
संवाददाता
नई दिल्ली । भारत के चुनावी मैदान में लगातार मिल रही पराजय के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हताश और निराश हो चुके है। तीन आम चुनाव में जनता द्वारा ठुकराये जाने के बाद राहुल गांधी की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। इसलिए विदेशी ताकतों से मदद पाने के लिए अलग-अलग देशों का दौरा किया। मार्च 2023 में लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि भारतीय लोकतंत्र के ढांचे पर बर्बर हमला हो रहा है। उन्होंने अफसोस जताया था कि अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के लोकतांत्रिक देश इस पर ध्यान देने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने खुलेआम भारत में दखल देने की अपील की थी। अब उस अपील का असर भारत से लेकर लंदन तक दिखाई देने लगा है। राहुल गांधी के लगातार विदेशी दौरों की सच्चाई अब सामने आने लगी है।
ध्रुव राठी की अपील के बाद लंदन में प्रदर्शन
जो लोग कल तक बोल रहे थे कि भारत में हो रहे प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ नहीं है, वो अब देख सकते हैं कि कैसे विदेशी ताकतें लंदन की सड़कों पर अपनी भागीदारी का परिचय दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और हिन्दू विरोधी ताकतों का पोस्टर ब्वॉय और यूट्यूबर ध्रुव राठी की सक्रियता बता रही है कि विदेशी टूलकिट किस तरह काम कर रहा है। ध्रुव राठी की अपील के बाद 17 अक्टूबर को लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया गया। नई दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में ब्रिटेन के कई संगठनों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसफआई) के बैनर तले आयोजित किया गया।
लंदन में लगे भारत से आजादी-आजादी के नारे
जहां भारत में प्रशांत भूषण जैसे देश विरोधी खुलकर रिजीम चेंज की बात कर रहे हैं, वहीं विदेशों में बैठे इनके समर्थक भी अब खुलकर मैदान में आ चुके हैं। लंदन में हुए प्रदर्शन में जिस तरह आजादी…आजादी के नारे लगाए गए, उससे पता चलता है कि इसका आयोजन भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग ने किया था। इस गैंग को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन हासिल है। इस प्रदर्शन में लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी भी शामिल थे, जिन्होंने भारतीय छात्र संगठन एसएफआई का छात्र बनकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
सर पर उजली टोपी और मुंह पर मास्क लगाकर फोटो खींचते नजर आया ध्रुव राठी
एसएफआई के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी सर पर उजली टोपी और मुंह पर मास्क लगाकर फोटो खींचते नजर आया। बता दें कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ब्रिटेन इकाई ने भी इसी सप्ताह कार्डिफ, लीड्स और एडिनबर्ग में सभाएं आयोजित कीं। इसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया और मतदान के अधिकार तथा विरोध करने की स्वतंत्रता की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने की मांग का समर्थन किया।
ध्रुव राठी ने लंदन पहुंच कर किया था प्रदर्शन का ऐलान
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्टूबर वाले प्रदर्शन में सीजेपी का साथ देने भारत आए ध्रुव राठी अब लंदन पहुंच गए हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने शनिवार 17 अक्टूबर को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में संसद चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लंदन में मौजूद लोगों से दोपहर 12 बजे प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। राठी ने कहा कि अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का समय आ गया है।
जवाब में लगे ‘मोदी- मोदी’ और ‘जय श्री राम’ नारे
लंदन में प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तिरंगा लहराया और प्रधानमंत्री के पक्ष में नारे लगाए। ‘भारत माता की जय’, ‘मोदी- मोदी’ और ‘जय श्री राम’ नारे लगा प्रधानमंत्री और भारत सरकार के प्रति अपना समर्थन जताया। प्रधानमंत्री मोदी समर्थक प्रवासी भारतियों ने कॉकरोचों के खिलाफ भी नारा लगाया। उन्होंने कहा, “एक-दो कॉकरोच को फेंक दो।” मौजूद लोगों ने कहा कि वो विदेशों में भारत की छवि बचाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उनका मानना है कि कुछ प्रदर्शन ऐसे हैं, जिनका मकसद देश की साख को नुकसान पहुंचाना है।
भारत को बदनाम करने की हो रही है कोशिश
लंदन में रहने वाले एक भारतीय ने बताया कि इस सभा का उद्देश्य उन कोशिशों का विरोध करना था, जिन्हें वे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश मानते हैं। उन्होंने कहा, “आज हम लंदन के भारत भवन में उन लोगों का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए हैं, जो हमारी नजर में भारत को बदनाम कर रहे हैं। भारतीय राष्ट्रवादी होने के नाते, हम उनके कामों का जवाब देने और अपने देश के बचाव में आवाज उठाने के लिए एक साथ आए हैं।”
अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल की दखलंदाजी
