
संवाददाता
नई दिल्ली। बढ़ते प्रदूषण और तेल की सीमित खपत को देखते हुए ईंधन बचाने की मुहिम को आज उस समय बड़ा बल मिला, जब दिल्ली सरकार के मुखिया और कैबिनेट मंत्रियों ने खुद इसकी कमान संभाली. सरकार द्वारा सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहनों को छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील का असर सोमवार को सड़कों पर ही नहीं, बल्कि मेट्रो ट्रेनों में भी साफ तौर पर देखने को मिला.
‘मंडे को मेट्रो’ की इस विशेष अपील को अमलीजामा पहनाते हुए खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने सचिवालय जाने के लिए मेट्रो की सवारी की.
आम यात्रियों के बीच पहुंचीं मुख्यमंत्री
सोमवार सुबह अमूमन दिल्ली की सड़कों पर भारी जाम और मेट्रो स्टेशनों पर भारी भीड़ देखने को मिलती है. इसी व्यस्त समय में दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने सुरक्षा घेरे को सीमित रखते हुए अपने घर से मेट्रो में सफर करते हुए आईटीओ जाने वाली मेट्रो ट्रेन पकड़ी. मुख्यमंत्री को अचानक अपने बीच पाकर मेट्रो में सफर कर रहे आम यात्री भी खुश हो गए.
सफर के दौरान मुख्यमंत्री ने न सिर्फ आम लोगों से बातचीत की, बल्कि उनसे सफर के अनुभवों और दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव भी लिए. मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री रविन्द्र इंद्राज भी मौजूद थे, जो अलग-अलग रूटों से होते हुए आईटीओ मेट्रो स्टेशन पहुंचे और आईटीओ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर पांच से निकलकर फिर डीटीसी की देवी बस से मंत्री रविन्द्र सिंह इन्द्राज और प्रवेश वर्मा के साथ सचिवालय के लिए रवाना हुईं.
सीएम रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री ने कहा “ईंधन बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है. यदि हम सब मिलकर सप्ताह में सिर्फ एक दिन भी निजी वाहनों का त्याग करें, तो हम आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वतावरण और सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे.”
अभियान को मिला जनता का भारी समर्थन
सरकार की इस पहल का असर सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर साफ दिखाई दिया. राजीव चौक, कश्मीरी गेट, केंद्रीय सचिवालय और आईटीओ जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रोजाना के मुकाबले यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. बातचीत में कई कामकाजी युवाओं और अधिकारियों ने सरकार के इस कदम की सराहना की.
आईटीओ स्थित एक निजी बैंक में कार्यरत सविता शर्मा ने बताया, जब देश और प्रदेश के वीवीआईपी अपनी चमचमाती गाड़ियों को छोड़कर मेट्रो से चल सकते हैं, तो हमें भी अपनी मानसिकता बदलनी होगी. आज मैंने भी अपनी कार घर पर छोड़ी और मेट्रो से दफ्तर आया. इससे न केवल पैसे बचे, बल्कि ट्रैफिक के तनाव से भी मुक्ति मिली.
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दिल्ली का हर तीसरा नागरिक सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन का रुख करता है, तो इससे न केवल सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, बल्कि ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी. वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा, मनजिंदर सिंह सिरसा, पंकज सिंह ने भी मेट्रो और बसों से सफर कर अपने-अपने दफ्तर पहुंचें.



