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पार्क में लगने वाली अनौपचारिक पाठशाला में आयी जब एक खास टीचर

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जया प्रयास हेल्‍प फाउंडेशन की साक्षरता मुहिम से वंचित समाज के बच्‍चों की संवर रही जिंदगी

सुनील वर्मा

गाजियाबाद। स्‍थान था, इंदिरापुरम के नीति खंड-1 का हाथी पार्क। जहां पिछले आठ सालों से 70 साल की एक रिटायर्ड टीचर जया बत्रा रावत गरीब परिवारों के कूडा बीनने वाले बच्‍चों को अनौपचारिक पाठशाला लगाकर बेसिक शिक्षा देती। उन्‍हें आगे की पढाई के लिए प्रेरित करती है। जया बत्रा के एनजीओं जया प्रयास हेल्‍प फाउंडेशन द्वारा संचालित की जाने वाली अनौपचारिक पाठशाला में शनिवार को एक खास मौका था। दो दशक पहले दिलशाद गार्डन दिल्‍ली के जिस ग्रीनफील्‍ड पब्लिक स्‍कूल में जया बत्रा ने ममता नाम की बालिका को केजी कक्षा से पढाना शुरू किया था। वह आज अपनी टीचर की अनौपचारिक पाठशाला में अध्‍यापिका बनकर पहुंची है। बच्‍ची से अध्‍यापिका बनी ममता शनिवार को अपनी गुरू की अनौपचारिक पाठशाला में बतौर अतिथि पहुंची थी। जहां उन्‍होंने बच्‍चों को पढ़ाने के साथ कई तरह के प्रेरक प्रसंग सुनाए। साथ ही बच्‍चों के साथ कई तरह की खेल कूद गतिविधियां करने के बाद उन्‍हें एनजीओ की तरफ से बनवाया गया भोजन अपने हाथों से वितरित किया। इस सुखद अनुभूति से पाठशाला में पढने वाले बच्‍चें भी भाव विह्वल हो गए।

गाजियाबाद में चल रही तमाम सामाजिक संस्‍थाओं में जया बत्रा की जया प्रयास हेल्‍प फाउंडेशन एनजीओ अकेली ऐसी संस्‍था है जो बिना किसी सरकारी सहयोग के हर रोज हाथी पार्क में पाठशाला लगती है। इसमें इंदिरापुरम व आसपास के रहने वाले उन गरीब परिवारों के छोटे-बड़े बच्‍चे पढने के लिए आते हैं जिनमें स्‍कूल जाकर पढ़ने लिखने की सार्मथ्‍य नहीं है। इस पाठशाला में इन दिनों करीब 200 बच्‍चे रोज पढने आते हैं। इनके लिए कापी-किताब से लेकर उनके लिए बैग, पहनने के लिए कपड़ों की व्‍यवस्‍था भी संस्था की तरफ से की जाती है। इतना ही नहीं इन बच्‍चों के परिवारों की मां-बहने जो लोगों के घरों में कामकाज कर परिवार चलाती है वे भी बच्‍चों से प्रेरित होकर साक्षर बनने के लिए और सामाजिक ज्ञान व संस्‍कार लेने के लिए पाठशाला में आती है। संस्‍था की तरफ से पाठशाला खत्‍म होंने के बाद इन्‍हें खाने के लिए कोई पोष्टिक आहार जरूर दिया जाता है। संस्‍था के साथ अब काफी लोग जुड़ चुके है जो आर्थिक रूप से मदद देकर जया बत्रा के इस नेक काम में सहयोग करते हैं। संस्‍था इन परिवारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए समय-समय पर राशन वितरण भी करती है।

स्‍कूल में वांलटियर के रूप में काम करने वाली प्रोमिला गुलाटी, हरिप्रिया सप्‍पम व डांस टीचर असलम खान यूं तो बराबर बच्‍चों व महिलाओं को पढाने से लेकर उन्‍हें खेलने, कूदने व गाने-बजाने के साथ सभी तरह की सांस्‍कृतिक गतिविधियां कराते हैं। लेकिन अगर कोई ना भी हो तब भी जया बत्रा बढती उम्र के बावजूद पूरी ऊर्जा के साथ अकेले इस जिम्‍मेदारी को निभाती हैं। हर रोज सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक एनजीओं की पाठशाला के बच्‍चों से गुलजार रहने वाले हाथी पार्क के नजदीक से गुजरते लोगों के लिए हैरानी का विषय होता है कि हर रोज इन बच्‍चों को पाठशाला के बच्‍चों के लिए आखिर भोजन की व्‍यवस्‍था कैसे और कहां से होती है।

जया बत्रा बताती है कि भले ही उन्‍होंने अकेले ये प्रयास शुरू किया था। लेकिन आज सैंकड़ो लोग उनकी इस मुहिम में साथ जुड़ चुके है। इन्‍हीं सहयोगी लोगों की मदद से न सिर्फ बच्‍चों की पढाई-लिखाई उनके कॉपी किताब के खर्च की व्‍यवस्‍था होती है। बल्कि इन्‍हें हर रोज कुछ ना कुछ पोष्टिक आहार दिया जाता है। जया बत्रा कहती है कि उनका मकसद है कि वंचित परिवारों के ये बच्‍चे एक अच्‍छे नागरिक बने और उनमें पढने लिखने की रूचि पैदा हो। बच्‍चों में जब आगे पढने की उत्‍सुकता पैदा हो जाती है तो वे उनकी एनजीओं बच्‍चों को आसपास के सरकारी स्‍कूलों में दाखिला दिला देते हैं।

शनिवार को अपनी स्‍टूडेंट ममता के अध्‍यापन में लगी पाठशाला में जया बत्रा ने एक परिवार के चार ऐसे भाई बहनों से सबका परिचय कराया जिस परिवार की तीन लडकियां उनकी पाठशाला में शुरूआती दौर में पढी फिर सरकारी स्‍कूल में उनका दाखिला कराया गया । इनमें से एक बहन की शादी हो चुकी है बाकी दो पढ लिखकर अपनी आजीविका पर लगी है। एक भाई, मां व बहन अभी भी उनकी पाठशाला में ज्ञान की कुंजी हासिल कर रही हैं।

शनिवार को लगी पाठशाला में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित लेखक-‘बलराम अग्रवाल’ की पुस्तक    “माणा में मणिका” के साथ बच्‍चों को कॉपी किताबें भी वितरित की गई। जो  12 -14 आयु वर्ग  के छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक तथा संस्कारों से भरपूर अनमोल व अदभुत पुस्तक है। उत्‍तराखंड में यात्रा वर्तांत पर लिखी गई इस पुस्‍तक में बच्‍चों के लिए प्रेरक कहानियां हैं। पाठशाला के आयोजन को रोचक बनाने के लिए पढने वाली कामकाजी महिलाओं को रैंप पर चलने और ब्‍यूटी कॉम्‍पीटिशन तक की स्‍पर्धा करायी गई। संस्‍था से जुड़े एक वालंटियर नरेन्‍द्र नंदा की तरफ से बच्‍चों को कोल्‍ड ड्रिंक व बिस्‍कुट वितरित किए गए।

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