
विशेष संवाददाता
पटना। हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद आरएसएस बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गया है। इसके लिए उसने ‘मिशन त्रिशूल’ नाम का एक खास प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत तीन मुख्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। नाराज वोटरों की पहचान, प्रभावी मुद्दों का आकलन, और बीजेपी के लिए फायदेमंद और नुकसानदेह मुद्दों का विश्लेषण। यह रणनीति हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में चुनावी सफलता के बाद अपनाई जा रही है।
चुनाव की तैयारी में जुटा आरएसएस
दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में पूरी तरह से जुट गया है। चुनाव अभी आठ महीने दूर हैं, लेकिन RSS ने अभी से ही अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस रणनीति को ‘मिशन त्रिशूल’ नाम दिया गया है। इसके पीछे का कारण यह है कि इस मिशन के तीन मुख्य लक्ष्य हैं।
मार्च में देना है ग्राउंड रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार, बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए RSS कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। ‘मिशन त्रिशूल’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आरएसएस के स्वयंसेवकों को एक खास टास्क दिया गया है। उन्हें अपने इलाके में RSS की शाखाओं का विस्तार करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे जोड़ने के लिए कहा गया है। साथ ही, उन्हें लोगों से संपर्क करके उनके विचार जानने और दोस्ती बनाने का निर्देश दिया गया है। इससे RSS को जमीनी स्तर पर लोगों की राय और उनके मुद्दों को समझने में मदद मिलेगी। स्वयंसेवकों को मार्च तक यह काम पूरा करके अपनी रिपोर्ट RSS की प्रांतीय बैठक में देनी है।
सर्वे भी करा रहा आरएसएस
आरएसएस बिहार चुनाव से पहले एक स्वतंत्र सर्वे भी करा रहा है। यह सर्वे बेहद गोपनीय तरीके से किया जा रहा है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य तीन बातें जानना है।
किस नेता के खिलाफ लोगों में नाराजगी है?
कौन सा मुद्दा सबसे ज्यादा असरदार है?
कौन सा मुद्दा बीजेपी के लिए फायदेमंद और कौन सा नुकसानदेह
माना जा रहा है कि इस सर्वे के नतीजे RSS की चुनावी रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
चुनावी साल में शाखाओं की संख्या बढ़ाने का फैसला
चुनावी साल में RSS ने बिहार में शाखाओं की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। बिहार को दो प्रांतों, उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार, में बांटा गया है। उत्तर बिहार का मुख्यालय मुजफ्फरपुर में और दक्षिण बिहार का पटना में है। फिलहाल, बिहार में लगभग 1000 जगहों पर RSS की शाखाएं लगती हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में ‘त्रिदेव’
दिल्ली विधानसभा चुनाव में RSS ने बूथ स्तर पर ‘त्रिदेव’ तैनात किए थे। हर ‘त्रिदेव’ में एक पुरुष, एक महिला और एक युवा शामिल थे। ये ‘त्रिदेव’ अपने-अपने क्षेत्र में लोगों से संपर्क करते थे और उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करते थे। हर ‘त्रिदेव’ के नीचे कम से कम 10 लोग काम करते थे। इस तरह, RSS ने एक मजबूत नेटवर्क बनाया था, जिससे उसे चुनाव में काफी मदद मिली थी। माना जा रहा है कि आरएसएस की यही रणनीति बिहार में भी दोहराई जा सकती है