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राजस्थान सरकार के तीन साल का रिपोर्ट कार्ड : सरकार ने कांग्रेस घोषणा-पत्र के वादों को हाशिए पर डाला

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गहलोत-पायलट के सियासी घमासान और कुर्सी बचाने में बिजी रही, , किसान और युवा दोनों निराश

जयपुर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने जैसे-तैसे तीन साल पूरे कर लिए हैं। सरकार का आधे से ज्यादा समय तो आपसी सियासी घमासान में ही बीता। गहलोत वर्सेज पायलट के बीच राजनीतिक द्वंद्व चरम पर रहा और एक-दूसरे कि खिलाफ स्तरहीन बयानबाजी भी हुई। रही-सही कसर कोरोना की दो लहरों ने पूरी कर दी। कोरोना और आपसी लड़ाई के बीच जनता के लिए विकास कार्य, चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे हाशिए पर चले गए। इसके चलते राजस्थान की गहलोत सरकार से किसान, युवा और बेरोजगार तीनों ही निराश रहे। सीएमआईई की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में 56 प्रतिशत युवा ग्रेजुएट्स के पास नौकरी नहीं है। 24.59 प्रतिशत बेरोजगारी के साथ राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है।

कांग्रेस घोषणा-पत्र के करीब 200 वादे अब तक पूरे नहीं हो पाए
कोरोना की दो लहरों, लॉकडाउन और सियासी घमासान के गतिरोध के चलते कांग्रेस घोषणा-पत्र के करीब 200 वादे अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इनमें सबसे बड़े वादे किसानों की कर्जमाफी और लाखों युवाओं को रोजगार के सपने आधे-अधूरे ही हैं। सरकार ने सिर्फ आंखों पर पट्टी डालने जैसा ही काम किया है। नए जिलों के गठन की घोषणा हो या फिर लाखों संविदाकर्मियों को नियमित करने का मामला। नई नीतियां बनाने की बात हो या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली देने की घोषणा हो, कुछ भी पूरा नहीं हो पाया है।

घोषणापत्र के वादे पूरे न होने का मुद्दा पायलट भी उठाते रहे
कांग्रेस और उसकी सरकार ने घोषणाएं तो अपार कीं, लेकिन तीन साल में भलीभूत कम ही हो पाई हैं। घोषणापत्र के वादे पूरे न होने के मुद्दा बगावत से समय सचिन पायलट प्रमुखता को उठाते रहे हैं। उनका कांग्रेस हाईकमान से कहना था कि जिन वादों, घोषणाओं को करके कांग्रेस सत्ता में आई है, यदि वे पूरी नहीं होते हैं तो अगले चुनाव में मतदाताओं को हम क्या मुंह दिखाएंगे। इसलिए प्राथमितकता के आधार पर हमें घोषणा-पत्रों के वादों को पूरा करना चाहिए।

सरकार ने उम्मीद से बेहद कम निकाली नई भर्तियां
तीन साल पूरे करने जा रही राज्य सरकार ने बजट घोषणा में एक लाख 78 हजार भर्तियां करने का वादा किया था, लेकिन अब इसे पूरा करना पहाड़ चढ़ने जैसा लग रहा है। कार्यकाल में अब दो साल से भी कम का समय शेष हैं, क्योंकि चुनाव से पहले आचार संहिता लग जाने के कारण कुछ माह 2023 में काम नहीं हो पाएंगे। जिस गति से रोजगार देने का काम हो रहा है, उसमें तो अपना वादा पूरा करने में अगले पांच साल भी कम पड़ेंगे। हां, अटकी भर्तियों में नियुक्ति दी गई है। इनमें 61 हजार नियुक्तियां अटकी भर्तियों में, जबकि अन्य पदों पर 19 हजार को नियुक्ति मिली।

