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रेलवे के फर्स्ट क्लास डिब्बे में अकेली महिला का पर्स सुरक्षित नहीं तो अस्मत कैसे सुरक्षित रहेगी ?

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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली/देहरादून। एक एक्सप्रेस ट्रेन का प्रथम श्रेणी का डिब्बा जिसमें बिना आरक्षण के कोई यात्री आरक्षित डिब्बे में कोई गलती से भी यात्रा करने की गुस्ताखी नहीं कर सकता। अति आधुनिक इन डिब्बों में सीसीटीवी कैमरों से तो हर गतिविधि की निगरानी होती ही है साथ ही इन डिब्बोंक में आरपीएफ के जवान लगातार गश्त करते रहते हैं। एक टीसी व अटैन्डें्ट हर डिब्बेप में मौजूद रहता है। ऐसे में अगर ट्रेन में सफर करने वाली किसी अकेली महिला के पर्स से पैसा या दूसरा कीमती सामान चोरी हो जाए और एक हफ्ते बाद भी सामान चोरी हुआ सामान मिलना तो दूर आरपीएफ वाले पीडित को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए यहां से वहां टरकाते रहें तो भारतीय रेलवे की ऐसी सुरक्षा व्य्वस्थाि पर लानत भेजने के अलावा आप क्योंट करेंगे। सुरक्षित रेल सफर का दावा करने वाले रेल मंत्रालय के लिए ऐसी घटना उसके दावों को आईना दिखाने लिए काफी हैं।
ये किसी काल्पटनिक दृश्यव की बयानगी नहीं बल्कि दिल्ली से देहरदून जाने वाली मसूरी एक्सप्रेस में हुई एक सच्ची‍ घटना है जिसमें फर्स्टद क्लाेस कम्पारर्टमेंट में सफर कर रही एक महिला के बैग से नकदी और डेबिट कार्ड चोरी कर लिए गए और देहरादून में जीआरपी थाने में उनकी रिपोर्ट तक नहीं लिखी गई।

रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में कथित रूप से सक्रिय अवांछित तत्वों, चोरों, धोखेबाजों और सामान चुराने वालों के बारे में शिकायतें मिलना यूं तो कोई नई बात नहीं हैं। लेकिन ये घटना रेलवे में सुरक्षा व्यकवस्था के साथ रेलवे के संसाधनों पर सीधे सवाल खडा करती है। खासतौर से तब जब घटना किसी अकेली महिला के साथ हुई हो। रेलवे स्टेशनों पर जीआरपी की पुलिस हो या रेलवे पुलिस फोर्स भले ही रेल में अपराध करने वाले अपराधियों को पकड़ने के दावे करते हो लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि प्रथम श्रेणी के डिब्बोे में चोरी की वारदात वहां ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना अंजाम नहीं दी जा सकती। दिलचस्पत बात ये हैं कि रेलवे में चेारी की ज्यादातर वारदातों में शिकायतकर्ता या तो अपना सामान मिलने की उम्मीद छोड़ देते हैं या अन्य राज्यों में रहने के कारण मुश्किल से ही मिलते हैं।
घटनाक्रम के मुताबिक 14 जून को दिल्ली के रहने वाले राजेंद्र रतूड़ी की बेटी, जो मसूरी के एक स्कूल में पढ़ रही अपनी बेटी को लेने के लिए दिल्ली से देहरादून आ रही थी, उसका बटुआ चाेरी हाे गया था जिसमें 6000 रुपये, एनआरआई कार्ड आदि थे जो पर्स के अंदर थे।

रेल मदद के माध्यम से दर्ज उनकी शिकायत के अनुसार राजेंद्र रतूड़ी ने बताया कि उनकी बेटी रोशनी ने दिल्ली रेलवे स्टेशन से पानी की बोतल खरीदी थी और 14 जून को ट्रेन में सवार हुई थी। वह गाजियाबाद से ट्रेन में सो गई और जब वह 15 जून को देहरादून में उठी तो देखा कि पर्स में उसका बटुआ गायब था, हालांकि मोबाइल, पर्स सब कुछ बरकरार था। वॉलेट में 6000 रुपये और डेबिट कार्ड तथा एक एनआरआई कार्ड भी था। रेल मदद के लिए बने 139 नंबर पर फोन करने पर उनकी लिखित शिकायत तो ले ली गई लेकिन एफआईआर आज तक दर्ज नहीं हुई। हैरानी की बात ये हैं कि इस फर्स्टत क्लाेस कंपार्टमेंट का सीसीटीवी कैमरा काम ही नहीं कर रहा था जिससे चोरी करने वाले को पकडने की उम्मीसद भी खत्मी हो गई। प्रथम श्रेणी के इस डिब्बेड में बिना आरक्षित टिकट के भी किसी के सफर करने की उममीद नहीं थी। उिब्बे में सिर्फ कैटरिंग स्टाेफ, रेलवे स्टाीफ और सुरक्षाकर्मियों का ही आवागमन था। ऐसे में जाहिर है या तो पर्स से पैसा निकालने वाला कथित चोर उनका जानकार था अथवा उपरोक्तस सभी की भूमिका संदिग्ध् होंने से इंकार नहीं किया जा सकता। देहरादून जीआरपी के प्रभारी संदीप ने रोशनी की शिकायत लेकर उन्हेंी यह कहकर टरका दिया कि चोरी कहां हुई इसका पता नहीं है इसलिए जांच के बाद जहां घटना हुई इस शिकायत को रेफर कर दिया जाएगा। मोटा किराया वसूलने और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बावजूद अगर रेलवे के प्रथम श्रेणी डिब्बेक में सफर करने वाली महिला का सामान सुरक्षित नहीं हैं तो कैसे भ्रोकसा किया जा सकता है कि रेल में अकेली महिला की अस्मनत सुरक्षित रहेगी।

सामान चोरी होने पर मिलता है मुआवजा

नियमत: सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि रेलवे स्टेशन या ट्रेन में सामान चोरी होने की स्थिति में किसी यात्री का सामान यात्रा के दौरान चोरी हो जाता है तो यह रेलवे पुलिस थाने में रेलवे पुलिस फोर्स के पास इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है। वहां यात्री को एक फॉर्म फिल करना होगा। अगर इस फॉर्म को फिल करने और शिकायत दर्ज करने के बाद भी अगर आपकी सुनवाई नहीं होती है और आपको आपका सामान नहीं मिलता है तो ऐसी स्थिति में आप मुआवजे के हकदार होंगे। इसके बाद आपके खोए हुए सामान की कीमत का आंकलन किया जाएगा और इसके बाद आपको इसका मुआवजा दिया जाएगा।

ऑपरेशन अमानत के जरिए मिलता है खोया हुआ सामान

इसके अलावा रेलवे पुलिस ने लोगों के खोए हुए सामान को प्राप्त करने के लिए ऑपरेशन अमानत नाम की एक मुहिम भी शुरू की है। इसके तहत रेलवे पुलिस किसी भी खोए हुए सामान प्राप्त होने की स्थिति में उसे अपने पास सुरक्षित रख लेती है और उस सामान की फोटो खींचकर रेलवे जोन की ऑफिशियल वेबसाइट (Official Website) पर फोटो शेयर करती है। इस साइट पर जाकर आप फोटो देखकर अपने सामान की पहचान कर सकते हैं। इसके बाद आप आसानी से स्टेशन जाकर वह सामान प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन ज्याकदातर ऐसे तमाम नियम सिर्फ कागजी कवायद होती हैं असल में लोगों को ध्केाम खाने के सिवा कुछ नहीं मिलता।

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