Breaking News
Home 25 देश 25 वरिष्‍ठ पत्रकार व लेखक सतीश वर्मा की डोगरी मे अनुवादित किताब को मिला साहित्‍य अकादमी पुरूस्‍कार

वरिष्‍ठ पत्रकार व लेखक सतीश वर्मा की डोगरी मे अनुवादित किताब को मिला साहित्‍य अकादमी पुरूस्‍कार

Spread the love

नई दिल्‍ली / जम्‍मू । दिल्‍ली के रहने वाले और जम्‍मू में कार्यरत पत्रकार एंव लेखक सतीश वर्मा की पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर पर लिखी गई पाकिस्‍तान की हकीकत से रूबरू के डोगरी भाषा में अनुवादित पुस्‍तक को साहित्‍य अकादमी पुरूस्‍कार के लिए नामित किया गया है। सतीश वर्मा देश के ऐसे पहले हिन्‍दी लेखक व पत्रकार हैं जिनकी डोगरी में अनुवादित किताब को साहित्‍य अकादमी का पुरूस्कार मिला है।

पाकिस्तान दी हकीकत कन्नै रूबरू पत्रकार एवं लेखक सतीश वर्मा की पाकिस्तान व उसके कब्जे वाले जम्मू कश्मीर तथा नार्दन एरिया जिसे गिलगित बालटिस्तान तथा स्कर्दू कहा जाता है, की दो बार की यात्राओं को लेकर हिंदी में लिखी गई किताब पाकिस्तान की हकीकत से रूबरू का डोगरी अनुवाद है। जिसके हिन्‍दी संस्‍करण पाकिस्तान की हकीकत से रूबरू को देश के एक प्रमुख प्रकाशक डायमंड बुक्स, ने सन 2011 में प्रकाशित किया था। इसका विमोचन प्रगति मैदान स्थित पुस्तक मेले में पदमश्री पत्रकार एवं लेखक राम बहादुर राय ने किया था। इस किताब को देशभर में पाठकों द्वारा काफी सराहा गया । डोगरी में अनुवाद की पुस्तक पाकिस्तान दी हकीकत कन्नै रूबरू का विमोचन 2016 में एक समारोह में जम्मू कश्मीर के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री डॉक्टर निर्मल सिंह ने किया था।

पुरूस्‍कृत किताब की अनुवादक डा0 नीलम सरीन व मूल लेखक सतीश वर्मा

दरअसल, पाकिस्तान की हकीकत से रूबरू पुस्तक सतीश वर्मा ने सन् 1999 में पाकिस्‍तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ के कार्यकाल में हुई लाहौर बस यात्रा। उसके बाद 2005 में पाकिस्तान में जनरल परवेज मुशर्रफ की हुकूमत के दौरान की गई यात्राओं के संदर्भ में लिखी गई थी।  इन दोनों यात्राओं के दौरान एक पत्रकार व शोधकर्ता के तौर पर वहां अनेकों  लोगों से बातचीत तथा वहां हुए कई प्रकार के अनुभव तथा जमीनी हालात का जायजा लिया था। जिसमें भारत पाक  रिश्ते,  पीओके में चल रहे आतंकी शिविरों, आजादी का  दुस्वपन पालकर एलओसी लॉघकर गए कश्मीरियों की वहां बने रिफ्यूजी शिविरों में उनकी बदहाली आदि विषयों पर गहन पड़ताल करने की कोशिश की गई थी। ना केवल पीओके बल्कि नॉर्दन एरिया में भी लोग पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे थे। नंगी आंखों से देखे गए ऐसे अनेकों दृश्यों को सतीश वर्मा ने शब्‍दों के जरिए किताब में दृश्‍यांकित करने का प्रयास किया । इसके अलावा सतीश वर्मा ने कई कडुए अनुभवों को कहानी के रूप में किताब में समेटा । इस किताब को डायमंड बुक्स के मालिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने प्रकाशित किया बाद में इस किताब को डोगरी में अनुवादित किया डोगरी की मशहूर लेखिका डॉक्टर नीलम सरीन ने।  बता दें कि दिल्‍ली के रहने वाले सतीश वर्मा पिछले तीन दशकों से खोजपरक पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। पिछले 16 सालों से वे राष्‍ट्रीय सहारा के ब्‍यूरो चीफ के रूप में जम्‍मू में कार्यरत हैं।

ब्लिट़ज, मनोहर कहानियां, माया और संडे मेल जैसे नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में काम कर चुके सतीश वर्मा की कई शानदार रपटों के लिए उन्‍हें राष्‍ट्रीय स्‍तर के पुरूस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है। उनकी कश्‍मीर को लेकर लिखी गई हिन्‍दी व ऊर्द में प्र‍काशित किताब कश्‍मीर एक अंतहीन जंग भी काफी चर्चाओं में रही जिसकी अंग्रेजी संस्‍करण जल्‍द ही प्राकशित होने जो रहा है। सतीश वर्मा के डोगरी में प्रकाशित पुस्‍तक को साहित्‍य अकादमी पुरूस्‍कार मिलने पर दिल्‍ली से लेकर जम्‍मू तक वरिष्‍ठ पत्रकारों व पत्रकार संगठनों ने उन्‍हें शुभकामनाएं दी हैं।

About admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*