राजस्थान बेरोजगारी दर में देश में दूसरे स्थान पर
सीएमआईई की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में 56 प्रतिशत युवा ग्रेजुएट्स के पास नौकरी नहीं है। 24.59 प्रतिशत बेरोजगारी के साथ राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। राजस्थान में महिला बेरोजगारी दर 65.31 फीसदी है। जम्मू-कश्मीर (72.60%) में यह दर सबसे ज्यादा है। पुरुष बेरोजगारी दर 21.20% है, जो 25.27% के साथ हरियाणा के बाद दूसरे स्थान पर है। शहरी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की तुलना में अधिक बेरोजगार हैं। महिलाओं की शहरी बेरोजगारी दर 92.1% है, और ग्रामीण की 54.8% है।

बेरोजगारों ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश जाकर भी किया विरोध प्रदर्शन
वहीं, नई भर्तियों के तहत परीक्षाएं हुई हैं, नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं। धीमी गति के लिए कोरोना और विभागों की लेटलतीफी कारण रहे हैं। पेपर लीक और फर्जीवाड़े को लेकर भी सरकार विवादों में रही है। हालात यह बन गए कि राज्य के बेरोजगारों ने राजस्थान में तो कई जगह प्रदर्शन किया ही, कोई सुनवाई न होने के कारण बेरोजगारों ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लखनऊ जाकर कांग्रेस कार्यालय के बाहर तक जाकर सरकार का विरोध किया।

वादों के बावजूद इन पर नहीं हुआ काम

  • नए जिलों का गठन करना।
  • लाखों संविदा कर्मियों को नियमित करना।
  • सामाजिक जवाबदेही कानून, 30 दिन में समस्या निवारण।
  • प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन नीति बनाना।
  • मेला विकास प्राधिकरण का नए सिरे के गठन।
  • प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली।
  • लघु और सीमांत किसानों के पशुधन का मुफ्त बीमा।
  • खाद्य प्रसंस्करण पार्कों की स्थापना।
  • प्रदेश में मसाला बोर्ड का गठन।
  • जानवरों एवं रोजड़ों से फसल बचाने के लिए योजना।
  • इलाज के लिए स्वास्थ्य का अधिकार। राइट टू हेल्थ कानून लाना
  • राज्य की सभी पंचायत समितियों में बालिका छात्रावास।

सरकार को यह नीतियां बनानी थीं, लेकिन अब तक कुछ नहीं

  • नई शिक्षा नीति
  • नई खनिज नीति
  • नई खेल नीति
  • डिजिटस मीडिया के लिए पॉलिसी
  • कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करना
  • जैम पार्क बनाना

राजस्थान के बेरोजगार छात्रों की मांगों के बारे में भी जान लीजिए

  • नर्सिंग भर्ती 2013 के वंचित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति 
  • प्रयोगशाला सहायक भर्ती 2018 की चयन सूची जारी की जाए 
  • स्कूल व्याख्याता भर्ती 2018 में कम किए 689 पदों को जोड़ा जाए
  • 689 पदों को जोड़ कर एक नई सूची जारी की जाए 
  • रीट शिक्षक भर्ती 2021 में 5000 पदों पर विशेष शिक्षकों के पद
  • रीट शिक्षक भर्ती 2021 में 31000 से बढ़ाकर 50000 किया जाए 
  • शिक्षक भर्ती 2012 मामले में सरकार कार्रवाई करे 
  • सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में प्रार्थना पत्र दिया जाए 
  • रीट शिक्षक भर्ती 2018 को जल्द से जल्द पूरी की जाए l
  • पंचायती राज एलडीसी भर्ती 2013 का नियुक्ति प्रक्रिया का कैलेंडर
  • टेक्निकल हेल्पर,पंचायतराज JEN, कंप्यूटर अनुदेशक भर्ती
  • फर्स्ट ग्रेड और सेकंड ग्रेड के लिए 
  • पीटीआई भर्ती के 461पदों की संख्या बढ़ाकर 2000 पदों पर हो
  • 6 बेरोजगार अभ्यर्थियों के मुकदमे वापस ले जाए l
  • प्रतियोगी परीक्षा में गैर जमानती कानून का अध्यादेश 
  • चिकित्सा विभाग में नई भर्तियों की विज्ञप्तिया जारी की जाए
  • बाहरी राज्यों का कोटा कम कर प्रदेश के बेरोजगारों को प्राथमिकता
  • प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र गृह जिले में हों
  • परीक्षा केंद्र सरकारी स्कूलों में हों और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी 
  • प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में बायोमेट्रिक वीडियोग्राफी जरूरी हो

