की परेशानी से जल्द राहत मिलने वाली है. केंद्र सरकार टोल प्लाजा की व्यवस्था को और एडवांस बनाने की तैयारी में है. इसके तहत टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले लोगों के लिए डिजिटल ई-पास की सर्विस शुरू की जा सकती है, जिससे उन्हें बार-बार टोल टैक्स देने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

सरकार का लक्ष्य टोल कलेक्शन को तेज, ट्रांसपरेंसी और पूरी तरह डिजिटल बनाना है. इसी दिशा में बिना बैरियर वाले टोल सिस्टम को तेजी से बढ़ाया जा रहा है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और सफर पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा.

स्थानीय लोगों को मिलेगी खास सुविधा

सरकार टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए विशेष डिजिटल पास जारी करने की योजना बना रही है. यह पास सीधे FASTag से जुड़ा होगा. इसके जरिए स्थानीय निवासी बिना किसी रुकावट के टोल प्लाजा पार कर सकेंगे. माना जा रहा है कि इस सुविधा के लिए मंथली और सालाना दोनों तरह के पास उपलब्ध कराए जाएंगे. पास की कीमत को भी लोगों के लिए किफायती रखने पर विचार किया जा रहा है. इससे रोजाना टोल से गुजरने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है.

क्या है बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम?

मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक के तहत टोल प्लाजा पर पारंपरिक बैरियर की जरूरत नहीं होती. सड़क पर लगे कैमरे और सेंसर वाहन के FASTag को पढ़कर अपने आप टोल टैक्स काट लेते हैं. पूरा प्रोसेस कुछ सेकंड में पूरी हो जाती है और वाहन को रुकना नहीं पड़ता. अगर किसी वाहन का टोल भुगतान नहीं हो पाता है तो सिस्टम खुद नोटिस जारी कर सकता है. इस तकनीक का मकसद ट्रैफिक जाम कम करना और यात्रा का समय बचाना है. फिलहाल देश के कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था लागू है और अब इसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी चल रही है.

FASTag से जुड़ेगा पूरा सिस्टममल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक के तहत टोल प्लाजा पर पारंपरिक बैरियर की जरूरत नहीं होती. सड़क पर लगे कैमरे और सेंसर वाहन के FASTag को पढ़कर अपने आप टोल टैक्स काट लेते हैं. पूरा प्रोसेस कुछ सेकंड में पूरी हो जाती है और वाहन को रुकना नहीं पड़ता. अगर किसी वाहन का टोल भुगतान नहीं हो पाता है तो सिस्टम खुद नोटिस जारी कर सकता है. इस तकनीक का मकसद ट्रैफिक जाम कम करना और यात्रा का समय बचाना है. फिलहाल देश के कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था लागू है और अब इसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी चल रही है.

FASTag से जुड़ेगा पूरा सिस्टम

नई व्यवस्था में डिजिटल पास और FASTag को आपस में जोड़ा जाएगा. स्थानीय निवासियों की एलिजिबिलिटी का कंफर्मेशन डिजिटल माध्यम से की जाएगी. इसके बाद उन्हें एक विशेष पास जारी किया जाएगा, जिससे वे तय सेक्टर के टोल प्लाजा पर आसानी से आवाजाही कर सकेंगे.
सरकार का मानना है कि इससे टोल नियमों का बेहतर पालन होगा और अनधिकृत छूट या गलत तरीके से मिलने वाली सुविधाओं पर भी रोक लगेगी. साथ ही टोल कलेक्शन सिस्टम अधिक ट्रांसपरेंट बन सकेगा.

कई राज्यों में होगा शुरू

सरकार आने वाले समय में कई नए टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम शुरू करने की तैयारी कर रही है. हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में इस तकनीक को लागू करने की योजना है. इसके लिए बड़ी संख्या में नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया जा चुका है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम देश के हाईवे नेटवर्क को और आधुनिक बनाएगा. इससे यात्रियों का समय बचेगा, ट्रैफिक जाम कम होगा और टोल वसूली का प्रोसेस भी पहले से ज्यादा बेहतर बनेगा.

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