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पंजाब में घूम रहे दो केजरीवाल: एक ‘नकली केजरीवाल’…तो दूसरा झूठा केजरीवाल !

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नई दिल्‍ली। केजरीवाल ने झूठे वादे कर दिल्ली में सरकार बना ली, अब वही केजरीवाल पंजाब के लोगों को भी झांसा देने की कोशिश में है। पंजाब में घूम-घूम कर लोगो से झूठे वादों की झड़ी लगाई जा रही है। पंजाब के सीएम को नकली बताकर केजरीवाल खुद को बड़ा मसीहा साबित करने की कोशश में है। वोटरों को लुभाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने सीएम चन्नी को ‘नकली केजरीवाल’ बता दिया है।

केजरीवाल ने कहा है कि ‘वे जो भी वादे पंजाब के लोगों से करते हैं, वही वादे चन्नी लोगों से कर रहे हैं’, केजरिवाल का कहना है कि उन्होंने बिजली को लेकर वादा किया तो पंजाब की चन्नी सरकार भी उसी राह चल पड़ी। लेकिन महज एलान हुआ, पंजाब सरकार के फैसले का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। केजरीवाल ने पंजाब के लोगों से पूछा है कि क्या ‘पंजाब में किसी के भी पास जीरो बिजली बिल आया है’। मोहल्ला क्लिनिक के वादे को लेकर भी केजरीवाल ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि ‘‘मैंने मोहल्ला क्लिनिक की बात की तो नकली केजरीवाल ने भी ऐलान कर दिया.”

केजरीवाल ने अब तक पूरे नहीं किए दिल्ली के लोगों से किए वादे

अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली के लोगों से जो झूठे वादे किए , वो आज तक पूरे नहीं हुए। दिल्ली की लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि सरकार महज झूठे वादों और सरकारी खजाने से प्रचार के बदौलत चल रही है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार जो वादे करती है, उसे कभी पूरा नहीं करती। लेकिन झूठ पर पर्दा डालने की तमाम कोशिशों के बाद भी , केजरीवाल सरकार की सच्चाई सामने आ ही जाती है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार के बड़े झूठ पर नजर डालिए, साल 2019 और 2020 में आप सरकार ने महज 28 बेरोजगारों को ही नौकरी दी, जबकि इसके लिए कोरोना महामारी से प्रभावित लोगों को नौकरी देने के लिए एक जॉब पोर्टल भी लॉन्च किया गया था और नियुक्तियों को लेकर विभिन्न प्रचार माध्यमों से बड़े बड़े दावे किए गए थे। साफ है कि पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी और केजरीवाल दोनों ही आम जनता को बरगला कर वोटों की खेती करने की कोशिश में है।

वोटों के लिए लगा रहे झूठे वादों की छौंक!

पंजाब की जनता नकली केजरीवाल और झूठे केजरीवाल दोनों की हकीकत जानती है। महज चुनावी फायदे के लिए अरविंद केजरीवाल पंजाब के चुनावों में वादों का छोंक लगा रहे हैं ,  ‘दिल्‍ली फॉर्मूले’ के साथ पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल लोगों पर हवा- हवाई सौगातों की बरसात कर रहे हैं। मुफ्त बिजली-पानी और इलाज का वादा किया जा रहा है। दिल्‍ली के सीएम के पंजाब में हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवाएं मुफ्त मुहैया कराने का वादा कर चुके हैं। लेकिन मुफ्त सेवाओं के वादों की लिस्‍ट अभी खत्म नहीं हुई है, केजरीवाल का नया वादा है, पंजाब में महिलाओं के खाते में हर महीने 1000 रुपए। पंजाब ही नहीं केजरीवाल दूसरे राज्यों में भी अपने झूठे वादों की टोकरी लेकर घूम रहे हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में भी केजरीवाल ने दिल्‍ली मॉडल से लोगों को लुभाने की कोशिश की है। लेकिन केजरीवाल वादों की छड़ी लगाते वक्त ये बताना भूल जाते हैं कि दिल्ली की तरह खर्च को लेकर वाकी राज्यों के हाथ खुले नहीं है और आम लोगों को ही सरकार के मुफ्त के सौगातों की कीमत चुकानी पड़ेगी। 

झूठे वादों और प्रचार पर चल रही दिल्ली सरकार

सरकारी नौकरी छोड़ राजनीतिक कीचड़ की सफाई करने मैदान में उतरे अरविंद केजरीवाल आज खुद उसके दलदल में फंसे नजर आ रहे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर केजरीवाल सत्ता पर तो काबिज हो गए, लेकिन अब ईमानदार केजरीवाल भी झूठे बन गए हैं। केजरीवाल ने झूठे वादे कर सरकार तो बना ली, लेकिन इसे पूरा करने में वे असफल ही रहे। दरअसल राजधानी दिल्ली की सत्ता संभालने के पहले खुद को ईमानदारी और सचाई का पर्याय घोषित करने वाले केजरीवाल अब उलट-पलट कर बयान देने में माहिर हो गए हैं। हकीकत यह है कि आज उनके नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार सिर्फ और सिर्फ झूठे वादे और प्रचार के सहारे चल रही है। सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर रहता है। सरकार जो वादा करती है उसे कभी पूरा नहीं करती, बस सारा ध्यान प्रचार पर रहता है । 