राजस्थान में युवाओं और बेरोजगारों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। पहले तो युवाओं के लिए नौकरियां और रोजगार के साधनों का अभाव है। यदि कभी भर्तियां निकलती भी हैं, तो वो विवादों में फंसकर रह जाती हैं। रीट परीक्षा (राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा) इसका ताजा उदाहरण है। रोजगार पाने के युवाओं के सपने पूरे नहीं हो पा रहे हैं। बेरोजगार युवाओं ने अब राजस्थान सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

‘राजस्थान की गूंगी-बहरी सरकार नहीं कर रही है सुनवाई’
बेरोजगारों के संगठनों का आरोप है कि अपने हक के लिए कई महीनों से राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर आंदोलन किए हैं। धरने दिए हैं। बेरोजगारों के प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तक मिले हैं, लेकिन राजस्थान की गूंगी-बहरी कांग्रेस सरकार उनकी सुनवाई ही नहीं कर रही है। इसलिए अब आंदोलन की रणनीति बदली गई है।

बेरोजगार यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विरोध करेंगे
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। प्रदेश के बेरोजगार काफी समय से धरने पर बैठकर आंदोलनरत हैं। लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही। ऐसे में अब बेरोजगार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विरोध करेंगे। इसके साथ ही कांग्रेस के आला नेताओं को राजस्थान सरकार की कार्यशैली से भी अवगत कराएंगे।

प्रियंका गांधी की रैली में विरोध करने यूपी पहुंचे युवा
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन ने कहा कि 1000 से ज्यादा बेरोजगार 24 नवंबर को प्रियंका गांधी की रैली में विरोध करने पहुंचे। ताकि राजस्थान सरकार की कारगुजारी का कांग्रेस के आला नेताओं को भी पता चल सके। उपेन यादव ने कहा कि महेश जोशी ने जूठ बोल बेरोजगारों का अनशन तुड़वाया है। जबकि रीट भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के आरोपियों को पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है। राजस्थान सरकार के खिलाफ बेरोजगारों का आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गया है। राजस्थान के बेरोजगारों का प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुआ। इस दौरान प्रदेश में जगह-जगह बेरोजगारों का स्वागत किया गया। जिसमें बेरोजगारों के प्रतिनिधि मंडल ने युवाओं को उत्तर प्रदेश महापड़ाव में आने का न्योता दिया।

रात भर खुले आसमान के नीचे ठिठुरते रहे छात्र

इस तस्वीर को देखिए, ये तस्वीरें पत्थरदिल कांग्रेस नेताओं की हकीकत बयां कर रही है, सर्द रात में , खुले आसमान के नीचे नौकरी के लिए रात गुजारने को मजबूर इन छात्र-छात्राओं को उनके माता-पिता ने बड़ी ही कठिनाइयों से पाल पोस कर बड़ा किया था। लेकिन कांग्रेस के बेरहम नेताओं ने इनकी एक छोटी सी मांग पूरा करने के बदले, इन्हें कड़ाके की सर्दी में रातभर तड़पने के लिए मजबूर कर दिया। कांग्रेस आलाकमान के इशारे पर गहलोत सरकार की जिद से रात भर सर्दी में ठिठुरते रहे ये स्टूडेंट्स। लेकिन ना तो प्रियंका गांधी को और ना ही गहलोत सरकार को इनपर रहम आई। अहंकार में डूबे कांग्रेस नेताओं ने इस बात भी ख्याल नहीं रखा कि कई बेरोजगार महिलाएं भी कांग्रेस नेताओं की बेरुखी का दंश झेलती रहीं। 

