
संवाददाता
नई दिल्ली । दिल्ली और एनसीआर में हर दिन कहीं न कहीं से कुत्तों के काटने से बच्चों की मौत की खबरें आ रही हैं। स्पष्ट है कि सड़कों पर आवारा कुत्तों का आतंक तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि बीते दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें पालतू कुत्तों ने भी लोगों को अपना शिकार बनाया है। ऐसे में लोग अब घर के बाहर अगर कुत्ते दिखें तो अकेले निकलने से डरने लगे हैं। बीते दिनों कुत्तों के आतंक की ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जो दिल दहलाने वाली हैं।
छत पर लड़की को काटा
दक्षिणी दिल्ली के नेब सराय इलाके में एक अमेरिकी बुली डॉग ने 29 मार्च को 17 वर्षीय एक लड़की पर हमला कर दिया। लड़की अपनी बिल्डिंग की छत पर गई थी, जहां उसके ऊपर की मंजिल पर रहने वाले 60 वर्षीय मान सिंह भी अपने पालतू अमेरिकन बुली के साथ मौजूद थे। उसी वक्त बुली ने लड़की पर हमला कर दिया।
दो भाईयों की दर्दनाक मौत
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के वसंत कुंज साउथ थाना इलाके में भी 3 दिनों के अंदर दो सगे भाई आनंद (7) और आदित्य (5) की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई, जांच हुई तो पता चला कि दोनों भाइयों को कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला।
पालतू पिटबुल ने नौ साल के मासूम को काटा
गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित डीएलएफ के ए-ब्लॉक में 24 मार्च को दोपहर के वक्त घर के बाहर खेल रहे नौ साल के निरीक्ष को पड़ोसी के पिटबुल नस्ल के कुत्ते ने हाथ, पैर, कमर पर काट कर बुरी तरह घायल कर दिया। बच्चा किसी तरह कुत्ते से अपनी जान बचाकर घर के अंदर भागा फिर वहां से उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज कराया गया।
बच्ची को भी काटा
कुत्तों ने मार्च में एक बच्ची को भी काट लिया। मौके पर गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सिंधी कैंप, रंगपुरी पहाड़ी की रहने वाली पीड़ित बच्ची माही 26 मार्च दोपहर को घर के बाहर खेल रही थी। तभी कुछ कुत्तों ने बच्ची पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्ची को पीठ में काट लिया। हालांकि, कुत्तों की संख्या अभी साफ नहीं हो सकी है। मौके पर गश्त कर रहे पुलिसकर्मी बच्ची को अस्पताल ले गए।
बुजुर्ग को कुत्ते ने काटा, हुई मौत
मध्य दिल्ली के हौज काजी इलाके में कुत्ते के काटने से बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि बुजुर्ग को करीब दो माह पहले कुत्ते ने काटा था। इसका उपचार नहीं कराया गया था। मृतक की शिनाख्त राम प्रसाद उर्फ बाबा के रूप में हुई है। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले थे। हौजकाजी इलाके में वह फुटपाथ पर रहते थे। बुजुर्ग की मौत अप्रैल में हुई थी।
रिपोर्ट में खुलासा छह महीनों में सिर्फ दो अस्पतालों में आए 47 हजार केस
मार्च में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार बीते छह महीने में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया और सफदरजंग में ही कुत्ते काटने के 47 हजार मामले सामने आए थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुत्तों का आतंक कितना बढ़ गया है।
क्या कहती पशुपालन मंत्रालय की रिपोर्ट
आवारा कुत्तों की समस्या देश में कितनी गंभीर होती जा रही है इसका अंदाजा केंद्र सरकार के पशुपालन मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि कुत्तों के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी से दुनिया में होने वाली कुल मौतों में एक-तिहाई भारत में होती हैं। इस आंकड़े से साफ है कि रेबीज की नौबत ही न आए। इसके लिए जरूरी है कि आवारा कुत्तों के कहर को रोकने के लिए केंद्र से लेकर राज्यों की तमाम संबंधित सरकारी एजेंसियां इस पर लगाम कसने के लिए गंभीरता से पहल करें।
कब-कब बने कानून
भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने इस दिशा में परामर्श भी जारी कर रखे हैं, मगर उन पर अमल नहीं हो पा रहा है। बोर्ड की स्थापना तब किया गया था, जब आवारा कुत्तों को संरक्षित करने के लिए 1960 में संसद ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम बनाया था।
यह बोर्ड केंद्र एवं राज्य सरकारों को पशुओं के मामलों में सलाह देने वाली एक निकाय है और अधिनियम-1960 के तहत बनाए गए नियमों के कार्यान्वयन से संबंधित मामलों को देखता है।
इसी क्रम में जब आवारा जानवरों का आतंक और नागरिकों से उनका संघर्ष बढ़ने लगा तो इसी अधिनियम के तहत पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम-2001 बनाया गया। अभी इसी प्रविधान के अनुरूप स्थानीय प्राधिकरणों एवं निकायों द्वारा आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के उपाय किए जा रहे हैं।
इनमें मुख्य रूप से कुत्तों का रेबीज रोधी टीकाकरण एवं उनकी संख्या को स्थिर करने के उद्देश्य से आवारा कुत्तों की नसबंदी की जाती है। मगर देखा जा रहा है कि निगमों एवं स्थानीय निकायों द्वारा पशु जन्म नियंत्रण नियमों का क्रियान्वयन ठीक से नहीं किया जाता है। बोर्ड भी समय-समय पर सिर्फ दिशा-निर्देश जारी कर औपचारिकता पूरी कर लेता है।