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भारतीय लोककथाओं को सिल्वर स्क्रीन पर लेकर आएंगी आरुषि निशंक

अनिल बेदाग

मुंबई। आज के दौर में जब पुष्पा 2, तुम्बाड़ और विभिन्न क्षेत्रीय फिल्में अपनी गहरी जड़ों से जुड़ी कहानियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं, ऐसे में आरुषि निशंक एक दूरदर्शी फिल्म निर्माता के रूप में उभर रही हैं। उनकी प्रोडक्शन कंपनी हिमश्री फिल्म्स भारतीय लोककथाओं और पारंपरिक कहानियों को पुनर्जीवित करने के लिए समर्पित है।

आरुषि निशंक ने हिमश्री फिल्म्स की नींव अपने दम पर रखी और बहुत कम समय में इसे एक प्रतिष्ठित पहचान दिलाई। उन्होंने हॉटस्टार जैसे बड़े स्टूडियो के लिए लाइफ हिल गई नामक शो प्रोड्यूस किया है। इसके अलावा, वह कई प्रमुख प्लेटफार्मों के साथ मिलकर ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रही हैं जो वर्तमान समय की प्रासंगिकता को दर्शाती हैं। उनके अनुसार, चाहे लेखन हो या फिल्म निर्माण, कहानी की प्रासंगिकता ही सबसे महत्वपूर्ण है।

आरुषि कहती हैं, “हम सभी ने अपनी दादी-नानी से बचपन में कहानियां सुनी हैं—ऐसी कहानियां जो हमें जादुई दुनिया में ले जाती थीं और हमें जीवन के अनमोल मूल्यों का पाठ पढ़ाती थीं। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया छोटे परिवारों की ओर बढ़ी, वैसे-वैसे ये कहानियां हमसे दूर होती गईं। आज के दौर में सिनेमा ही वह माध्यम बन गया है जो दादी-नानी की कहानियों की जगह ले सकता है। हिमश्री फिल्म्स का उद्देश्य इन्हीं भूली-बिसरी लोककथाओं, पौराणिक कहानियों और सांस्कृतिक गाथाओं को भारतीय फिल्म उद्योग में जीवंत करना है।”

वर्तमान में, आरुषि निशंक दो से तीन प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं और इंडस्ट्री के शीर्ष निर्माताओं के साथ सहयोग कर रही हैं। हालांकि इन फिल्मों की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन सही समय पर उनके बारे में घोषणा की जाएगी।
हिमश्री फिल्म्स के बैनर तले बनने वाली सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है तारिणी। यह फिल्म भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों की प्रेरणादायक कहानी पर आधारित है, जिन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। यह फिल्म प्रसिद्ध गीतकार और लेखक प्रसून जोशी और कवि कुमार विश्वास द्वारा लिखी गई है और एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के सहयोग से बनाई जा रही है।
तारिणी उस ऐतिहासिक पल को कैद करती है जब पहली बार महिला नौसेना अधिकारियों को अकेले समुद्री अभियान पर जाने की अनुमति दी गई—एक ऐसी उपलब्धि जो पहले कभी नहीं देखी गई थी।

इसके अलावा, आरुषि निशंक उत्तराखंड में एक और बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी कर रही हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को उजागर करेगा। हिमश्री फिल्म्स उन लेखकों और निर्देशकों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो लोककथाओं और पारंपरिक कहानियों से गहराई से जुड़े हुए हैं। कंपनी ऐसे कहानीकारों की तलाश में है, जो दादी-नानी की कहानियों की तरह प्रामाणिक, जीवंत और अर्थपूर्ण किस्से बुन सकें।

आरुषि निशंक का परिवार साहित्य, शिक्षा और जनसेवा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक,’ न केवल उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री हैं, बल्कि एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उनकी माता, जो एक पूर्व प्रधानाचार्य हैं, स्वयं भी एक लेखिका हैं, जिन्होंने “धरती स्वर्ग बनाऊंगी” और “कलम मशाल बन जाए” जैसी दो कविता संग्रह प्रकाशित किए हैं।

आरुषि एक प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना हैं। उन्होंने टी-सीरीज़ के लिए जुबिन नौटियाल और हिमांश कोहली के साथ वफ़ा ना रास आई जैसे लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में अभिनय किया, जिसे यूट्यूब पर 314 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। इसके अलावा, उन्होंने गुरमीत चौधरी के साथ तेरी गलियों से में भी काम किया और ज़ी म्यूजिक के साथ भी कई प्रोजेक्ट्स में सहयोग किया है। उन्हें विभिन्न मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कई बार देखा गया है।

 

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