कड़ाके की सर्दी में कई छात्र बीमार हो गए

हैरानी की बात है राजस्थान से लखनऊ विरोध करने पहुंचे कुछ छात्र खुले आसमान में सर्दी की चपेट में आकर बीमार हो गए, कई स्टूडेंट्स को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, लेकिन कांग्रेस नेताओं का दिल नहीं पसीजा। राजस्थान के बोरजगार अपनी मांगों को लेकर 46 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। गहलोत सरकार की शिकायत करने ये छात्र लखनऊ पहुंचे थे, ताकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात करते अपनी बात रख सकें।

प्रियंका गांधी ने छात्रों से मुलाकात से मना किया

लखनऊ पहुंचे राजस्थान के बेरोजगार छात्रों ने ठान लिया है कि इस बार गहलोत सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई होगी या तो राजस्थान की गहलोत सरकार को उनकी मांगे माननी पड़ेगी नहीं तो अपनी मांगों को लेकर वे जान भी देने को तैयार हैं। और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी धरना जारी रहेगा। लेकिन छात्रों की समस्यायें और राजस्थान की गलहोत सरकार से बात कर उसे सुलझाने के बजाय, प्रियंका गांधी ने मुलाकात तक नहीं है। 

लखनऊ में अपनी 22 मागों के लेकर छात्रों ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन छात्रों की मांग सुनने के बदले उनके साथ बदसलूकी की गई।

‘हठधर्मिता छोड़ छात्रों से बात करे गहलोत सरकार’

छात्रों की मांगों को लेकर राजस्थान सरकार की बेरूखी के बाद अब बीजेपी ने छात्रों के साथ कांग्रेस की बेरूखी का विरोध करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को हठधर्मिता छोड़कर युवाओं की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।

राजस्थान के बेरोजगारों का कहना है कि कांग्रेस ने उनसे वादाखिलाफी की है। यूपी में प्रियंका गांधी अपनी रैलियों में बेरोजगारों को रोजगार देने और सरकारी भर्ती करने सहित कई वादे कर रही है, लेकिन राजस्थान के बेरोजगार छात्र अब यूपी में कांग्रेस के वादों की पोल खोलने की तैयारी कर चुके हैं। वे कांग्रेस को राहुल गांधी के उस वादे की याद दिला रहे हैं, जो तीन साल पहले राज्य के युवाओं, महिलाओं और किसानों से किए थे, लेकिन अब इन वादों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है।  राजस्थान सरकार के खिलाफ बेरोजगारों का आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गया है। राजस्थान के बेरोजगारों का कहना है कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार झूठ बोल कर बेरोजगारों का अनशन तुड़वाने में जुटी है। जबकि रीट भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के आरोपियों को पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है।

छात्रों का आरोप है कि सरकार ने आनन-फानन में रीट का रिजल्ट जारी कर दिया। जबकि जिन लोगों तक फर्जी तरीके से पेपर पहुंचा था। उनकी मान्यता निरस्त कर उन्हें पकड़ा जाना चाहिए था। लेकिन सरकार इस पूरे प्रकरण पर खानापूर्ति कर वाहवाही लूटना चाह रही है। जिसे प्रदेश के बेरोजगार कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

रीट प्रकरण पर खानापूर्ति कर वाहवाही लूटना चाह रही सरकार
सरकार ने आनन-फानन में रीट का रिजल्ट जारी कर दिया। जबकि जिन लोगों तक फर्जी तरीके से पेपर पहुंचा था। उनकी मान्यता निरस्त कर उन्हें पकड़ा जाना चाहिए था। लेकिन सरकार इस पूरे प्रकरण पर खानापूर्ति कर वाहवाही लूटना चाह रही है। जिसे प्रदेश के बेरोजगार कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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