
संवाददाता
नई दिल्ली। करीब 3 करोड़ की आबादी को समेटे देश की राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाएं कोई नई बात नहीं है. रिहायशी इलाकों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों, झुग्गी-बस्तियों व व्यावसायिक बाजारों तक आए दिन आग लगने की खबरें सामने आती हैं. इन घटनाओं में न केवल करोड़ों की संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि कई बार लोगों की जान तक चली जाती है. ऐसे में राजधानी की अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला दिल्ली फायर सर्विस (DFS) विभाग खुद गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है.
दिल्ली फायर सर्विस के डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि विभाग इस समय भारी मैनपावर संकट का सामना कर रहा है. दिल्ली फायर सर्विस में कुल 3312 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 2484 पद ही भरे हुए हैं. 399 पद प्रमोशन न होने की वजह से लंबे समय से खाली पड़े हैं, जबकि 422 पदों पर नई भर्ती की जानी है. यानी एक तरफ आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें काबू में करने वाले हाथ लगातार कम होते जा रहे हैं.
100 की जगह सिर्फ 66 फायर स्टेशन
दिल्ली फायर सर्विस की स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मास्टर प्लान 2021 के अनुसार राजधानी में 100 फायर स्टेशन होने चाहिए. लेकिन वर्तमान में केवल 66 फायर स्टेशन ही संचालित हैं. घनी आबादी व लगातार बढ़ते शहरी विस्तार को देखते हुए यह संख्या नाकाफी है. कई इलाकों में फायर स्टेशन दूर होने के कारण दमकल गाड़ियों को आग लगने पर मौके तक पहुंचने में अधिक समय लग जाता है, जिससे आग और अधिक विकराल हो जाती है और भारी नुकसान हो जाता है.

”दिल्ली फायर सर्विस विभाग इस समय भारी मैनपावर संकट का सामना कर रहा है. दिल्ली फायर सर्विस में कुल 3312 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 2484 पद ही भरे हुए हैं. 399 पद प्रमोशन न होने की वजह से लंबे समय से खाली पड़े हैं, जबकि 422 पदों पर नई भर्ती की जानी है.”– एके मलिक, डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर, दिल्ली फायर सर्विस
27 हजार की जगह सिर्फ 2,484 फायर कर्मी
दिल्ली फायर सर्विस में मैनपावर की कमी का सीधा असर फायर कर्मियों की ड्यूटी पर भी पड़ रहा है. नियमों के मुताबिक, फायर कर्मियों की ड्यूटी 8 घंटे की होनी चाहिए, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते उन्हें 24 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है. डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक के अनुसार, यदि 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था के हिसाब से देखा जाए तो दिल्ली में करीब 27 हजार फायर कर्मियों की जरूरत है. यानी कि वर्तमान संख्या के मुकाबले लगभग दस गुना अधिक स्टाफ होने पर ही राजधानी को पर्याप्त रूप से सुरक्षित माना जा सकता है.
70 से ज्यादा दमकल काम की नहीं
दिल्ली फायर सर्विस डिपार्टमेंट में सिर्फ मैनपावर ही नहीं, बल्कि संसाधनों की भी स्थिति चिंताजनक है. विभाग के पास कुल 323 फायर टेंडर हैं, लेकिन इनमें से कई खराब हालत में हैं और कुछ ने अपनी 10 साल की निर्धारित उम्र पूरी कर ली है. ऐसे में 70 से अधिक वाहनों को ऑपरेशन में नहीं लिया जा सकता. वर्तमान में केवल करीब 250 फायर टेंडर ही सड़कों पर सक्रिय हैं, जिनकी मदद से आग बुझाई जा रही है.

तंग गलियों के लिए 24 क्यूआरवी
दिल्ली फायर सर्विस डिपार्टमेंट ने तंग गलियों व भीड़भाड़ वाले इलाकों में आग से निपटने के लिए 24 क्विक रिस्पांस व्हीकल (QRV) ली हैं. ये छोटी गाड़ियां राजधानी दिल्ली के 24 स्थानों पर मौजूद हैं और संकरी गलियों में तेजी से पहुंचकर शुरुआती स्तर पर आग बुझाने में काफी कारगर साबित होती है. लेकिन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इनकी संख्या भी मौजूदा जरूरतों के मुकाबले बहुत कम है. इसे बढ़ाया जाना जरूरी है.
सरकार से ठोस व त्वरित फैसले की जरूरत
कुल मिलाकर दिल्ली फायर सर्विस इस समय सीमित संसाधनों व कम मैनपावर के सहारे देश की राजधानी की सुरक्षा का दारोमदार संभाले हुए है. बढ़ती आबादी, ऊंची इमारतें और घनी बसावट के दौर में यदि समय रहते भर्ती, प्रमोशन, नए फायर स्टेशन व आधुनिक संसाधनों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आग जैसी आपदाओं से निपटना और भी मुश्किल हो सकता है. राजधानी की सुरक्षा के लिए अब नीतिगत स्तर पर ठोस व त्वरित फैसलों की जरूरत महसूस की जा रही है.

जानिए क्या बोले कर्मचारीः
”हम लोगों की ड्यूटी बहुत सतर्कता वाली होती है. दिन में एक और रात में दो मिनट के अंदर आग की सूचना मिलते ही निकलना होता है. हमारी 24 घंटे की ड्यूटी होती है. इसके बाद ही रेस्ट मिलता है. हमारी नौकरी सतर्कता और व्यस्तता वाली है इस बात को हमारे परिवार के सदस्य समझते हैं. हम त्योहार पर भी अपने परिवार से दूर रहते हैं. क्योंकि ड्यूटी सबसे पहले है.” – रजनीश कुमार सांगवान, फायर कर्मी
फायर कर्मी संजीव कुमार ने कहा,”हम लोगों को 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है और 24 घंटे अलर्ट रहना पड़ता है. आग लगने का सायरन जैसे ही बजता है हम लोग तुरंत भागकर दमकल की गाड़ी लेकर एक मिनट के अंदर निकल जाते हैं. रात में दो मिनट के अंदर दमकल लेकर मौके के लिए रवाना हो जाते हैं. त्योहार पर भी छुट्टी नहीं मिल पाती है, लेकिन परिवार के लोग हमारी नौकरी और जिम्मेदारी को समझते हैं.”



