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22 साल का हिन्दू लड़का रक्तदान कर बचा रहा जिंदगी, कपिल मिश्रा ने दिखाई थी सच्ची राह

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नई दिल्ली : आज जब देश में कोरोना जैसी महामारी की वजह से कितनों ने अपनों को खोया है तो वहीं इस महामारी ने हमें जीवन का अमूल्य पाठ पढ़ाया है , इस दौरान हम ये समझ गये कि  जिंदगी की कीमत क्या होती है. अपने लिये तो सभी जीते हैं लेकिन दूसरों को जिंदगी देने में आपको जो संतुष्टि का एहसास होगा उसे शब्दों में बयां कर पाना मुमकिन नहीं है .

किसी की जिंदगी को उसके नाम करना बेहद मुश्किल नहीं है इसका एक सीधा और सरल रास्ता रक्तदान भी हैं। जिसे महादान कहा गया है , ये दान निस्वार्थ भाव से दिया जाता है. इस नेक काम में हमारी आज की युवा पीढ़ी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है, ऐसे तो लाखों लोग हैं जो इस काम में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं, लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे लड़के के बारे में जो कई मुश्किलों का सामना कर ये पुण्य का काम कर रहा है. दिल्ली के सराय काले खां का रहने वाला सुमित इन दिनों रक्तदान के जरिये लोगों को नई जिंदगी दे रहा है.

आपको याद होगा ये वही हरिजन बस्ती में रहने वाला सुमित है जिसने एक दूसरे समुदाय की लड़की से शादी की है, उस वक्त लड़की के परिवार वाले इसके खून के प्यासे थे. इलाके में रहने वाले दलित हिंदूओं को बुरी तरह मारा गया था. उस वक्त दंगाइयों ने कई घरों में तोड़फोड़ की थी, तब बीजेपी नेता कपिल मिश्रा जी उस समय मदद के लिए आगे आये और दोबारा से उसे जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित किया. और कपिल मिश्रा की मेहनत रंग लायी जिसका जीता जागता उदाहरण है ये लड़का, जो अपने इलाके में रहने वाले सभी युवाओं को समाज की भलाई के लिए जागरुक करने का काम कर रहा है. सेवा भावना के लिए प्रेरित कर रहा है.

दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा हिंदुओं को संगठित करने के लिए हिन्दू इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं जिसके जरिये देश ही नहीं बल्कि विदेश में रहने वाले हिंदुओं को भी जोड़ा जा रहा है. हिंदुओं को मजबूत करने के कपिल मिश्रा जी के प्रयासों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है . अब तक लाखों लोग हिन्दू इकोसिस्टम  के सदस्य बन गए हैं .

दरअसल रक्तदान का वैदिककाल से दान की महिमा का उल्लेख होता आया है, जिसमें ये कहा गया है कि अगर दाहिना हाथ दान देता है तो बाएं को भी पता न चले वही सच्चा दान है, लेकिन रक्तदान तो इस वैदिक मान्यता को और अनूठा विस्तार देने का काम करता है .

कुछ इस्लामिक विद्वानों के अनुसार रक्त दान हो या अंगदान दोनों ही इस्लाम में प्रतिबंधित (हराम) होते है और मुसलमानों को ये नहीं करना चाहिए. लेकिन वहीं हिंदू धर्म के लोग ये खुले मन से करते आये है, यही खूबसूरती है हिंदू धर्म की जो हमें निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा देता है .

बता दें आपको WHO के द्वारा 14 जून को विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जाता है, इसलिए याद रखें  ‘रक्तदान है महादान’ ।

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