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स्मार्ट मीटर का मुद्दा बना गले की फांस, अब क्या-क्या सहूलियत दे रही है योगी सरकार

संवाददाता

लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार के स्मार्ट मीटर का मुद्दा गले की फांस बन गया है. उपभोक्ता लगातार स्मार्ट मीटर के चलते तेज रीडिंग, दोगुने बिल, और रिचार्ज के तुरंत बाद बिजली कटने की शिकायत कर रहे हैं. हालांकि, प्रदेश सरकार पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने पर ही अड़ी रही. लेकिन,इस बीच केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर संसद में यह बयान दिया कि बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर बिना उपभोक्ता की सहमति के लगाना गैर क़ानूनी है. उसके बाद से ही प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का न केवल विरोध तेज़ हो गया है. बल्कि पहले से जिन जगहों पर ऐसे मीटर्स लगाए जा चुके हैं, वहां से भी इसे हटाने या बदलने की भी मांग हो रही है.

अखिलेश के ऐलान ने योगी सरकार पर बनाया दबाव

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के ऐलान ने भी एक तरीके योगी सरकार पर दबाव डाल दिया है. अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी सरकार आने पर, जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगे हैं, उन्हें हटाया जाएगा.साथ ही उन्होंने 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की बात कही है.योगी सरकार के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि वह इसको लेकर क्या फैसला ले या विरोध थमने का इंतजार करे. फिलहाल,योगी सरकार ने लोगों के बढ़ते हुए विरोध नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है.ये 4 सदस्यीय तकनीकी कमेटी बनाई गई. समिति की रिपोर्ट आने तक इसपर रोक जारी रहेगी.

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विरोध के बीच सरकार दे रही ये सहूलियतें

लगातार बढ़ रहे विरोध के बीच योगी सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के उपभेक्ताओं को कई सहूलियतें देने का फैसला किया है. अगर स्मार्ट प्रीपेड मीटर के उपभोक्ताओं का का रीचार्ज खत्म हो गया है. निगेटिव बैलेंस 200 रुपये तक है, तो सात दिनों तक उनका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा. यह सुविधा दो किलोवाट के घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को दी गई है. बता दें इससे पहले एक किलोवाट श्रेणी के ऊपर सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर के उपभोक्ताओं का निगेटिव बैलेंस होने पर भी तीन दिनों तक बिजली नहीं काटने की व्यवस्था लागू की गई थी, जो जारी रहेगी.

वहीं, एक किलोवाट के प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का रीचार्ज खत्म हो जाता है या फिर नेगेटिव बैलेंस हो जाने के बाद भी 30 दिन तक उनका विद्युत कनेक्शन नहीं काटा जाएगा. इसके जहां स्मार्ट मीटर अभी तत्काल लगे हैं. उन्हें 15 दिन की कन्वर्जन अवधि और उसके बाद 30 दिन यानी कुल 45 दिन तक उनका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा. सरकार का कहना है कि जहां-जहां नए-नए स्मार्ट मीटर लगे हैं, वहां लोगों को इसकी तकनीकी जानकारी कम है, इसलिए उन्हें ये सुविधा दी जा रही है.

क्या नियामक आयोग में सुलझेगा मामला?

प्राधिकरण ने एक अप्रैल को अधिसूचना जारी करके प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी. लेकिन अब तक शिकायतें आ रही हैं कि अधिसूचना को 26 दिन बीतने के बाद भी उसका उल्लंघन करके यूपी में प्रीपेड कनेक्शन ही दिए जा रहे हैं. ऐसे में नए बिजली कनेक्शन प्रीपेड मोड में देने का मामला अब नियामक आयोग में ही सुलझने की उम्मीद है. फिलहाल, स्थिति जो भी हो यह मुद्दा सरकार के गले की फांस बना हुआ है.

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