
संवाददाता
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद के लिए आज वोटिंग हो रही है और शाम तक नतीजे आ जाएंगे. NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और INDIA के बी सुदर्शन रेड्डी के बीच टक्कर है. BJD, BRS और SAD ने वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया है. दरअसल, बीजेडी के पास 7, बीआरएस के पास 4 और अकाली दल के पास 1 सांसद है. इनके अलावा पंजाब के फरीदकोट से निर्दलीय सांसद सर्बजीत सिंह खालसा और जेल में बंद अमृतपाल ने चुनाव का बहिष्कार किया है. ऐसे में कुल मिलाकर 14 सांसद वोट नहीं डालेंगे. इसके बाद 767 सांसद अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. बहुमत का आंकड़ा 384 वोटों का है.
इन चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जो बीजेपी के सदस्य रहे हैं. राधाकृष्णन तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है. बी सुदर्शन रेड्डी का संबंध आंध्र प्रदेश से है. इस तरह इस चुनाव में दोनों प्रमुख उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं.
उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए पिछले चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने बड़ी जीत हासिल की थी. लेकिन जुलाई में धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. अगस्त 2022 में हुए चुनावों में कुल 725 वोटों में से जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे. यानी वे क़रीब 73% मतों के साथ विजयी हुए थे. इस बार के चुनावों में क्रॉस वोटिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं. मौजूदा समीकरण में एनडीए की जीत स्पष्ट दिख रही है. हालाँकि जीत के अंतर में आई किसी भी कमी को विपक्ष, सत्ता पक्ष की ताक़त कमज़ोर होने के रूप में पेश कर सकती है.
कांग्रेस के लिए चुनौती
मौजूदा राजनीतिक हालात देखें, तो पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों के बाद एनडीए ने जिस समीकरण के साथ केंद्र में अपनी सरकार बनाई थी, उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. हालाँकि इस बीच कुछ मुद्दों को लेकर एनडीए के कुछ साझेदारों का रुख़ सुर्ख़ियों में रहा है. इनमें टीडीपी का नाम सबसे प्रमुख है. चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी आंध्र प्रदेश की सत्ता पर काबिज़ है और विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ताल्लुक भी इसी राज्य से है.
उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले, कांग्रेस ने मंगलवार को वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी पर एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन का समर्थन करने के लिए हमला बोला और उन पर लोकतांत्रिक ताकतों के साथ न खड़े होने का आरोप लगाया। एक्स पर एक पोस्ट में, कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने लिखा ‘इतिहास वाईएस जगनमोहन रेड्डी के विश्वासघात को नहीं भूलेगा। उपराष्ट्रपति पद के लिए आरएसएस समर्थित उम्मीदवार का समर्थन करके, उन्होंने आंध्र प्रदेश के हितों की बजाय सीबीआई मामलों के डर को चुना है।’ टैगोर ने कहा, ‘यह रणनीति की बात नहीं है। यह लोकतांत्रिक ताकतों के साथ खड़े होने के बजाय मोदी बाबू के दबाव के आगे आत्मसमर्पण करने की बात है।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि जगन का आज का समझौता उस दिन के रूप में याद किया जाएगा जब उन्होंने अपने निजी अस्तित्व को जनादेश से ऊपर रखा। उन्होंने आरोप लगाया, आंध्र साहस का हकदार था। लेकिन जगन मोहन रेड्डी ने कायरता को चुना।
कूटनीति का कोई मतलब नहीं है- सुप्रिया सुले
उपराष्ट्रपति चुनाव पर एनसीपी (सपा) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘कूटनीति का कोई मतलब नहीं है। हम सब देश की सेवा कर रहे हैं। यह एक बड़ा पद है। जिसे भी यह पद मिले, उसे इसका सम्मान करना चाहिए।’
हमारा उम्मीदवार सर्वश्रेष्ठ है- शक्तिसिंह गोहिल
उपराष्ट्रपति चुनाव पर कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, ‘हमारा उम्मीदवार सर्वश्रेष्ठ है और मुझे लगता है कि मतदाता अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनेंगे। इंडिया अलायंस के उम्मीदवार का करियर बहुत अच्छा रहा है। उन्होंने एक संवैधानिक पद पर भी काम किया है।’
‘लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं का पालन किया जाए’
उपराष्ट्रपति चुनाव पर, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा, ‘विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी ने जिस अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने की अपील की है, उसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से वोटों की कमी को पूरा करना है। इस समय, एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के जीतने की पूरी उम्मीद है, खासकर तब जब कुछ दलों, जिनसे विपक्षी उम्मीदवार का समर्थन करने की उम्मीद थी, ने मतदान से दूर रहने का फैसला किया है। चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि संवैधानिक पदाधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में द्विदलीय समर्थन प्राप्त हो। मुझे उम्मीद है कि इन चुनावों के कारण कोई कटुता नहीं होगी, और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन चुनावों में लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं का पालन किया जाए।’



