latest-newsदेश

कितना सुरक्षित है इथेनॉल? 3.6 करोड़ उपभोक्ता, 1500 करोड़ लीटर खपत…

संवाददाता

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल अब सिर्फ पेट्रोल नहीं रहा. आज देशभर में करोड़ों वाहन ऐसे ईंधन पर चल रहे हैं, जिसमें इथेनॉल मिलाया जा चुका है. सरकार का दावा है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में इथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से बढ़ाया गया है. अब देश में करीब 3.6 करोड़ उपभोक्ता इथेनॉल मिले हुए पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसकी सालाना खपत 1500 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है.

साथ ही साथ जितनी तेजी से इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ा है, उतनी ही तेजी से इससे जुड़े सवाल भी सामने आए हैं. करोड़ों वाहन अब E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल पर चल रहे हैं, तो इन सवालों का जवाब जानना जरूरी हो जाता है. लोगों के बीच जो आम सवाल उठ रहे हैं वो हैं- क्या इथेनॉल वास्तव में पेट्रोल का बेहतर विकल्प है? क्या यह हर गाड़ी के लिए सुरक्षित है? और क्या भविष्य में पेट्रोल की जगह पूरी तरह इथेनॉल ले सकता है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में समझते हैं.

सवाल: इथेनॉल क्या होता है?

जवाब: सबसे पहले समझते हैं कि इथेनॉल आखिर है क्या? आसान भाषा में कहें तो इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल (एथिल अल्कोहल) है और ये जैव ईंधन है, जिसे गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. यह आसानी से जलने वाला ईंधन है, इसलिए इसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है. दुनिया के कई देशों में सालों से इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है और अब भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

सवाल: भारत में इथेनॉल मिला पेट्रोल कब और क्यों शुरू हुआ?

जवाब: भारत ने 2003 में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) शुरू किया था. शुरुआत में पेट्रोल में 5% इथेनॉल मिलाया जाता था. इसके बाद इसे बढ़ाकर 10% किया गया और अब देश में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे विदेशों से तेल खरीदने पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और गन्ना व मक्का जैसे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को भी फायदा मिलेगा. यही वजह है कि इथेनॉल को भारत की ऊर्जा सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जा रहा है. 2013-14 में 38 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति होती थी, जो 2019-20 में बढ़कर 173 करोड़ लीटर हो गई. इसके साथ ही पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग 1.53% से बढ़कर 5% हो गई.

सवाल: देश में कितने लोग इथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं?

जवाब: सरकार और उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 3.6 करोड़ लोग इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, 2024-25 में इथेनॉल की खपत लगभग 1500 करोड़ लीटर तक पहुंच गई. सरकार का कहना है कि इससे विदेशों से कच्चा तेल खरीदने की जरूरत कम हुई है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है और तेल आयात पर निर्भरता भी घट रही है.

सवाल: इथेनॉल के फायदे क्या हैं?

जवाब: इथेनॉल के कई फायदे बताए जाते हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पेट्रोल की खपत कम होती है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है. दूसरा, गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है. तीसरा, इथेनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है क्योंकि इसके इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है. इसके अलावा, देश के भीतर ही बनने वाला ईंधन होने के कारण यह ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करता है.

सवाल: क्या इथेनॉल वाला पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है?

जवाब: सामान्य परिस्थितियों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सुरक्षित माना जाता है और दुनिया के कई देशों में इसका लंबे समय से उपयोग हो रहा है. हालांकि, इथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है. इसकी आग कभी-कभी सामान्य पेट्रोल आग से अलग व्यवहार कर सकती है और उसे नियंत्रित करने के लिए विशेष उपायों की जरूरत पड़ सकती है. इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि निर्धारित मानकों के अनुसार उपयोग किए जाने पर यह आम उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित है.

सवाल: इथेनॉल का गाड़ियों पर क्या असर पड़ता है?

जवाब: नई पीढ़ी के अधिकांश वाहन E20 पेट्रोल को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं. सरकार और वाहन कंपनियों ने भी E20-रेडी इंजन विकसित किए हैं. लेकिन, पुरानी गाड़ियों में अधिक इथेनॉल मिश्रण से कुछ तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं. इथेनॉल नमी को अधिक आकर्षित करता है और कुछ पुराने इंजन पार्ट्स, रबर पाइप या ईंधन सिस्टम पर असर डाल सकता है. इसके अलावा, कुछ मामलों में माइलेज में हल्की कमी भी देखी जा सकती है, जो कि पूरी तरह से सही नहीं कही जा सकती है. हालांकि, ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि E20-अनुकूल वाहनों में ऐसी समस्याएं नहीं होंगी. लेकिन, सरकार की तरफ से बताया गया है कि इथेनॉल से कोई नुकसान है, इसकी कोई भी रिपोर्ट सामने नहीं आई है.

सवाल: क्या भविष्य में इथेनॉल पेट्रोल की जगह ले सकता है?

जवाब: फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है. इथेनॉल पेट्रोल का पूरक बन सकता है, लेकिन पूरी तरह उसका विकल्प बनना आसान नहीं है. भारत की ईंधन जरूरतें बहुत बड़ी हैं और सिर्फ कृषि आधारित इथेनॉल से उन्हें पूरा करना संभव नहीं माना जाता. इसलिए मानना है कि आने वाले वर्षों में पेट्रोल, इथेनॉल, इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का मिश्रित मॉडल ही देखने को मिलेगा.

क्या पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जाता है?

जवाब: नहीं, सोशल मीडिया पर ऐसा दावा किया गया था, लेकिन यह गलत है. पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस नहीं मिलाया जाता. पहले गन्ने के रस, शीरे (Molasses), मक्का और टूटे हुए चावल जैसे कृषि उत्पादों से औद्योगिक प्रक्रिया (फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन) के जरिए इथेनॉल तैयार किया जाता है. इसके बाद गुणवत्ता जांच पूरी होने पर ही इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है.

सवाल: क्या इथेनॉल मिले पेट्रोल पर चींटियां लगती हैं?

जवाब: दरअसल सोशल मीडिया पर कई वायरल वीडियो सामने आए हैं, जिसमें पेट्रोल टैंक के पास चींटियां दिखाकर ऐसा दावा किया गया था. लेकिन, इथेनॉल के पास चींटियां लगती हैं, ये दावा पूरी तरह से गलत है. BPCL के अनुसार, फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल में चीनी नहीं होती. इसके अलावा इसमें ऐसे पदार्थ भी मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं. इसलिए इथेनॉल मिले पेट्रोल पर चींटियां लगने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है.

क्या E20 पेट्रोल का पुरानी गाड़ियों पर असर

जवाब: कुछ ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार, 2023 से पहले बनी कुछ गाड़ियों पर E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल का असर देखने को मिल सकता है. ऐसी गाड़ियों में माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक घट सकता है. इसके अलावा, इथेनॉल पुराने रबर पाइप, सील और प्लास्टिक के पार्ट्स पर असर डाल सकता है. इथेनॉल हवा से नमी भी खींचता है, जिससे फ्यूल टैंक में पानी जमा होने और जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए अगर आपकी गाड़ी पुरानी है, तो E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से पहले वाहन निर्माता कंपनी की सलाह जरूर जांच लें.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com