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राहुल गांधी का महिला विरोधी चेहरा, हिमाचल के सुक्खू मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं, जेन-Z युवतियों से भी भेदभाव

संवाददाता

नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सनातन की सामाजिक व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं। सनातन धर्म के प्राचीन धर्मशास्त्र मनुस्मृति की गलत व्याख्या कर जातियों को आपस में लड़ाने और महिलाओं का मुद्दा उठाकर उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने शनिवार (22 अगस्त,2026) को महाराष्ट्र के पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता के मुद्दे पर एक घंटा 16 मिनट बात की। उन्होंने एक बार फिर मनुस्मृति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जिक्र करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, ‘महिला की पहचान उसके पिता, पति या बेटे से नहीं होती, बल्कि उसकी अपनी पहचान होती है।’ राजनैतिक मंचों पर महिलाओं के अधिकारों व स्वतंत्रता की वकालत करने वाले राहुल गांधी का दोहरा चरित्र हिमाचल प्रदेश में देखने को मिलता है, जहां वर्तमान कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं है। महिलाओं की जिस तरह उपेक्षा की जा रही है, वो राहुल गांधी के नारी वंदन ढोंग की पोल खोल रही है।

इतिहास में पहली बार, महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं 
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मंत्रिमंडल में कोई भी महिला शामिल नहीं है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय विधानसभा में कुल 3 महिला विधायक हैं। 2022 के मुख्य विधानसभा चुनाव में केवल 1 महिला जीतकर आई थीं, लेकिन बाद में हुए उपचुनावों के कारण यह संख्या बढ़कर 3 हो गई है। इसमें कांग्रेस की दो महिला विधायक हैं। देहरा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की कमलेश ठाकुर विधायक हैं, जो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी हैं। लाहौल और स्पीति निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की विधायक अनुराधा राणा हैं। पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा की विधायक रीना कश्यप हैं। कांग्रेस के पास दो महिला विधायक होने के बावजूद मंत्रिमंडल में किसी को जगह नहीं देना राहुल गांधी के महिला विरोधी चेहरे को उजागर करता है।

आधी आबादी के साथ धोखा, महिला उम्मीदवारी में तीसरे नंबर पर कांग्रेस
दिलचस्प बात यह है कि राज्य के कुल मतदाताओं में करीब 49 फीसदी महिलाएं हैं। 1998 के चुनावों के बाद से महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में अधिक रहा है और यह प्रवृत्ति पिछले पांच चुनावों से जारी रही है। 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6, आम आदमी पार्टी (आप) ने 5 और कांग्रेस ने 3 महिलाओं को टिकट दिए थे, लेकिन केवल भाजपा की रीना कश्यप ही चुनाव जीतने में कामयाब हो सकीं। महिलाओं को लेकर बड़े बड़े दावे करने वाले राहुल गांधी महिला उम्मीदवार उतारने के मामले में भी तीसरे नंबर पर रहे। बीजेपी ने कांग्रेस से दो गुना ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था।

राहुल गांधी का दोगलापन, मंचों पर नारी वंदन का ढोंग क्यों?
राजनीति मंचों पर महिलाओं के आधिकारों को लेकर लंबे-लंबे भाषण देने वाले राहुल गांधी को हिमाचल प्रदेश दिखाई नहीं दे रहा है। हिमाचल की आधी आबादी का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन राहुल गांधी घूम-घूमकर नारी वंदन कर रहे हैं। यह सब महिलाओं की आंखों में धुल झोंकने के समान है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कोई महिला उम्मीदवार निर्वाचित नहीं हुई। लेकिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, मुख्यमंत्री किसी भी ऐसी महिला को मंत्री पद पर नियुक्त कर सकते थे, जो उस समय विधानसभा की सदस्य नहीं थी। महिला मंत्री को 6 महीने के भीतर किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से उप-चुनाव (By-election) जीताकर विधानसभा का सदस्य बनाया जा सकता था, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया। हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस की दो महिला विधायकों के निर्वाचन के बाद भी आधी आबादी को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश नहीं की गई।

राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को नहीं बनाया सीएम
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी और प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदारी पेश की थी। उनके समर्थकों ने तर्क दिया कि पार्टी उनकी अध्यक्षता में चुनाव जीती है और वीरभद्र सिंह की विरासत तथा ‘हॉलीलॉज’ (उनके आवास) के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। होटल सिसल के बाहर प्रतिभा सिंह के समर्थक… आलाकमान होश में आओ…आलाकमान होश में आओ…के नारे लगा रहे थे। कांग्रेस की महिला समर्थक नारे लगा रही थीं कि हमें चाहिए रानी साहिबा। समर्थकों की मांग की थी कि जिस मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश ने कांग्रेस को चुना है उसे मुद्दे पर ही नेता का चुनाव होना चाहिए। कई दिनों तक चले गतिरोध के बाद कांग्रेस हाइकमान राहुल गांधी ने हिमाचल की महिलाओं की आवाज को अनसुना कर दिया। उन्होंने महिला सीएम की दावेदारी को खारिज कर सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाया।

1500 रुपये की महिला सम्मान योजना से जेन-Z युवतियों को किया बाहर
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जेन-Z युवतियों को बड़ा धोखा दिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश की सभी महिलाओं को 1500 रुपये की महिला सम्मान राशि देने की गारंटी दी थी, लेकिन अब सरकार ने इसके दायरे को सीमित कर दिया है। संशोधित अधिसूचना के अनुसार अब 18 से 20 साल की महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना से बाहर कर दिया है। ऐसे में इस दायरे में नहीं आने वाली युवतियों को अब 1500 रुपये प्रतिमाह नहीं मिलेंगे और 21 से 59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को ही सशर्त मिलेगा।

हिमाचल सरकार ने 1500 रुपये के लिए महिलाओं पर थोपी कठिन शर्तें 

  • हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के नियम में बदलाव किया और नई शर्तें थोप दी हैं।
  • यदि किसी की आय दो लाख रुपये से अधिक है तो उसे 1500 रुपये नहीं मिलेंगे। नए आवेदनों आय और बीपीएल संबंधित अलग कॉलम जोड़े गए।
  • इससे पहले वर्ष 2024 में सरकार ने एक परिवार से एक ही महिला को 1500 रुपये देने का फैसला किया था।
  • इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना का लाभ केवल हिमाचल की महिलाओं को ही मिलेगा।
  • सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी के परिवार की महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
  • अनुबंध, आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालिक कर्मचारी, सेवारत व भूतपूर्व सैनिक, सैनिक विधवाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर, मल्टी टास्क वर्कर भी योजना से बाहर हैं।
  • योजना लाभार्थियों को पहले तहसील कल्याण अधिकारी के पास आवेदन देना होता था। फिर सरकार ने कहा कि अब पंचायतों में ग्राम सभा के अनुमोदन पर पैसा दिया जाएगा।

कुल महिला आबादी 33.82 लाख, आवेदन 8 लाख, 36 हजार को मिली महिला सम्मान निधि
भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में कुल महिला आबादी लगभग 33.82 लाख थी, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 49.3% हिस्सा है। हिमाचल में अब तक करीब 36 हजार महिलाओं को ही सुक्खू सरकार साढ़े तीन साल में 1500 रुपये दी पाई। इसमें कई महिलाओं को 3 करीब किश्तें एकसाथ मिली हैं। करीब आठ लाख महिलाओं ने शुरुआत में इस योजना के लिए आवेदन किया था। गौर रहे कि कांग्रेस पार्टी की यह गारंटी अब सरकार के गले की फास बन रही है। क्योंकि सरकार के पास इस गारंटी को पूरा करने के लिए पैसा नहीं है। इस पर 1 हजार करोड़ रुपये की जरूरत सालाना पड़ेगी। हालांकि, अब महिलाओं ने कहीं ना कहीं 1500 रुपये की उम्मीद छोड़ दी है। रुपये मिलने में देरी और नियमों में बदलाव का मुख्य कारण राज्य का गंभीर वित्तीय संकट, सशर्त पात्रता मापदंड और प्रशासनिक व चुनावी आचार संहिता की बाधाएं हैं।

कांग्रेस नेताओं की हिमाचल की बेटी कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणियां
बीजेपी की सांसद कंगना रनौत को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई कुछ सोशल मीडिया टिप्पणियों को भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘हिमाचल की हर बेटी का अपमान’ करार दिया था। हिमाचल की बेटी कंगना रनौत को भाजपा का टिकट मिलते ही देश भर में कांग्रेस उनके पीछे पड़ गई। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा उम्मीदवार कंगना रनौत पर कांग्रेस नेताओं की कुछ टिप्पणियों को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और एच.एस. अहीर जैसे नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आई थीं, जिस पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताया था। सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट से कंगना रनौत की तस्वीर के साथ ‘मंडी में क्या भाव चल रहा है’ जैसी आपत्तिजनक टिप्पणी शेयर की गई। बाद में विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था और वह पोस्ट उनके द्वारा नहीं की गई थी।

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