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बेहाल स्वास्थ्य सुविधाए- जिले की 50 में से 21 पीएचसी पर डॉक्टर के अलावा स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफ की पर्याप्त नियुक्ति नहीं

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गाज़ियाबाद। कोरोना संक्रमण के बाद पूरे देश में स्वास्थ्य सुविधाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय बजट में भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। हालांकि जिले में पिछले लगभग पांच साल से अर्बन पीएचसी पर डॉक्टर्स और स्टाफ के पद खाली पड़े हैं। इतना ही नहीं रोगी कल्याण के लिए शासन से मिलने वाले बजट को भी जिले में 50 प्रतिशत तक भी खर्च नहीं किया जा रहा है।

जिले में वर्ष 2015-16 में 50 अर्बन पीएचसी बनाई गई थीं। पांच साल बाद भी इनमें से महज 29 पर ही चिकित्सा प्रभरियों (डॉक्टर) की तैनाती की जा सकी है। 21 अर्बन पीएचसी पर डॉक्टर के अलावा स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफ की पर्याप्त नियुक्ति नहीं है। अर्बन पीएचसी की स्थापना इसलिए की गई थी कि छोटी-मोटी बीमारियों के लिए मरीजों को जिला अस्पातल तक ना आना पड़े। उन्हें घर के पास में ही उपचार की सुविधा मिल सके, लेकिन शासन स्तर से डॉक्टर की तैनाती नहीं होने के चलते ऐसा नहीं हो सका। इतना ही नहीं 9 अर्बन पीएचसी पर गर्भवती महिला के प्रसव के लिए भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन इनमें से भी केवल दो पर ही प्रसव करवाए जा रहे हैं। 7 अर्बन पीएचसी पर डॉक्टर और लेबर रूम नहीं होने के चलते प्रसव नहीं करवाए जाते। हालांकि शासन स्तर से हर साल डॉक्टर्स और स्टाफ के पदों के अनुरूप बजट जरूर जारी कर दिया जाता है जो हर साल वापस भेजा जाता है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को पत्र भेजकर कई बार अवगत भी करवाया गया है और स्टाफ की नियुक्ति की मांग भी की गई है।

अर्बन पीएचसी पर रोगी कल्याण के लिए भी बजट आता है। इस बजट से उन रोगियों की सहायता की जाती है, जिनका उपचार सरकारी स्तर पर संभव नहीं है और गरीबी के चलते वे निजी अस्पताल में उपचार नहीं करवा सकते। ऐसे मरीजों को आर्थिक सहायता देकर उनका उपचार करवाया जाता है। प्रत्येक अर्बन पीएचसी को इसके लिए साल में एक लाख रुपए का बजट मिलता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अर्बन पीएचसी प्रभारी की नियुक्ति नहीं होने से 21 सेंटर्स पर तो यह बजट खर्च ही नहीं हो पाता और अन्य सेंटर्स पर भी रोगी कल्याण समिति का गठन नहीं होने के चलते बजट खर्च नहीं होता। वर्ष 2020-21 में रोगी कल्याण के लिए शासन से 50 लाख रुपए जारी हुए थे, लेकिन उसमें से महज 5.88 लाख रुपए की खर्च हो सके हैं। इससे पिछले साल भी इस बजट का महज 20 प्रतिशत ही खर्च हो सका था। सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता का कहना है कि जिले में डॉक्टर्स के कई पद खाली हैं, जिन पर तैनाती के लिए शासन को लिखा गया है। जिले में दो पद हैं, उनके लिए शासन से बजट आ जाता है, लेकिन नियुक्ति नहीं होने के चलते उसे साल के अंत में वापस कर दिया जाता है। उस बजट को बिना शासन की अनुमति के दूसरे कार्य में खर्च नहीं किया जा सकता।

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