प्रचार पर पानी की तरह बहा रहे पैसा
दरअसल, केजरीवाल सरकार पर एक आरोप अपनी और पार्टी की छवि निखारने के लिए प्रचार तंत्र पर बेहिसाब पैसा खर्च करने का लगता रहा है। विज्ञापनों पर उनकी सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। 2019 की एक आरटीआई से विज्ञापनों पर खर्च के जो आंकड़े आए थे, वे चौंकाने वाले थे। आरटीआई के जवाब में बताया गया था कि 2015 से 2019 तक केजरीवाल सरकार ने 311.78 करोड़ रुपये खर्च किए। जो पूर्ववर्ती सरकारों के मुकाबले चार गुना अधिक थी। तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी केजरीवाल की विज्ञापन नीति बदस्तूर जारी है। दिल्ली की सड़कों पर हर जगह केजरीवाल सरकार की स्तुति वाले विज्ञापन मिल जाएंगे। न्यूज चैनलों और एफ.एम रेडियो पर उनके विज्ञापन छाए ही रहते हैं। समाचार पत्रों में पूर्ण पृष्ठ वाले विज्ञापन अक्सर दिखते हैं। प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों द्वारा लिया जाने वाला औसत विज्ञापन शुल्क भी पिछली सरकारों की तुलना में काफी बढ़ चुका है। यही नहीं जब कोरोना संकट चरम पर था उस समय भी देश के सभी मुख्यमंत्रियों की तुलना में केजरीवाल टीवी पर अधिक छाए रहे ।

 खजाना खाली और प्रचार पर फूंक रहे करोड़ों
एकतरफ केजरीवाल सरकार अपने प्रचार के लिए करोड़ों रुपये फूंक रही है, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार के सामने खजाना खाली होने का रोना भी रो रही है। खजाना भरने के लिए दिल्ली सरकार ने कोरोना के चरम काल में ही सोशल डिस्टेंसिंग की चिंता किए बिना, शराब दुकानें खोलने की इजाजत दे दी और उस पर 70 प्रतिशत कोरोना शुल्क लगा दिया। दिल्ली में महंगाई से जनता बेहाल है। महंगाई की बोझ तले दबी जनता सवाल उठा रही है कि, जो सरकार अपनी आय बढ़ाने के लिए तरह-तरह के कर लगा रही है, वही फिर अपने प्रचार के लिए पैसा पानी की तरह क्यों बहा रही है ?

 कथनी-करनी में अंतर, वादे बड़े- बड़े जाे कभी नहीं हुए पूरे
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कथनी और करनी में काफी अंतर रहता है। कैमरे के सामने लोगों की मदद करने के बड़े-बड़े वादे करने का ढोंग करने वाली सरकार ने दिल्लीवालों को उनकी हालत पर ही छोड़ दिया है। कोरोना काल में भी केजरीवाल सरकार ने लोगों से बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन हकीकत यह थी कि दिल्ली के सरकारी तो क्या प्राइवेट हॉस्पिटल में भी बेड और आक्सीजन उपलब्ध नहीं थे। 

 इनकम टैक्स कमिश्नर होने का झूठा दावा करते रहे केजरीवाल
केजरीवाल हमेशा कहते रहते हैं कि वे इनकम टैक्स कमिश्नर थे, खूब पैसे कमा सकते थे जबकि राजनीति में वे सेवा करने आए हैं। लेकिन इस बयान को नकारते हुए रेवेन्यू अफसरों के संघ ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल कभी कमिश्नर नहीं रहे। केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से कहा था कि वे सुरक्षा नहीं लेंगे, लेकिन हकीकत यह है कि वे हमेशा सुरक्षा घेरे में रहते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कहा था कि वे न तो बड़ा बंगला लेंगे और न हीं बड़ी गाड़ी का उपयोग करेंगे। लेकिन सत्ता संभालते ही वे अपने वादे से मुकर गए।

भ्रष्टाचार को लेकर किया आंदोलन, घोटालों को उजागर करने के वादे से मुकरे
मुख्यमंत्री बनने से पहले केजरीवाल दिल्ली सरकार के घोटालों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। कॉमनवेल्थ घोटाले को लेकर उन्होंने योगगुरु बाबा रामदेव के नेतृत्व में 370 पेज का सबूत थाने में दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद घोटालों को उजागर करने के अपने वादे से वे मुकर गए। उन्होंने कहना शुरू किया कि अगर किसी के पास इन घोटालों को लेकर कोई सबूत हैं तो दें, वे कार्रवाई करेंगे। यहां सोचने और समझने वाली बात यह है कि खुद थाने में सबूत दर्ज करवाने वाले केजरीवाल अब दूसरों से सबूत मांग रहे।

मोहल्ला क्लीनिक बदहाल, नहीं मिलती गंभीर बीमारियों की दवा
दिल्ली सरकार ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट मोहल्ला क्लीनिक को तैयार करने में हजारों करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन फिलहाल इसका बहुत फायदा देखने को नहीं मिल रहा। कई इलाकों में इसकी स्थिति काफी बदहाल है। यहां पर खिड़कियों में लगे शीशे टूट चुके हैं। क्लीनिक के आसपास गंदगी का अंबार लग चुका है। यही नहीं, मोहल्ला क्लीनिक गंभीर बीमारियों के इलाज में भी कारगर नहीं है। यहां छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवा तो मिल जाती है, लेकिन यदि किसी को गंभीर बीमारी हो तो उसके लिए मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर दूसरे अस्पतालों मे रेफर कर देते हैं। हालांकि दिल्ली सरकार दावा करती है कि मोहल्ला क्लीनिक गरीब लोगों के लिए बनाए गए हैं। इसमें सभी बीमारियों के इलाज और जांच भी की जाती है।

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