
संवाददाता
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने लगातार दूसरे साल लाल किले पर सेलीब्रेट किए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया. इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुए 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया. सूत्रों के मुताबिक,वहां बैठने की व्यवस्था से लेकर कई दूसरे मामलों में कांग्रेस के लोगों के साथ अपमानजनक व्यवहार होता है. इसलिए वो इस लगातार दो साल से इस आयोजन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.
दरअसल, ये विवाद 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान खड़ा हुआ. यहां राहुल गांधी लाल किले पर हुए कार्यक्रम में परंपरा और प्रोटोकॉल से हटकर दूसरी आखिरी कतार में बैठे. वो लोकसभा में विपक्ष के नेता और कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखते हैं. विपक्ष ने कांग्रेस सांसद को ये सीट दिया जाना, देश की जनता का अपमान बताया था.
रक्षा मंत्री ने क्या कहा था?
उस समय इस कार्यक्रम आयोजित करने वाले रक्षा मंत्रालय का तर्क था कि ओलंपियनों के लिए जगह बनाने के मकसद से व्यवस्था में थोड़ा बदलाव किया गया था. प्रोटोकॉल के अनुसार, औपचारिक कार्यक्रमों के दौरान विपक्ष के नेता को पहली कतार में बैठाया जाता है.
विपक्ष के साथ सरकार के बिगड़ते रिश्ते!
इस बार का मानसून सत्र 13 अगस्त गुरुवार को खत्म हुआ. संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच रिश्ते ने और खराब होने का संकेत दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि इस सत्र में कामकाज के स्तर में बहुत ही बड़ी बार गिरावट देखी गई. विपक्ष और सरकार पार्टी, दोनों ने ही कामकाज कम होने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया.
सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को छात्रों के संसद तक मार्च करने के साथ हुई थी. सत्र के दौरान बारह बिल पास किए गए, लेकिन उनमें से सिर्फ एक, पेपर लीक रोकने वाले कानून पर ही विस्तार से चर्चा हुई.
सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद, स्पीकर ओम बिरला द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बहिष्कार किया.



