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छत्तीासगढ की कांग्रेस सरकार टीकाकरण में आरक्षण लागू कर तलाश रही राजनीतिक अवसर

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विनीत कांत पाराशर

नई दिल्‍ली। कोरोना महामारी के बढ़ते खतरे के बीच कुछ गैर भाजपा सरकारें  वैक्सीन को लेेकर राजनीति कह हद पार कर रहे हैं। कोरोना को हराने के लिए दुनिया के सबसे बड़े वैक्‍सीनेशन अभियान कींं  एक तरफ दुनिया के ज्‍यादातर देश तारीफ कर रहे हैंं तो वहीं कांग्रेस शासित कुछ राज्‍य केन्‍द्र की मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए वैक्‍सीन के बंटवारे में भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं तो वहीं वैक्‍सीन के सहारे अपनी वोटों की राजनीति को चमकाने का काम कर रही है।

छत्तीसगढ सरकार ने पिछले दिनों वैक्सिनेशन में आरक्षण की व्‍यवस्‍था का ऐलान कर जो किया वो इसी का उदाहरण हैं। दरअसल पिछले दिनों जब केन्‍द्र सरकार ने 18 से 45 साल के लोगों के वैक्‍सीनेशन का ऐलान कर राज्‍य सरकारों से इस पर अमल के लिए कहा तो छत्‍तीशगढ सरकार ने इसमें भी राजनीति ढूंढ ली। दरअसल बघेल सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया जिसके मुताबिक सरकार की ओर से वैक्सीनेशन में अंत्योदय कार्ड धारकों को सबसे पहले प्राथमिकता देने बीपीएल कार्ड धारकों तथा उसके बाद एपीएल व सबसे अंत में बाकी लोगों को कोरोना की वैक्‍सीन लगाने के आदेश दिए गए थे। ले‍किन सरकार को ये आदेश आते ही इसका विरोध शुरू हो गया।

पूर्व मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर सरकार वैक्‍सीनेशन में आरक्षण की इस व्‍यवस्‍था को चुनौती दी। जिस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि वैक्सिनेशन में आरक्षण नहीं हो सकता। संक्रमण किसी को भी हो सकता है, जीने का अधिकार सभी को है। हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए राज्‍य सरकार को कडी फटकार लगाई और सख्‍त टिप्पणी करते हुए कहा कि बीमारी अमीरी या गरीबी देखकर नहीं आती है। इसलिए वैक्सीन भी इस नजरिए से नहीं लगाई जा सकती।

हाईकोर्ट ने राज्य के अपर मुख्य सचिव  के आदेश को गलत बताते हुए एक स्पष्ट पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता अमित जोगी ने कहा था कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में वैक्सीन बर्बाद हो रही है, जो दूसरे व्यक्तियों को लग सकती है। यह करना अन्य लोगों के साथ अन्याय की तरह है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए यह अच्छा होगा कि सहायता केंद्र खोले।

इन केंद्रों पर गरीब तबके के व्यक्ति, जिसके पास मोबाइल और इंटरनेट नहीं है वहां जाकर अपना रजिस्ट्रेशन और वैक्सीन लगवाने की जानकारी और सुविधा मिले। वकीलों ने बताया कि आपदा नियंत्रण अधिनियम में कहीं भी किसी एक वर्ग को सुरक्षा देने का उल्लेख नहीं है।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल  सतीश चंद्र वर्मा ने अदालत में हबताया कि वैक्सीन कम है। गरीब तबके में जागरूकता नहीं है। उनके पास मोबाइल और इंटरनेट भी नहीं है। गरीब बाहर निकल जाते हैं, जिससे संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। हास्‍यास्‍पद जवाब दिया कि प्राथमिकता के आधार पर भी इस तबके को सबसे पहले वैक्सीन लगवाया जा रहा है।

इस जवाब पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई। कहा, पूरे राज्य में लॉकडाउन है। ऐसे में गरीब तबके को बाहर निकलने से रोकना शासन की जिम्मेदारी है। कोरोना गरीब और अमीर देखकर संक्रमित नहीं कर रही है।

बता दें कि इससे पहले राजस्‍थान की कांग्रेस सरकार, पंजाब व दूसरी गैर भाजपाई सरकारें भी केन्‍द्र पर वैक्‍सीन देने में भेदभाव का आरोप लगा चुकी है। लेकिन वास्‍तविकता ये है कि इन राज्‍यों को प्रर्याप्‍त मात्रा में टीके की खेप दी गई है लेकिन टीका लगाने की खराब व्‍यवस्‍था के कारण ज्‍यादातर राज्‍यों में वैक्‍शीन बर्बाद हो गई।

केन्‍द्र दे चुका है 16 करोड से अधिक खुराक

देश भर में टीकाकरण अभियान में अब तक टीके की कुल 16.73 करोड़ खुराक दी जा चुकी है। 8 मई को सुबह सात बजे तक कोविड-19 के टीके की कुल 16,73,46,544 खुराक दी जा चुकी हैं। पिछले 24 घंटे में टीके की करीब 23 लाख खुराक दी गयीं। टीकाकरण अभियान के 112वें दिन 7 मई को टीके की 22,97,257 खुराक दी गई।

केंद्र सरकार ने अब तक राज्यों को 17.49 करोड़ से ज्यादा टीके की खुराक प्रदान की हैं। इसमें से बरबादी सहित कुल खपत16,65,49,583 खुराक हैं। अभी भी राज्यों के पास कोविड टीके की 84 लाख से अधिक खुराक उपलब्ध हैं। इसके अलावा अगले तीन दिनों में राज्यों को 53लाख से अधिक खुराक दी जाएंगी।

देश में आज तक कुल मिलाकर 1,79,30,960 कोविड मरीज ठीक हुए है। राष्ट्रीय रिकवरी दर 81.90 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों के दौरान 3,18,609 कोविड मरीज ठीक हुए है। स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या में 10 राज्यों का योगदान 71.93 प्रतिशत है। देश में अब तक कोविड की 30 करोड़ से ज्यादा जांच करायी गयी है और कुल पॉजिटिविटी दर 7.29 प्रतिशत है।

पिछले 24 घंटे में कोरोना के 4,01,078 नये मामले दर्ज किए गए। नए मामलों में 70.77 प्रतिशत योगदान दस राज्यों से है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 54,022दैनिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद 48,781 मामलों के साथ कर्नाटक दूसरे स्थान पर है, जबकि केरल में 38,460 नए मामले सामने आए हैं।

देश में कुल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 37,23,446 हो गई है। यह संख्या देश के कुल संक्रमित मामलों का 17.01 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों के दौरान कुल सक्रिय मामलों की संख्या में 78,282 की बढ़ोतरी हुई है। देश के कुल सक्रिय मामलों में 12 राज्यों की कुल हिस्सेदारी 80.68 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय मृत्यु दर लगातार गिर रही है और इस समय 1.09 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में कोविड से 4,187 लोगों की मौत हुई। 10 राज्यों का मौत के नए मामलों में 77.29 प्रतिशत योगदान है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 898 लोगों की जान गई, इसके बाद 592 मौतों के साथ कर्नाटक दूसरे स्थान पर है।

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