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सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्‍ता अजय दूबे ने बिहार के मुख्‍यमंत्री से की सुल्‍तानगंज का नाम बदलने की मांग

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भागलपुर की शिवनगरी कहे जाने वाले सुल्‍तानगंज का पौराणिक नाम है जहानुगीरी

संवाददाता

नई दिल्‍ली। बिहार के कैमूर जिले के मूल निवासी और दिल्‍ली हाईकोर्ट के अधिवक्‍ता अजय दूबे बिहार के भागलपुर जिले में सुल्तानगंज का नाम बदलकर इसके पौराणिक नाम जहानुगीरी करने की मांग की है।

राष्‍ट्रवादी विचारधारा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्‍ता अजय दूबे ने बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर सुल्‍तान गंज का नाम बदलने की मांग करते हुए कहा है कि यह एक ऐतिहासिक स्थान है जो शिवभक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण है। यहां गंगा उत्तरवाहिनी है। इस स्थान से सावन में शिवभक्त कावरियें जल भरकर देवघर तक की कठिन पैदल यात्रा करते हैं और बारह ज्योतिलिंग में एक बाबा बैद्यनाथ पर जल अर्पित करते हैं। सुल्तानगंज में बाबा अजगबीनाथ का विश्वप्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है।

सुल्तानगंज हिन्दू तीर्थ के अलावा बौद्ध पुरावशेषों के लिए भी प्रसिद्ध है। 1853 ई. में रेलवे स्टेशन के अतिथि कक्ष के निर्माण के दौरान यहां से मिली बुद्ध की लगभग 3 टन वजनी ताम्र प्रतिमा आज बर्मिघम म्यूजियम में रखी है।

बहुत प्रसिद्ध प्रथा है कि जब भागीरथी के प्रयास से गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ तो उनके वेग को रोकने के लिए साक्षात शिव अपनी जटाएं खोलकर उनके प्रवाह मार्ग में आकर उपस्थित हो गए। शिव भगवान के इस चमत्कार से गंगा गायब हो गई। बाद में देवतागण की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उन्हें अपनी जांघ के नीचे बहने का मार्ग दे दिया। इस कारण से पूरे भारत में केवल यहां ही गंगा उत्तर दिशा में बहती है। कहीं और ऐसा नहीं होता है क्योंकि शिव भगवान स्वयं यहां प्रकट हुए थे। अतः श्रद्धालुओं ने यहां स्वंयम्भुव शिव का मंदिर स्थापित किया और उसे नाम दिये अजगवीनाथ मंदिर अर्थात एक ऐसे देवता का मंदिर जिसने साक्षात उपस्थित होकर एक चमत्कारिक काम किया। जो श्रद्धालु यहां सावन के महीने में कांवर के लिए गंगाजल लेने आते हैं वे इस मंदिर में आकर भगवान शिव की भूजा अर्चना और जलाभिषेक करना नहीं भूलते हैं। इसी दृष्टि से यह मंदिर यहां का महत्वपूर्ण पौराणिक और ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है।

अधिवक्‍ता अजय दूबे के मुताबिक सुल्तानगंज का पौराणिक और ऐतिहासिक नाम जहानुगीरी था जिसका वर्णन पंडो द्वारा संकल्प करने के समय पढ़े जाने वाले श्लोकों में भी आता है। इस स्थान से जुड़ी कहानियों का वर्णन वेद पुराणओं में भी हैं। कहा जाता है कि सर्व प्रथम इसी स्थान से रावण ने बाबा वैद्धनाथ को कांवर में जल भरकर चढ़ाया था। अजय दूबे ने ने मुख्‍यमंत्री से मांग की है कि देशवासियों को दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति, धर्म व इतिहास को उसकी वास्तविक पहचान दिलाने की आवश्यकता है। अतः हिन्दू आस्था से जुड़े इस अति महत्वपूर्ण स्थान का पौराणिक नाम जहानुगीरी पुनः स्थापित किया जाए ।

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