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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा से विश्व हिंदू परिषद नाराज

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़े जाने की घटनाओं की निंदा की। उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से इस मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विनोद बंसल ने कहा, ‘एक समय था जब बांग्लादेश में मां काली के नाम का उद्घोष सुनाई देता था, आज काली के उन्हीं मंदिरों को तोड़ा जा रहा है।’

वीएचपी ने हिंसा की निंदा की

बंसल ने कहा, ‘कल तीन और मूर्तियों को तोड़ दिया गया। बांग्लादेश की सरकार को इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा रुकनी चाहिए।’

आपको बता दें कि शनिवार सुबह बांग्लादेश में पुलिस ने हिंदू देव प्रतिमाओं को तोड़ने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारी अबुल खैर ने इसकी जानकारी दी।

दो प्रतिमाओं को तोड़ा

अधिकारी ने बताया कि आरोपी की उम्र करीब 37 साल है। उसे आज अदालत में पेश किया जाएगा। पकड़े गए आरोपी का नाम अजहारुल बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने शाकुई इलाके में निर्माणाधीन मंदिर में दो प्रतिमाओं के शीश तोड़ दिए थे।

सरकार ने दिया जवाब

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा था कि ‘इस साल 8 दिसंबर तक बांग्लादेश में हिंदू और दूसरे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा से जुड़े 2200 मामले सामने आए हैं। वहीं अक्टूर 2024 तक पाकिस्तान में 112 मामले ऐसे मिले।’

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और बांग्लादेश सरकार को इससे अवगत भी कराया है। मंत्री ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि बांग्लादेश हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए सभी महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।

अल्पसंख्यकों पर बढ़े हमले

बांग्लादेश के लिए यह समय काफी उतार-चढ़ाव वाला है। इसकी शुरुआत बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन से हुई। इस आंदोलन ने कुछ ही वक्त में हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान हिंदू अल्पसंख्यकों पर भी हमले हुए और मंदिरों को तोड़ा गया।

यह हालात इसलिए बने, क्योंकि बांग्लादेश में छात्रों विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने देश में कोटा सिस्टम की समीक्षा की मांग की थी। प्रदर्शन के बाद शेख
हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा।

600 लोगों की हुई मौत

प्रदर्शन और इस दौरान हुई हिंसा में करीब 600 लोगों की मौत हो गई। हसीना ने भारत में शरण ली और बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार बना ली। इस्कॉन के एक पुजारी चिन्मय कृष्ण दास को ढाका में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था।

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