वॉशिंगटन राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने बुधवार 14 अक्टूबर को भारत में वोटर लिस्ट से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर चिंता जताई थी। उन्होंने इसे मतदाताओं के नामों की ‘सफाई’ या बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कार्रवाई बताते हुए सवाल उठाए। जयपाल ने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की उन कार्रवाइयों से की, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोकतंत्रों की रक्षा करना जरूरी है और भारतीयों को भी अमेरिकियों की तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव मिलने चाहिए। प्रमिला जयपाल डेमोक्रेटिक सांसद है, जबकि ट्रंप रिपब्लिकन हैं। प्रमिला जयपाल ने भारत में कथित लोकतंत्र-विरोधी प्रयासों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों का समर्थन भी किया।
UN मानवाधिकार संगठन द्वारा सीजेपी प्रदर्शन पर टिप्पणी
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने शनिवार 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी। साथ ही, उसने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का सम्मान करने और बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की अपील की थी।
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर जतायी थी चिंता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने कहा कि कार्यालय “दिल्ली में आज हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को भारत में बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों से चिंतित है। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान करें और उसे सुनिश्चित करें। शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता की कड़ी कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए।”
भारत ने OHCHR के दोहरे मापदंड की पोल खोली
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की मानवाधिकार संस्थाओं के दोहरे मापदंडों, राजनीतिक पक्षपात और बिना सबूतों के रिपोर्ट तैयार करने के रवैये को लेकर उनकी कड़े शब्दों में आलोचना की है। भारत ने OHCHR पर ‘चयनात्मक रवैया’ (Extreme Selectivity) अपनाने का आरोप लगाया। भारत ने साफ कहा कि यूएन की यह संस्था दुनिया के अन्य हिस्सों और भारत के पड़ोसी देशों में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों या उन पर की जाने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर पूरी तरह चुप रहती है, लेकिन भारत के मामलों में तुरंत टिप्पणी करती है। ऐसे दोहरे मापदंडों से इस वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता खत्म होती है।
बांग्लादेशी छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने दिया CJP प्रदर्शन को समर्थन
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेता नाहिद इस्लाम ने भारत में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे भारतीय युवाओं के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के आयोजकों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। साथ ही, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों को बुनियादी स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। साथ ही हिंदुत्व आधारित बहुसंख्यकवाद पर सवाल उठाते हुए भारतीय युवाओं से अपील की।
हिंदुत्व और अल्पसंख्यकों पर क्या कहा?
नाहिद इस्लाम ने कहा कि दक्षिण एशिया का भविष्य हिंदुत्व के नाम पर बहुसंख्यकों के दबदबे, फासीवाद और किसी एक धर्म को दूसरों से ऊपर रखने की सोच से तय नहीं होना चाहिए। हम भारत में ठीक उसी तरह सत्तावाद, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता को खारिज करते हैं, जैसे हम बांग्लादेश में करते हैं। उन्होंने कहा, हमारा साझा भविष्य सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक न्याय पर आधारित होना चाहिए। इसमें धर्म, जाति, लिंग या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। कोई भी समाज वास्तव में लोकतांत्रिक नहीं हो सकता, जहां अल्पसंख्यक डर में रहते हों, असहमति जताने को अपराध बना दिया जाता हो और नागरिकता किसी की पहचान पर निर्भर करती हो।
पित्रोदा की सोरोस से 10 अरब डॉलर के निवेश की अपील
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा है कि यदि अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस भारत में अच्छे काम के लिए 10 अरब डॉलर का निवेश करना चाहते हैं, तो उस प्रस्ताव पर नीति और उद्देश्यों के आधार पर विचार किया जा सकता है। हालांकि पित्रोदा ने कहा कि ऐसे निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन करना और इस पर अंतिम निर्णय लेना सत्ता में बैठे लोगों या सरकार का काम है। जॉर्ज सोरोस के संगठन ओपन सोसाइटी फाउंडेशन और दुनियाभर में उसके निवेश को लेकर पहले भी राजनीतिक बहस होती रही है। ऐसे में पित्रोदा के इस बयान पर भी चर्चा हो रही है। सैम पित्रोदा ने यह बात मीडिया से बातचीत के दौरान कही।



